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25 साल पहले कांग्रेस राज में आया था पहला महाभियोग, तब पार्टी ने किया था विरोध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Apr 2018 12:28 PM IST
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दीपक मिश्रा
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वर्तमान में विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने में अहम भूमिका निभा रही है मगर आज से 25 साल पहले जब देश में कांग्रेस की सरकार थी तब उसने इसके उलट भूमिका निभाई थी। उस समय पार्टी ने महाभियोग का विरोध किया था। इतिहास गवाह है कि आज तक कोई भी महाभियोग अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाया है।
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यदि सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के पैनल की जांच के बाद प्रस्ताव संसद में पहुंचता है और दोनों सदनों से बहुमत पास हो जाता है तो शायद पहली बार किसी जज को बर्खास्तगी का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस के शासन में तीन बार महाभियोग के प्रस्ताव लाए गए थे। वर्तमान मामले पर टिप्पणी करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि विपक्ष महाभियोग को हथियार बनाकर जजों को डराने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने प्रस्ताव को बदले की याचिका करार दिया।
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हालांकि कांग्रेस द्वारा महाभियोग में असहमति के स्वर नजर आ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यसभा सदस्य हैं लेकिन उन्होंने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके अलावा जिन सदस्यों के खिलाफ कानूनी मामले चल रहे हैं उनके भी इसपर हस्ताक्षर नहीं करवाए गए हैं। देश में बीते 25 सालों में 6 जजों के खिलाफ अबतक महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है। मगर केवल तीन जजों के खिलाफ ही कार्रवाई की गई। हालांकि किसी को भी हटाया नहीं जा सका।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को कदाचार, अक्षमता और भ्रष्टाचार के आरोप में इस प्रक्रिया के तहत हटाया जा सकता है। यह प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। लोकसभा में यह प्रस्ताव लाने के लिए 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है। इस प्रस्ताव को स्वीकार या खारिज करने का अधिकार लोकसभा के स्पीकर या राज्यसभा सभापति के पास है।