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'FIR बंद नहीं, पूरी तरह वापस हों': CJP ने फिर सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी; सौरव दास ने और क्या कहा?
Thu, 30 Jul 2026 11:00 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:00 PM IST
सार
दिल्ली सरकार ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के 36 दिनों के आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर पर आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है। हालांकि, CJP ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए मांग की है कि एफआईआर केवल बंद नहीं, बल्कि औपचारिक रूप से वापस ली जाएं।
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सौरव दास
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को दिल्ली सरकार के उस नोटिफिकेशन का स्वागत किया, जिसमें कहा गया है कि पार्टी के 36 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर पर आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया कि मामलों को केवल बंद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी एफआईआर औपचारिक रूप से वापस ली जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी चेतावनी दी कि 25 जुलाई को हुए जंतर-मंतर समझौते के तहत किए गए वादों में किसी भी तरह की ढिलाई छात्रों को फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर सकती है।
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सरकार के नोटिफिकेशन पर CJP को क्या आपत्ति है?
पीटीआई वीडियो से बातचीत में CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार के नोटिफिकेशन की भाषा वैसी नहीं है, जैसी आंदोलनकारियों से वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने नोटिफिकेशन में लिखा है कि सभी एफआईआर पर आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी और उन्हें बंद माना जा सकता है। लेकिन हम इस शब्दावली से संतुष्ट नहीं हैं। सरकार को साफ़ तौर पर कहना चाहिए था कि सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी।
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क्या सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर वापस लेने से रोका है?
सौरव दास ने कहा कि सरकार का यह कहना गलत है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण एफआईआर वापस नहीं ली जा सकतीं। सरकार यह कह रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। लेकिन यह आदेश की गलत व्याख्या है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि सरकार एफआईआर वापस नहीं ले सकती। यह अधिकार सरकार के पास है।"
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जंतर-मंतर समझौते को लेकर क्या मांग रखी गई?
दास ने केंद्र सरकार से 25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के साथ हुए जंतर-मंतर समझौते का पूरी तरह सम्मान करने की अपील की। सरकार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश को हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पूरे देश के सामने जो गारंटी दी गई थी, उसे निभाना सरकार की जिम्मेदारी है।
क्या दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी गई?
सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार अपने सभी वादों को पूरी तरह लागू नहीं करती, तो युवा फिर से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अगर सरकार अपनी बात का सम्मान नहीं करती, तो देश की युवा पीढ़ी उन्हें कभी माफ नहीं करेगी और उन्हें दोबारा सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
सरकार के फैसले को कितना सकारात्मक माना गया?
दास ने कहा कि दिल्ली सरकार का नोटिफिकेशन निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे अधूरा नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हमें उम्मीद है कि जिन सभी बिंदुओं पर चर्चा हुई थी, उन्हें अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा। समय तेजी से निकल रहा है और युवाओं का सब्र भी जवाब दे रहा है। सरकार को अपनी सभी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर CJP ने क्या कहा?
सौरव दास ने बताया कि उनकी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में लगाई गई कुछ शर्तों पर पहले भी आपत्ति जताई थी और आज भी उसका विरोध करती है।
प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच ऐसी कोई सहमति नहीं बनी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एफआईआर की जांच जारी रखने की बात कही गई है, जिस पर हमने पहले भी आपत्ति दर्ज कराई थी और अब भी हमारा वही रुख है।
सरकार और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर क्यों उठाए सवाल?
दास ने कहा कि यदि अंतिम निर्णय का अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट के पास है, तो फिर बातचीत सरकार के बजाय सीधे अदालत से होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम प्राधिकरण है, तो फिर भारत सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों का क्या महत्व रह जाता है?
आपत्तिजनक भाषा पर दर्ज मामलों को लेकर क्या कहा गया?
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के आधार पर दर्ज आपराधिक मामलों पर भी दास ने सवाल उठाए। अगर किसी ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है, तो संबंधित व्यक्ति मानहानि का मामला दर्ज करा सकता है। लेकिन केवल ऐसी भाषा के आधार पर आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित और निंदनीय है।
युवाओं को क्या सलाह दी गई?
दास ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी भाषा और शब्दों के चयन में संयम बरतें। शब्दों का चयन सोच-समझकर होना चाहिए, लेकिन इसके लिए आपराधिक तंत्र का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही सौरव दास ने दिल्ली पुलिस से शांति बनाए रखने और अपनी शक्तियों का राजनीतिक उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं करने की अपील की।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर क्या कहा गया?
दास ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शनकारी आतंकवादी नहीं हैं। ये इस देश के बच्चे, नागरिक और भविष्य हैं। इनके खिलाफ पैलेट गन या किसी भी तरह के प्रोजेक्टाइल हथियार का इस्तेमाल न नैतिक है और न ही संवैधानिक। पैलेट गन के इस्तेमाल की संवैधानिकता पर गंभीर सवाल हैं। मुझे नहीं लगता कि देश का कोई भी समझदार व्यक्ति इसे स्वीकार करेगा। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।
दिल्ली सरकार के आदेश में क्या कहा गया है?
गुरुवार को जारी दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, जिन लोगों का आपराधिक बैकग्राउंड है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि किसी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है, तो उसकी गिरफ्तारी की समीक्षा कर जल्द से जल्द रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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पुलिस ने आंदोलन को लेकर क्या कार्रवाई की थी?
दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में 13 एफआईआर दर्ज की थीं। इसके अलावा पुलिस ने दावा किया कि विरोध मार्च में शामिल 2,800 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद है।