वित्त मंत्रालय ने दी राहत, नहीं खुलेंगे व्यापारियों के बैंक खातों से जुड़े पुराने केस
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नोटबंदी के बाद जिन व्यापारियों ने अपने बैंक खातों में ज्यादा रकम जमा कर दी थी और अब वे इस बात से परेशान हैं कि आयकर विभाग उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करेगा तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं। वित्त मंत्रालय ने ऐसे व्यापारियों को बड़ी राहत दी है।
मंत्रालय ने आयकर विभाग को आदेश दिया कि ऐसे व्यापारियों के आय-व्यय का हिसाब मांगने के दौरान धारा 147 के तहत उनके पुराने केस, यानी चार से छह वर्ष पुराने कर निर्धारण के मामले न खोले जाएं। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में शुक्रवार को देर शाम आदेश भी जारी कर दिया। हालांकि, आयकर विभाग सिर्फ वर्तमान में जमा रकम का हिसाब मांगेगा।
आठ नवंबर को नोटबंदी का फरमान जारी होने के बाद व्यापारियों ने अपने बैंक खातों में पांच सौ और हजार के पुराने नोटों के रूप में बड़ी संख्या में रकम जमा की थी। इसके बाद वित्त मंत्रालय से फरमान जारी हुआ कि जिन व्यापारियों के बैंक खातों में आठ नवंबर के बाद मोटी रकम जमा हुई है, उनके चार से छह वर्ष पुराने आयकर निर्धारण के केस खोले जाएंगे, ताकि उनकी आय में अंतर का पता चल सके। इसे लेकर व्यापारियों में चिंता थी। उन्हें लग रहा था कि आयकर विभाग टैक्स चोरी का मामला मानकर सर्वे, छापेमारी की कार्रवाई करेगा।
आयकर विभाग सिर्फ वर्तमान में जमा रकम का हिसाब मांगेगा
केंद्र सरकार के वित्त एवं मूल्यांकन सलाहकार डॉ.पवन जायसवाल सहित कई विशेषज्ञों ने इस पर आपत्ति भी की थी। ऐसे में वित्त मंत्रालय ने अपने निर्णय में कुछ बदलाव किया है।
वित्त मंत्रालय में रेवेन्यू विभाग (सीबीडीटी) के निदेशक रोहित गर्ग ने नौ दिसंबर को जारी आदेश में साफ किया है कि नोटबंदी के बाद जिन भी व्यापारियों ने अपने बैंक खातों में ज्यादा रकम जमा की है, धारा 147 के तहत उनके पुराने केस नहीं खोले जाएंगे।
ऐसा इसलिए भी कि नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजेक्शन बढ़ा है, जिससे व्यापारी की खरीद-बिक्री में भी इजाफा हुआ है। आयकर विभाग सिर्फ वर्तमान में जमा रकम का हिसाब मांगेगा।