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पश्चिम बंगाल चुनाव: नतीजों में दिखेगी भाजपा को 'किसान आंदोलन' की चोट, 25 रैलियां करेंगे अन्नदाता

Sat, 27 Mar 2021 07:56 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 27 Mar 2021 07:56 PM IST
सार

बंगाल में शनिवार 27 मार्च को पहले चरण में 30 सीटों पर मतदान हुआ है। राज्य के पांच जिलों पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर की 30 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले गए हैं...

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First phase voting completed in West Bengal assembly elections, Samyukta Kisan Morcha will hold 25 rallies for remaining seven phases
पश्चिम बंगाल चुनाव में वोट डालने पहुंची महिलाएं - फोटो : PTI

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शनिवार को संपन्न हो गया। अब सात चरणों का मतदान बाकी है। किसान नेताओं का दावा है कि चुनावी नतीजों में भाजपा को 'किसान आंदोलन' की चोट का अहसास होगा। बाकी के सात चरणों में संयुक्त किसान मोर्चा 25 रैलियां करेगा। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ‘एआईकेएससीसी’ के वरिष्ठ सदस्य अविक साहा का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में धर्म के नाम पर वोट नहीं पड़ेंगे। 'किसान पत्र' हर गांव तक पहुंच चुका है। पश्चिम बंगाल का किसान अपनी सोच प्रकट कर रहा है।

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बंगाल में शनिवार 27 मार्च को पहले चरण में 30 सीटों पर मतदान हुआ है। राज्य के पांच जिलों पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर की 30 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले गए हैं। अविक साहा कहते हैं, मतदान के अभी कई चरण बाकी हैं। किसान आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों ने 15 दिन तक प्रचार किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसान विरोधी भाजपा को वोट न दें। इसका असर भी देखने को मिलेगा।
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हालांकि साहा यह बात भी मानते हैं कि संयुक्त किसान मोर्चा देरी से यहां पहुंचा है। किसान संगठनों के नेता पूरा बंगाल नहीं घूम सकेंगे। हालांकि किसान संगठनों द्वारा तैयार किया गया 'किसान पत्र' गांव-गांव तक पहुंच चुका है। जहां पर किसान नेता पहुंचते हैं, वहां लोगों के हाथ में वह पत्र रहता है। अब बंगाल में किसान आंदोलन की चर्चा हो रही है। ग्रामीण इलाकों के बारे में पहले कहा जाता था कि यहां तो धर्म के नाम पर ही वोट पड़ेंगे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
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किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा ने जो विरोधी रवैया अपनाया है, उसका असर बंगाल में दिख रहा है। भाजपा के प्रति लोगों में नाराजगी है। ग्रामीण परिवेश के लोग गरीबी और महंगाई को लेकर सचेत हो रहे हैं। बतौर अविक साहा, भाजपा को ग्रामीण इलाकों में नुकसान उठाना पड़ेगा। संयुक्त किसान मोर्चा की 25 रैलियां बाकी बचे सात चरण के मतदान को प्रभावित करेंगी।


साहा ने कहा, अगर समय पर किसान संगठन पश्चिम बंगाल में अपनी बात रखता तो उसका सौ गुना ज्यादा फायदा मिल सकता था। राकेश टिकैत की मनमर्जी वाली बयानबाजी के बारे में साहा का कहना था, कुछ बातें सही हैं। बयान सोच समझकर ही देना चाहिए। अगर संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि दिल्ली की बाहरी सीमाओं पर बैठे किसान कोई पक्का निर्माण कार्य नहीं करेंगे, तो सभी को उसका पालन करना चाहिए।

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