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समय से पहले हवाईअड्डे पहुंचने पर भी विमानों की लैंडिंग में होती है देरी, ये है वजह
Sun, 13 Jan 2019 09:32 AM IST
Shilpa Thakur
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shilpa Thakur
Updated Sun, 13 Jan 2019 09:32 AM IST
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सार
- फ्लाइट की लैंडिंग में देरी के पीछे हैं कई कारण।
- समय से पहले उड़ान भरने वाली फ्लाइट से नुकसान।
- एटीसी ने किया अध्ययन।
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- फोटो :
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विस्तार
भारत के सबसे व्यस्त हवाईअड्डे हैं, दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू। ये हवाईअड्डे उड़ान में देरी के लिए जाने जाते हैं। इसके पीछे की वजह यहां का खराब इन्फ्रां क्रंच है। जिसके कारण न तो समय पर टेकऑफ हो पाता है और न ही लैंडिंग। ऐसा अधिकतर बार होता है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने अपने अध्ययन में पाया है कि टाइम परफॉर्मेंस (ओटीपी) को बेहतर करने के लिए जो तरीका इस्तेमाल होता है उससे विमानों की लैंडिंग में देरी की समस्या बढ़ जाती है।
एटीसी ने इन तीन हवाईअड्डों में बीते साल 24 सितंबर से 30 नवंबर तक अध्ययन किया। इसमें देखा गया कि जो भी विमान इन तीन हवाईअड्डों के लिए अपने तय समय पर उड़ान भरते हैं उनमें से कितने समय पर पहुंच पाते हैं। इस अध्ययन में 46,378 फ्लइट्स को शामिल किया गया। अध्ययन में पता चला कि 2,569 फ्लाइट यानी 5.5 फीसदी इन तीन हवाईअड्डों के लिए करीब 60 से अधिक विभिन्न हवाईअड्डों से अपने तय समय से पहले उड़ान भरती हैं। करीब 11,249 फ्लाइट इन तीन हवाईअड्डों पर समय से पहले ही आ जाती हैं।
इसका मतलब ये हुआ कि दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू आने वाली ये फ्लाइट तय समय से पहले पहुंच जाती हैं। इससे उन फ्लाइट्स की उड़ान पर प्रभाव पड़ता है जो उस वक्त उड़ान भर रही होती हैं। जिस कारण उस जल्दी पहुंच चुकी फ्लाइट को लैंडिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है। जब जगह खाली होती है तभी लैंडिंग हो पाती है। अगर जल्दी पहुंच चुकी फ्लाइ खाली जगह देखकर लैंडिंग कर भी ले तो दूसरी फलाइट (जिसे उस वक्त उड़ान भरनी होती है) को इंतजार करना पड़ता है।
अध्ययन में पता चला है कि एयरलाइंस ऐसा अपने ओटीपी को बहेतर करने के लिए करती हैं ताकि यात्रियों को लुभाया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह तय किया गया है कि एयरलाइंस सही समय पर विमानों की उड़ान पर ध्यान दें। साथ ही फ्लाइट्स को समय से पहले इन तीन हवाईअड्डों के लिए उड़ान की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया सही ब्लॉक समय का पता लगाने के लिए साल भर अध्ययन भी करेगा।
दिल्ली और मुंबई हवाईअड्डों पर पूरे भारत का करीब 60 फीसदी विमानन यातायात निर्भर करता है। अगर यहां फ्लाइट में देरी होती है तो उसका असर बाकी कई सेक्टरों पर भी पड़ता है। एक अधिकारी ने कहा कि जब तक इंफ्रा में समय लगेगा तब तक अन्य उपाय किए जाएंगे। ताकि विमानों में होने वाली देरी को कम किया जा सके।