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Odisha: बढ़ते महिला अपराध पर घिरी सरकार, जगतसिंहपुर में महिला से दुष्कर्म केस में विपक्ष ने घेरा; दिया यह जवाब
Sat, 26 Jul 2025 04:18 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगतसिंहपुर (ओडिशा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगतसिंहपुर (ओडिशा)
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 26 Jul 2025 04:18 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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ओडिशा पुलिस ने जगतसिंहपुर में एक महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों की पहचान भाग्यधर दास, पंचानन दास और तुलु बाबू के रूप में हुई है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 49, 64(2)(एम), 351(3) और 6 तहत आरोप लगाए गए हैं। दो मुख्य आरोपियों भाग्यधर दास और पंचानन दास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों ने कथित तौर पर महिला के साथ दुष्कर्म किया और उसे शिकायत दर्ज न कराने की धमकी दी।
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एफआईआर में क्या?
एफआईआर में कहा गया कि 24 जुलाई को दोपहर 3.20 बजे शिकायतकर्ता ने पुलिस स्टेशन में उपस्थित होकर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि शिकायतकर्ता की बेटी छह-सात महीने की गर्भवती है। आरोपी भाग्यधर दास और गुलिया उर्फ पंचानन दास (दोनों लेफ्टिनेंट निशाकर दास के बेटे) ने पिछले एक साल में उनकी बेटी के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। दोनों आरोपियों और तुलु बाबू ने उन्हें विवाद खत्म करने की धमकी दी और पैसे देने की पेशकश की। इसलिए उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए पुलिस को मामले की सूचना दी।
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नाजुक समय में मुख्यमंत्री चुप, उनके पास गृह मंत्रालय भी: बीजद
बीजद नेता प्रताप केशरी देव ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरे ओडिशा में हो रही हैं। ऐसा लगता है कि पुलिस घटना घटने के बाद ही कार्रवाई करती है। निवारक कार्रवाई कहां है? खुफिया विभाग क्या कर रहा है? जिला प्रशासन और पुलिस क्या कर रहे हैं? अगर वे घटना घटने के बाद ही कार्रवाई करते हैं, तो इससे कानून प्रवर्तन का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है। दुर्भाग्य से, राज्य भर के लोगों का पुलिस और सरकार पर से विश्वास उठता जा रहा है। प्रशासन न केवल अक्षम है, बल्कि गायब भी है। इस नाज़ुक समय में मुख्यमंत्री, जिनके पास गृह मंत्रालय भी है, चुप हैं। सत्तारूढ़ दल के मंत्री संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में व्यस्त हैं। आगामी विधानसभा सत्र में यह मुद्दा एक प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया जाएगा। कानून-व्यवस्था की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। पुलिस प्रशासन की स्थिति पर गौर कीजिए- जिस जिले में हाल ही में यह घटना घटी, वहां एक भी आईआईसी (प्रभारी निरीक्षक) दो महीने से ज्यादा समय तक पद पर नहीं रहता। क्यों? क्योंकि सत्तारूढ़ दल ऐसे अधिकारियों को ढूंढने में ज्यादा रुचि रखता है जो जनता के प्रति नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक एजेंडे के प्रति वफदार हों।
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कांग्रेस बोली- महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य
कांग्रेस नेता रजनी कुमार मोहंती ने कहा कि सिर्फ जगतसिंहपुर ही नहीं, पूरे राज्य में हालात बेहद बिगड़ गए हैं। ओडिशा अब महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य बन गया है। जगतसिंहपुर की हालिया घटना बेहद भयावह है। दो पुरुष एक लड़की के साथ छह महीने तक यौन संबंध बनाते रहे, वह गर्भवती हो गई और अब एक आरोपी पांच दिनों से फरार है। सरकार न तो सच्चाई स्वीकार कर रही है और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई कर रही है। वह हमारे राज्य की महिलाओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। पिछले पांच महीनों से हम लगातार इस मुद्दे को विधानसभा में और बाहर उठा रहे हैं। सरकार से कार्रवाई करने का आग्रह कर रहे हैं, लेकिन वे चुप हैं। पुलिस तंत्र निष्क्रिय है। इस सरकार को जाना ही होगा। मंत्रियों को इस्तीफा देना होगा, वरना हालात और बिगड़ते जाएंगे।
सरकार का जवाब
सबसे पहले पुरी की पीड़िता के बारे में ओडिशा की उप-मुख्यमंत्री प्रावती परिदा ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उसकी दो सर्जरी हो चुकी हैं। स्किन बैंक से उसकी त्वचा प्रत्यारोपण हो रहा है। वह धीरे-धीरे ठीक हो रही है। सरकार की ओर से दिए गए मुआवजे की भी समीक्षा की गई है। उसे ठीक होने में 40-50 दिन लगेंगे। विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार हमारे पास दर्ज शिकायतों का तुरंत समाधान करती है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, क्योंकि पिछली सरकारें महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति अनभिज्ञ रहीं। अगर पिछली सरकार POSH के तहत आंतरिक समितियां बनाने में सतर्क रहतीं, तो ऐसी स्थितियां कभी नहीं आतीं। अब ये समितियां बनाई जा रही हैं। हमारे मुख्यमंत्री ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की घोषणा की है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को बीजद का पत्र
इस बीच बीजू जनता दल (बीजद) ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर ओडिशा में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास (एसएसडी) विभाग के छात्रावासों में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और गर्भावस्था के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।