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फ्लैशबैकः जब 'अंतरात्मा' की आवाज पर चुना गया था देश का राष्ट्रपति

Mon, 17 Jul 2017 05:18 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Mon, 17 Jul 2017 05:18 PM IST
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Flashback of president election: when vv giri elected on voice of soul

देश में 14वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए वोटिंग जारी है, रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार में से कौन देश का अगला राष्ट्रपति चुना जाता है इसका फैसला 20 जुलाई को होगा और इसी के साथ ही देश को अगला राष्ट्रपति भी मिल जाएगा।

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चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के अलावा देशभर के विधायक भी अपनी-अपनी विधानसभाओं में राष्ट्रपति चुनाव के‌ लिए वोट डाल रहे हैं। यूं तो वोटों के गणित में एनडीए उम्‍मीदवार रामनाथ कोविंद अपनी विपक्षी उम्‍मीदवार से काफी आगे नजर आ रहे हैं, लेकिन विपक्ष की उम्‍मीदवार मीरा कुमार भी हार मानने को तैयार नहीं हैं।
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वोटों का गणित पक्ष में न होने के बाद भी उन्होंने मतदाताओं से अंतरात्मा' की आवाज पर वोट डालने की अपील की है। हालांक‌ि इस कवायद के बाद भी उनका जीतना असंभव ही नजर आ रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतिहास में एक राष्ट्रपति चुनाव ऐसा भी हुआ है जिसमें अंतरात्मा' की आवाज पर पड़े वोटों ने ही एक प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित कर दी थी।
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खास बात ये है कि यह अपील खुद प्रत्याशी ने नहीं बल्कि देश की प्रधानमंत्री ने की थी। आइए आपको इतिहास के पन्नों से रूबरू कराते हैं ऐसे ही एक चुनाव से।

Flashback of president election: when vv giri elected on voice of soul

यह मामला है देश के चौथे राष्ट्रपति से जुड़े चुनाव का, जिसका किस्सा शुरू होता है देश के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन से। जिनकी मृत्यु अपने कार्यकाल के दौरान ही 3 मई 1969 को हो गई थी। उस दौरान उप राष्ट्रपति थे वीवी गिरी। जाकिर हुसैन की मौत के बाद वीवी गिरी को कार्यवाहक उपराष्ट्रपति बनाया गया। 

अब क्योंकि नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव होना था और उस समय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की इच्छा थी आंध प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नीलम संजीवा रेड्डी को प्रत्याशी बनाने की। इस मुद्दे पर शीर्ष नेतृत्व की राय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुदा थी जो उप राष्ट्रपति वीवी गिरि को ही राष्ट्रपति बनवाना चाहती थी। 

इंदिरा जानती थी कि बड़े कद वाले नीलम रेड्डी सत्ता में उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। असल में उस समय इंदिरा गांधी के बाद कांग्रेस में जिस नेता को सबसे कद्दावर माना जाता था वो आंध्र के एक पिछड़े जिले के किसान के बेटे नीलम संजीवा रेड्डी ही थे और इंदिरा के निरंकुश स्वभाव पर रोकथाम के लिए कांग्रेस नेतृत्व उन्हें ही सबसे मजबूत उम्‍मीदवार मानता था।

इस बात को इंदिरा भी खूब समझती थी इसलिए उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति वीवी गिरि को इशारा कर दिया। हालांकि उस समय कांग्रेस नेतृत्व के सामने इंदिरा की एक न चली और संजीव रेड्डी को सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्‍मीदवार बना दिया गया।

दूसरी ओर इंदिरा का इशारा पाकर वीवी गिरि ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय ही चुनाव मैदान में कूद पड़े। हालांकि उस समय उनकी जीत पक्‍की नहीं थी लेकिन इंदिरा ने अंदरखाने उनके लिए जोड़तोड़ शुरू कर दी। इसी बीच वो वक्त भी आ गया जब दोनों प्रत्याशी मैदान में आमने सामने थे और कुछ समय बाद उनके लिए संसद और विधानसभाओं में वोट भी डाले जाने थे।

अगले चुनाव में गिरि ने लिया हार का बदला, निर्विरोध बने राष्ट्रपति

Flashback of president election: when vv giri elected on voice of soul

इसी बीच प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मतदान करने वाले सभी जनप्रतिनिधियों के सामने एक ऐसी बात कह दी जिसने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित विपक्षियों को भी हैरत में डाल दिया। इंदिरा ने कहा वोट डालने वाले सभी लोग अपनी 'अंतरात्मा'' की आवाज पर वोट दें और जो बेहतर उम्‍मीदवार हो उसे ही चुनें।

इंदिरा की इस अपील का असर भी हुआ और पहली बार सत्तारूढ़ दल के उम्‍मीदवार को अत्प्रत्याशित रूप से राष्ट्रपति चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। नीलम संजीवा रेड्डी विपक्ष के उम्‍मीदवार वीवी गिरि मामूली अंतर से चुनाव हार गए। इस हार का रेड्डी पर ऐसा असर हुआ कि वो कुछ समय के लिए राजनीति छोड़कर अपने गृहक्षेत्र पहुंच गए और दोबारा किसानों से जुड़ गए।

वहीं अंतरआत्मा की आवाज पर चुने गए वीवी गिरि ने राष्ट्रपति का पदभार संभाल लिया। हालांकि कुछ साल बाद ही रेड्डी का दौर दोबारा लौटा और जनता पार्टी की सरकार आने के बाद उन्हें राष्ट्रपति चुना गया।

रेड्डी का चुनाव भी बड़ा खास रहा, 1977 में हुए चुनाव में कुल 37 प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन रिर्टनिंग अधिकारी ने रेड्डी को छोड़कर बाकी 36 प्रत्याशियों का पर्चा रद कर दिया और रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए। आज तक यह रिकार्ड उनके नाम ही कायम है।

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