कीर्तिमान: पहले टीके से 100 करोड़वें टीके तक का सफरनामा, देश को कैसे मिली यह कामयाबी?
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
साल 2019 के विदा लेने से पहले पूरी दुनिया में अचानक कोरोना वायरस का नाम तेजी से गूंजने लगा। चीन में इसकी चर्चा जितनी तेजी से शुरू हुई, उसकी दोगुनी रफ्तार से पूरी दुनिया में खौफ पसरने लगा। वैज्ञानिकों ने रंग-रूप के आधार पर इसे सबसे पहले कोरोना वायरस कहा और 2019 में मिलने के बाद आधिकारिक नाम कोविड-19 रख दिया। चीन के बाद दुनिया के कई देशों में दस्तक देकर जब यह महामारी भारत पहुंची तो हालात काफी नाजुक थे। उस दौर में देश ने न सिर्फ स्वदेसी वैक्सीन तैयार की, बल्कि आज 100 करोड़ टीके लगाने के कीर्तिमान को भी हासिल कर लिया। इस रिपोर्ट में हम आपको भारत में हुए टीकाकरण के सफरनामे से रूबरू करा रहे हैं। इसमें हम आपको बताएंगे कि पहला टीका लगने से लेकर 100 करोड़वें टीके के मुकाम तक पहुंचने में भारत ने कितना संघर्ष किया? देश ने किस तरह एक करोड़, 10 करोड़, 25 करोड़, 50 करोड़ और 75 करोड़ के आंकड़े को पार किया।
16 जनवरी को हुई थी टीकाकरण की शुरुआत
देश में टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी 2021 को हुई थी। उस दौरान दिल्ली एम्स में नजफगढ़ निवासी मनीष कुमार को देश का पहला टीका लगाया गया था। मनीष कोरोना वॉरियर हैं और उन्होंने पहले टीके के लिए खुद को चुने जाने पर खुशी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, 'मैं नहीं जानता था कि कोरोना का पहला टीका मुझे लगने वाला है। पिछली रात मैं अच्छी तरह सोया था। सुबह जब मैं काम पर पहुंचा तो साथी इस बारे में बात कर रहे थे। वे काफी डरे हुए थे। ऐसे में मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों के पास गया और खुद को पहला टीका लगवाने के लिए कहा। मैं अपने साथियों को बताना चाहता था कि इससे डरने की जरूरत नहीं है।'
27 दिन में छुआ था एक करोड़ का आंकड़ा
देश में जब कोरोना के टीके लगने की शुरुआत हुई, तब अधिकतर लोग जागरूक नहीं थे। उन्हें कोरोना वैक्सीनेशन के लिए बार-बार समझाना पड़ता था। वहीं, वैक्सीन का उत्पादन भी काफी कम था। इसके चलते शुरुआत में टीकाकरण की रफ्तार बेहद धीमी थी और देश में एक करोड़वें शख्स को टीका 13 फरवरी को लगा था। यानी पहले टीके से एक करोड़वें टीके तक का सफर तय होने में 27 दिन लग गए थे।
महज 57 दिन में एक से 10 करोड़ तक पहुंचे
फरवरी 2021 तक टीकाकरण की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं थी। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मार्च 2021 को दिल्ली एम्स पहुंचे और कोरोना के टीके की पहली डोज लगवाई। माना जाता है कि इस कदम से पीएम मोदी का प्रयास लोगों को जागरूक करने का था, जिसका असर टीकाकरण अभियान पर नजर आया और देश में 10 करोड़वां टीका 10 अप्रैल को लगाया गया। इस तरह देश ने एक करोड़वें टीके से 10 करोड़वें टीके का सफर महज 57 दिन में पूरा कर लिया था।
25 करोड़ के सफर में फिर धीमी हुई रफ्तार
देश ने 10 करोड़ टीके लगाने का फासला तो महज 57 दिन में तय किया, लेकिन इसके बाद 25 करोड़ टीकों का माइलस्टोन छूने में 68 दिन लगा दिए। दरअसल, देश में 25 करोड़वां टीका 18 जून 2021 को लगाया गया। इसके पीछे टीकों की कमी और राजनीतिक बयानबाजी काफी हद तक जिम्मेदार साबित हुए। इसके अलावा एक बात यह भी सामने आई थी कि कोरोना के घटते मामलों के चलते लोगों ने टीकाकरण पर ध्यान देना छोड़ दिया था। ऐसे में लोगों को लगातार जागरूक भी किया जा रहा था।
सेकेंड वेब के डर से बढ़ी टीकाकरण की स्पीड
कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दी तो लोगों को बचाव के लिए टीका ही एकमात्र विकल्प लगने लगा। ऐसे में अस्पतालों के बाहर टीका लगवाने वालों की लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं, जिससे वैक्सीन की कमी की खबरें भी सामने आने लगीं। इसके बावजूद टीका लगवाने वालों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। वे लगातार टीकों का इंतजार करते रहे और अपनी बारी आते ही वैक्सीनेशन कराते रहे। इसके चलते देश ने 25 करोड़वें टीके से 50 करोड़वें टीके तक का सफर महज 54 दिन में ही पूरा कर लिया।
महज 33 दिन में लगे अगले 25 करोड़ टीके
डब्ल्यूएचओ से भारतीय वैक्सीन को मान्यता मिलने के बाद लोगों को इसकी अहमियत समझ आने लगी थी। उन्हें पता लग गया था कि कोरोना से बचाव का एकमात्र रास्ता टीकाकरण ही है। इसके अलावा वैक्सीन के निर्माण में भी तेजी आ गई थी, जिसका असर टीकाकरण अभियान पर नजर आया। ऐसे में देश ने 50 करोड़वें टीके से 75 करोड़वें टीके का सफर महज 33 दिन में ही पूरा कर लिया। देश में 75 करोड़वां टीका 15 सितंबर को लगा था। इसके बाद 100 करोड़ का आंकड़ा छूने में भी देश को महज 36 दिन लगे और भारत ने कीर्तिमान बना दिया।