ये हैं वो पांच चेहरे जिनमें से चुना जा सकता है अगला राष्ट्रपति
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यूपी चुनावों के बाद भाजपा और केंद्र सरकार का अगला राजनीतिक लक्ष्य है अपनी पसंद के राष्ट्रपति का चुनाव करवाना। यूपी और उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा की यह राह कुछ आसान भी हो गई है, लेकिन अब सबसे बड़ा पेंच राष्ट्रपति के नाम को लेकर फंसा है।
इस पद पर वैसे तो सबसे मजबूत दावेदारी भाजपा के शिखर पुरुष और पार्टी को 2 से 200 सांसदों तक पहुंचाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी की ही है, लेकिन संघ से खराब हो चुके रिश्तों और पार्टी में हाशिये पर जाने के बाद अब उनका दावा उतना मजबूत नहीं दिखता। रही सही कसर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे बाबरी विवाद के मामले में दोबारा उनका नाम आने से पूरी हो गई।
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अब वो कौन सा चेहरा होगा जिसे पार्टी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाएगी। आइए ऐसे ही कुछ नामों से आपका परिचय कराते हैं जिनकी इस पद पर सबसे मजबूत दावेदारी है।
मुरली मनोहर जोशी
आडवाणी के बाद पार्टी के दूसरे सबसे वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार हैं। हालांकि पूर्व में आडवाणी की राष्ट्रपति तो जोशी की उप राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पक्की मानी जा रही थी लेकिन वक्त के साथ आडवाणी इस लिस्ट से आउट हुए तो जोशी का नाम ऊपर आ गया।
जोशी के पक्ष में जो बात जा सकती है वो है संघ से उनकी नजदीकियां। जोशी को आज भी संघ नेताओं का वरदहस्त हासिल है। निर्विवादित छवि के कारण उनके नाम पर शायद ही किसी को आपत्ति हो। हालांकि बाबरी मस्जिद मामले में एक बार फिर उनका नाम आना उनकी मुश्किलें भी बढ़ा सकता है।
सुषमा स्वराज
देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी इस पद के लिए पार्टी और संघ की पसंद मानी जा रही हैं। सुषमा को आगे बढ़ाने की वजह ये भी माना जा रहा है कि लगातार खराब रहती सेहत के कारण वह सक्रिय राजनीति में पहले की तरह भागीदारी नहीं कर पा रही हैं। हालांकि आज भी उनकी गिनती मोदी सरकार के सबसे योग्य और एक्टिव रहने वाले मंत्रियों में होती है।
सुषमा को भाजपा का बेबाक छवि वाला निर्विवाद चेहरा माना जाता है जो किसी भी तरह के विवादों से कोसों दूर हैं। ऐेसे में पार्टी उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए अपना चेहरा बनाकर देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति के पद पर बैठा सकती है।
राम नाईक
यूपी के राज्यपाल और वाजपेयी सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे राम नाईक भी भाजपा की ओर से राष्ट्रपति पद के चेहरे हो सकते हैं। संघ की पृष्ठभूमि और हार्डकोर हिंदुत्व वाले राम नाईक भाजपा की उन उम्मीदों पर खरा उतर सकते हैं जो हिंदुत्व को बढ़ावा देती हैं।
राम नाईक खुलकर संघ के साथ अपनी नजदीकियों और हिंदुत्व का समर्थन कर चुके हैं। वैसे भी अखिलेश सरकार के दौरान राम नाईक की कार्यप्रणाली की प्रधानमंत्री मोदी के साथ साथ संघ भी सराहना करता रहा है। जिस तरह हर बड़े मुद्दे पर राम नाईक अपनी ओर से सरकार को नसीहत देने में पीछे नहीं रहते थे उसने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को काफी प्रभावित किया है।
वैंकेया नायडू
मोदी सरकार में संसदीय कार्यमंत्री वैंकेया नायडू को भी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। निर्विवादित छवि वाले वैंकेया पूर्व में भाजपा अध्यक्ष भी रहें हैं और उनके कार्यकाल और खुल कर बाकी की सराहना हर ओर की जाती है। खास बात ये है कि नायडू के विरोधी दलों में भी अच्छे संबंध हैं इसलिए उन्हें भाजपा का संकटमोचन भी कहा जाता है।
नायडू के पक्ष में एक बात यह भी जा सकती है कि पार्टी उन्हें मौका देकर दक्षिण में एक संदेश भी दे सकती है। जिससे वहां पार्टी को अपनी बढ़त मिलाने में मदद मिले। नायडू भाजपा के लिए ऐसा नाम भी हो सकते हैं जिस पर कोई आपत्ति न करे।
लाल कृष्ण आडवाणी
तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के नाम को अभी भी खारिज नहीं किया जा सकता। पार्टी में बेशक उनका रुतबा पहले जैसा ना रहा हो लेकिन उनके समर्थकों की भी कमी नहीं है। बेशक कभी उनके शिष्य रहे नरेन्द्र मोदी ने उन्हें दरकिनार कर दिया हो लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज जैसे नेता आज भी उनके बड़े समर्थक हैं।
ऐसे में अगर बड़े नेताओं की पैरवी काम कर गई तो आडवाणी को पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बना सकती है। संघ में भी आडवाणी के समर्थकों की कमी नहीं है जो मौका पड़ने पर खुलकर आडवाणी की पैरवी कर सकते हैं।