फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   First time a CM of Rajasthan is facing problems, Congress became democratic

पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के सामने खड़ी हुई परेशानी, लोकतांत्रिक हुई कांग्रेस

Sat, 22 Dec 2018 05:14 PM IST
Gaurav Pandey शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Sat, 22 Dec 2018 05:14 PM IST
विज्ञापन
First time a CM of Rajasthan is facing problems, Congress became democratic
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

राजस्थान के नए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ दिल्ली में हैं। वह बृहस्पतिवार को दिल्ली आए थे और रविवार तक उनके दिल्ली में रहने की उम्मीद है। गहलोत अपने मंत्रिमंडल गठन के लिए शामिल होने वाले चेहरों पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मंजूरी लेने आए हैं। 

विज्ञापन


दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत को तीसरी पारी में पहली बार कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। उम्मीद है कि शनिवार या रविवार तक उन्हें मंत्रिमंडल का स्वरूप तैयार करने में सफलता मिल जाएगी और सोमवार को राज्य में मंत्रियों का शपथ ग्रहण संभव हो सकेगा।

विज्ञापन

बहुत लोकतांत्रिक हो गई है कांग्रेस?

कांग्रेस पार्टी बहुत लोकतांत्रिक हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सबको साथ लेकर, सबके सम्मान की अहमियत देकर चलना चाहते हैं। इसलिए पहली बार राजस्थान में मंत्रिमंडल के गठन के लिए राज्य के मुख्यमंत्री को राज्य के प्रभारी अविनाश पांडे, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ बैठक करनी पड़ी। शुक्रवार को गहलोत दिनभर जोधपुर हाऊस में रहे। 

शाम को कांग्रेस पार्टी के चुनाव वार रुम कहे जाने वाले गुरुद्वारा रकाब गंज कार्यालय में गए। वहां तीनों नेताओं मे बैठक करके एक-एक संभावित नाम पर चर्चा की। इस चर्चा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल भी शामिल हुए हैं और अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक में मंजूरी मिलने के बाद ही मंत्रिमंडल के गठन का रास्ता साफ हो सकेगा।


अभी तक क्या रही परंपरा

राज्य में मुख्यमंत्री का चयन चुनकर आए विधायक द्वारा अपना नेता चुनने और कांग्रेस हाई कमान की अनुमति से होता रहा है। मुख्यमंत्री का चयन हो जाने के बाद चयनित व्यक्ति अपने वरिष्ठ सहयोगियों की सलाह पर अपने मंत्रिमंडल का गठन करता आया है। मंत्रिमंडल का गठन मुख्यमंत्री का अधिकार है। 

लिहाजा नाम तय करके मुख्यमंत्री यदि चाहते थे तो वह कांग्रेस अध्यक्ष की सलाह लेते थे और एक-दो नाम के संशोधन के साथ मंत्रिमंडल का गठन हो जाता था। इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष तीनों राज्य में एक ही दिन राजस्थान, छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल का गठन और मंत्रियों के शपथ ग्रहण के पक्षधर हैं। इसी सोच के तहत तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी एक ही दिन शपथ ली थी। 

अब तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली आकर अपने मंत्रिमंडल के चेहरों के नाम की मंजूरी ले रहे हैं। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष की सलाह है कि सभी वर्ग, धर्म, जाति, लिंग, क्षेत्र को उसके सम्मान के हिसाब से स्थान मिले। इसमें युवा, अनुभव रखने वाले और वरिष्ठ के बीच में अच्छा तालमेल हो। उनकी मौजूदगी हो। मंत्रिमंडल में पुरुष के साथ-साथ महिलाओं की ठीक-ठीक भागीदारी हो।

मध्यप्रदेश फाइनल, राजस्थान में अटका है मामला

कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपने मंत्रिमंडल के चेहरों को लेकर अनुमति मिल चुकी है। वह शुक्रवार को ही राहुल गांधी के साथ चर्चा करके इसे फाइनल रूप दे चुके हैं। शनिवार को अशोक गहलोत को भी सफलता मिल जाने की उम्मीद है। हालांकि अशोक गहलोत के सामने कई पेच हैं। राज्य में सीपी जोशी जैसे वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री विधानसभा चुनाव जीतकर आए हैं। जोशी राजस्थान का विधानसभा अध्यक्ष बनने के इच्छुक नहीं है। गहलोत की परेशानी है कि उन्हें कौन सा मंत्रालय दें। 

उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले आश्वासन को आधार बनाकर मंत्रिमंडल में चेहरे शामिल कराने का दबाव बना रहे हैं। 12 निर्दलीय चुनाव जीतकर आए हैं। इनमें से एक भाजपा का समर्थक तो 11 कांग्रेस और खासकर अशोक गहलोत के प्रति वफादार है। इनमें से भी एकाध चेहरे को जगह देनी है। सबकुछ 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर करना है। जाट, गुर्जर, मीणा, अल्पसंख्यक, राजपूत, ब्राह्मण, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला सबको जगह देनी है। ऐसे में अभी राजस्थान में समय लग सकता है।

अरविंद मायाराम बने आर्थिक सलाहकार, गोंविद को भी जगह

इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव अरविंद मायाराम को अपना आर्थिक सलाहकार और गोविंद शर्मा को सलाहकार नियुक्त किया है। मायाराम राजस्थान कैडर के पूर्व आईएएस हैं। आर्थिक मामलों में अच्छी समझ रखते हैं। समझा जा रहा है कि मायाराम को आर्थिक सलाहकार बनाने के पीछे गहलोत की मंशा राज्य के वित्तीय प्रबंधन को दुरुस्त करने की है। राज्य सरकार ने किसानों का 1800 करोड़ रुपये का कर्जा करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में राजस्थान को वित्तीय रूप से व्यस्थित करना भी एक चुनौती है।

40 नए विधायकों को मिला आवास

राजस्थान में 40 विधायकों को निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने आवास आवंटित कर दिया है। मेघवाल पिछली विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष थे। अभी उनकी कुछ शक्तियां बरकरार हैं और उन्होंने इसका उपयोग करते हुए नए विधायकों को आवासीय सुविधा आवंटित की है। वह देर होने पर अपनी शक्तियों का आगे भी उपयोग कर सकते हैं। यह भी मौजूदा सरकार पर एक दबाव की तरह है कि वह जल्द से जल्द मंत्रिपरिषद का गठन करे, विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हो, विधायक और अन्य शपथ लें और राज्य सरकार की वैधानिक प्रक्रिया को धार दी जा सके। राज्य विधानसभा की बैठक आहूत हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed