{"_id":"64787354fa5142ab140e571e","slug":"five-big-steps-of-congress-government-of-rajasthan-in-discussion-before-elections-how-will-bjp-answer-them-2023-06-01","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: चुनाव से पहले चर्चा में राजस्थान की कांग्रेस सरकार के ये पांच बड़े कदम, BJP कैसे देगी इनका जवाब?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Rajasthan: चुनाव से पहले चर्चा में राजस्थान की कांग्रेस सरकार के ये पांच बड़े कदम, BJP कैसे देगी इनका जवाब?
Thu, 01 Jun 2023 04:01 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 01 Jun 2023 04:01 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
अशोक गहलोत
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
इस साल के अंत में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अभी कांग्रेस की सरकार है। तेलंगाना में बीआरएस, मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट और मध्य प्रदेश में भाजपा सत्ता में है।पांचों राज्यों में सभी पार्टियां अभी से चुनावी तैयारी में लग गई हैं। बुधवार को राजस्थान में बड़ी चुनावी हलचल रही। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजमेर में बड़ी जनसभा की। वहीं, रात को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कुछ बड़े एलान किए।
गहलोत के ये एलान चुनाव से जोड़कर देखे जा रहे हैं। इससे पहले भी गहलोत ऐसे एलान कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस इनके जरिए राज्य की सत्ता में दोबारा वापसी की उम्मीद कर रही है। आइए जानते हैं गहलोत के इन पांच बड़े वादों के बारे में जिनके जरिए कांग्रेस को राजस्थान में रिवाज बदलने की उम्मीद है।
1. 100 यूनिट बिजली मुफ्त करने का एलान: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार रात घोषणा करते हुए 1.10 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी। ये गहलोत का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। गहलोत ने कहा कि मैंने पिछले बजट में घोषणा की थी कि बिजली की 50 यूनिट निशुल्क दी जा रही है, उसको 100 यूनिट किया जाएगा।
उसके अनुसार एक मई से यह घोषणा हुई। पहला बिल एक से 15 जून के बीच में आएगा। उसमें 100 यूनिट तमाम प्रदेशवासियों को फ्री दी जाएगी। चाहे वो कितनी ही बिजली कंज्यूम करें, तब भी 100 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी। उसके अलावा इंसेंटिव दिया जा रहा है, जो अपने आप को 200 यूनिट तक पाबंद रखेंगे, उनकी 100 यूनिट तो फ्री होगी ही, उसके अलावा 100 से 200 यूनिट तक उनका भी फिक्स चार्ज और अन्य चार्जेज सरकार की ओर से दिए जाएंगे। आमतौर पर चुनावी घोषणा पत्रों में इस तरह के एलान होते हैं, लेकिन गहलोत ये पहले से ही लागू कर रहे हैं। इसके जरिए वह आम वोटर्स के बीच अपनी पैठ और अधिक मजबूत करने की कोशिश में हैं।
उसके अनुसार एक मई से यह घोषणा हुई। पहला बिल एक से 15 जून के बीच में आएगा। उसमें 100 यूनिट तमाम प्रदेशवासियों को फ्री दी जाएगी। चाहे वो कितनी ही बिजली कंज्यूम करें, तब भी 100 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी। उसके अलावा इंसेंटिव दिया जा रहा है, जो अपने आप को 200 यूनिट तक पाबंद रखेंगे, उनकी 100 यूनिट तो फ्री होगी ही, उसके अलावा 100 से 200 यूनिट तक उनका भी फिक्स चार्ज और अन्य चार्जेज सरकार की ओर से दिए जाएंगे। आमतौर पर चुनावी घोषणा पत्रों में इस तरह के एलान होते हैं, लेकिन गहलोत ये पहले से ही लागू कर रहे हैं। इसके जरिए वह आम वोटर्स के बीच अपनी पैठ और अधिक मजबूत करने की कोशिश में हैं।
2. पुरानी पेंशन की फिर से बहाली: राजस्थान में साढ़े सात लाख सरकारी कर्मचारी हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एलान कर दिया है कि पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू किया है। अब जहां, अशोक गहलोत सरकार के सामने पुरानी पेंशन के लिए बजट जुटाने की चुनौती है, वहीं भाजपा के सामने इससे निपटने की। क्योंकि, केंद्र सरकार नहीं चाहती है कि किसी भी हालत में पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू किया जाए।
3. संविदा कर्मचारियों को स्थायी नौकरी: पिछले साल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के एक लाख से ज्यादा संविदा कर्मचारियों को स्थायी कर दिया है। संविदा कर्मचारी और उनके परिवार इससे काफी खुश हैं। भाजपा के सामने गहलोत के इस कदम को काउंटर करने की बड़ी चुनौती है।
4. 500 रुपये में रसोई गैस: देशभर में रसोई गैस की किमतें 1100 रुपये के पार पहुंच चुकी हैं। अशोक गहलोत सरकार के चार साल पूरे होने पर एलान किया था कि बीपीएल कार्ड धारकों और उज्जवला गैस योजना के अंतर्गत जिन्हें गैस चूल्हा मिला है, उन्हें 500 रुपये में ही रसोई गैस दी जाएगी। इस दायरे में आने वाले लोग सालभर में 12 गैस सिलेंडर सब्सिडी पर ले सकते हैं। इसका फायदा राजस्थान के करीब पांच लाख से ज्यादा लोगों को मिलने लगा है। गहलोत का ये फैसला भी बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
5. इलाज की गारंटी देने वाला देश का पहला राज्य
इसी साल मार्च में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा एलान किया। उन्होंने राजस्थान में राइट टू हेल्थ यानी स्वास्थ्य की गारंटी दी। इस बिल के विधानसभा से पारित होने के बाद कोई भी प्राइवेट अस्पताल किसी को भी इलाज देने से मना नहीं कर सकता है। अस्पताल में हर व्यक्ति को इलाज की गारंटी मिलेगी। बिल में ये भी प्रावधान है कि गंभीर हालात में किसी भी अस्पताल में मरीज को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।
किसी भी तरह किसी भी मरीज को इलाज देने से अस्पताल वाले इनकार नहीं कर सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकार एक अलग फंड तैयार करेगी। मरीजों की शिकायत के लिए जिला और राज्य स्तर पर एक प्राधिकरण बनाया जाएगा। गहलोत की इस योजना का आम लोगों को काफी फायदा मिलेगा, लेकिन प्रदेश के डॉक्टर्स इसका विरोध कर रहे हैं। कई दिनों तक इसके विरोध में डॉक्टर्स ने धरना प्रदर्शन भी किया।
इसी साल मार्च में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा एलान किया। उन्होंने राजस्थान में राइट टू हेल्थ यानी स्वास्थ्य की गारंटी दी। इस बिल के विधानसभा से पारित होने के बाद कोई भी प्राइवेट अस्पताल किसी को भी इलाज देने से मना नहीं कर सकता है। अस्पताल में हर व्यक्ति को इलाज की गारंटी मिलेगी। बिल में ये भी प्रावधान है कि गंभीर हालात में किसी भी अस्पताल में मरीज को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।
किसी भी तरह किसी भी मरीज को इलाज देने से अस्पताल वाले इनकार नहीं कर सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकार एक अलग फंड तैयार करेगी। मरीजों की शिकायत के लिए जिला और राज्य स्तर पर एक प्राधिकरण बनाया जाएगा। गहलोत की इस योजना का आम लोगों को काफी फायदा मिलेगा, लेकिन प्रदेश के डॉक्टर्स इसका विरोध कर रहे हैं। कई दिनों तक इसके विरोध में डॉक्टर्स ने धरना प्रदर्शन भी किया।
गहलोत के इन कदमों से कैसे निपटेगी भाजपा?
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, चुनाव के नजदीक ही सही, कांग्रेस ने वो काम करने शुरू कर दिए हैं, जिसका वादा करके राजनीतिक पार्टियां सत्ता में आती हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस अंदरूनी कलह को सही कर ले तो इन योजनाओं का फायदा आने वाले विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। भाजपा नहीं चाहती है कि पुरानी पेंशन योजना लागू हो। संसद में भाजपा के नेता और मंत्री इसको लेकर बयान दे चुके हैं। इसी तरह संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने और सस्ती बिजली मुहैया कराने जैसे मुद्दे भी भाजपा को परेशान कर सकते हैं। हां, 100 यूनिट मुफ्त बिजली, सस्ती रसोई गैस और छात्राओं को स्कूटी वितरण जैसी योजनाएं जरूर कई भाजपा शासित राज्यों में चल रही हैं।'
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, चुनाव के नजदीक ही सही, कांग्रेस ने वो काम करने शुरू कर दिए हैं, जिसका वादा करके राजनीतिक पार्टियां सत्ता में आती हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस अंदरूनी कलह को सही कर ले तो इन योजनाओं का फायदा आने वाले विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। भाजपा नहीं चाहती है कि पुरानी पेंशन योजना लागू हो। संसद में भाजपा के नेता और मंत्री इसको लेकर बयान दे चुके हैं। इसी तरह संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने और सस्ती बिजली मुहैया कराने जैसे मुद्दे भी भाजपा को परेशान कर सकते हैं। हां, 100 यूनिट मुफ्त बिजली, सस्ती रसोई गैस और छात्राओं को स्कूटी वितरण जैसी योजनाएं जरूर कई भाजपा शासित राज्यों में चल रही हैं।'
भाजपा के पास गहलोत सरकार के खिलाफ क्या हैं मुद्दे?
प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, 'राजस्थान में भाजपा के पास सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा कांग्रेस के अंदर आंतरिक कलह है। कांग्रेस में अगर समय रहते आंतरिक कलह खत्म नहीं होती है तो चुनाव में इसका फायदा भाजपा को हो सकता है। इसके अलावा भाजपा के पास दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा कानून व्यवस्था का है। पिछले कुछ समय में राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से बड़ी आपराधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। भाजपा चुनाव में इसके जरिए कांग्रेस पर सवाल उठाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा जातीय और धार्मिक समीकरण को भी भाजपा मजबूत बनाने की कोशिश करेगी। भाजपा हर चुनाव में राष्ट्रवाद का मुद्दा भी जोरशोर से उठाती है। ऐसे में विदेश यात्राओं पर पीएम मोदी और देश को लेकर दी गई राहुल की टिप्पणी को भी मुद्दा बनाया जा सकता है।'
प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, 'राजस्थान में भाजपा के पास सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा कांग्रेस के अंदर आंतरिक कलह है। कांग्रेस में अगर समय रहते आंतरिक कलह खत्म नहीं होती है तो चुनाव में इसका फायदा भाजपा को हो सकता है। इसके अलावा भाजपा के पास दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा कानून व्यवस्था का है। पिछले कुछ समय में राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से बड़ी आपराधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। भाजपा चुनाव में इसके जरिए कांग्रेस पर सवाल उठाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा जातीय और धार्मिक समीकरण को भी भाजपा मजबूत बनाने की कोशिश करेगी। भाजपा हर चुनाव में राष्ट्रवाद का मुद्दा भी जोरशोर से उठाती है। ऐसे में विदेश यात्राओं पर पीएम मोदी और देश को लेकर दी गई राहुल की टिप्पणी को भी मुद्दा बनाया जा सकता है।'