कोरोना से लड़ाई में राज्यों की चतुराई: आपदा प्रबंधन का सारा खर्च वहन करे केंद्र सरकार, 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में खुलासा
केंद्रीय मंत्रालयों एवं एजेंसियों का अपनी सिफारिश में कहना है कि एनडीआरएफ और एनडीएमएफ के माध्यम से समस्त केंद्रीय सहायता लागत-साझाकरण आधार पर होनी चाहिए...
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वैश्विक महामारी 'कोविड-19' के चलते कई व्यवस्थाओं में बदलाव देखने को मिल रहा है। खासतौर पर केंद्र और राज्य सरकारें, ऐसी महामारी के दौरान अधिकारों और वित्त को लेकर क्या सोचती हैं, उसकी झलक पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पेश की है। 'वित्त आयोग, कोविड के दौर में, 2021-26' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में लिखा है, राज्यों की यह मांग है कि आपदा प्रबंधन का सारा खर्च केंद्र सरकार वहन करे। इतना ही नहीं, कई राज्यों की इच्छा है कि उन्हें आपदा तैयारी संबंधी उपायों के लिए धनराशि का आवंटन किया जाना चाहिए। इसकी मदद से राज्य, पूर्व चेतावनी के आधार पर अग्रिम कार्रवाई करने में सक्षम हो सकते हैं। आपदा तैयारी संबंधी उपायों में राज्यों द्वारा खुद की 'आपदा रिस्पांस फोर्सेस' की स्थापना किया जाना भी शामिल है। इसका मतलब है कि राज्य 'केंद्रीय सशस्त्र बलों' और 'राष्ट्रीय आपदा रिस्पांस फोर्सेस' पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वित्त आयोग की रिपोर्ट में राज्यों ने इन बलों पर निर्भरता कम करने की बात कही है।
इस बाबत राज्य सरकारों ने आयोग को कई ज्ञापन भी दिए हैं। राज्यों की तरफ से कहा गया है कि एसडीआरएफ आवंटन को बढ़ाया जाना चाहिए। मौजूदा आवंटन के लिए जो नियम बनाए गए हैं, वे विगत व्ययों के आधार पर हैं। आज उनकी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। जोखिम तथा भेद्यनीयता को ध्यान में रखकर आवंटन करना जरूरी है। कुछ राज्यों ने कहा, एसडीआरएफ का वित्त पोषण पूर्णतया केंद्र सरकार द्वारा किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें बराबर की हिस्सेदारी उपलब्ध कराने में कठिनाई होती है। राज्यों और 'एसडीएमए' यानी राज्य आपदा प्रशमन कोष के संवितरण को और ज्यादा लचीला बनाया जाना चाहिए। एनडीआरएफ के माध्यम से राज्यों को जो सहायता मिलती है, उसका निर्धारण करने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रभावकारी एवं पारदर्शी बनाया जाए। वर्तमान में, आवासन और बुनियादी ढांचा के पुनर्निर्माण के लिए आवंटन पर्याप्त नहीं है।
तेरहवें वित्त आयोग ने क्षमता निर्माण अनुदानों की बहाली करने की सिफारिश की थी, क्योंकि आपदा प्रबंधन में राज्य क्षमताओं के निर्माण में वे काफी उपयोगी साबित हुए थे। हालांकि चौदहवें वित्त आयोग द्वारा उन्हें समाप्त कर दिया गया था। राज्यों को अपने आपदा प्रबंधन कार्यों में सहायता देने के लिए राष्ट्रीय एजेंसियों के माध्यम से और अधिक तकनीकी सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। राष्ट्रीय सूची में शामिल नहीं की गई विभिन्न स्थानीय आपदाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य विशिष्ट आपदाओं के लिए प्रयोजन विशिष्ट राशि को वर्तमान में एसडीआरएफ आवंटन के 10 फीसदी से 25 फीसदी तक बढ़ाया जाना आवश्यक है। केंद्रीय मंत्रालयों एवं एजेंसियों ने अपनी सिफारिश में कहा है कि एनडीआरएफ और एनडीएमएफ के माध्यम से समस्त केंद्रीय सहायता लागत-साझाकरण आधार पर होनी चाहिए।
राज्यों के कुल आवंटनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, इसलिए जब राज्य भिन्न विंडो के माध्यम से केंद्रीय मदद का अनुरोध करें तो ग्रेडेड आधार पर लागत-साझाकरण व्यवस्था लागू की जा सकती है। एनडीआरएफ और एनडीएमएफ से 250 करोड़ रुपये तक की सहायता के लिए 10 फीसदी का, 500 करोड़ रुपये तक की मदद के लिए 20 फीसदी और पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक की सहायता के लिए 25 फीसदी का योगदान देना चाहिए।
राज्यों के सुझाव लेने के बाद आयोग ने अपनी अनुशंसा देते हुए लिखा है कि आपदा प्रबंधन के लिए संघ और राज्यों द्वारा राज्यस्तरीय आवंटनों के लिए तेरहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशांसित योगदान अनुपात को कायम रखा जाए। अत: राज्यों द्वारा पूर्वात्तर पूर्वी और हिमालयी राज्यों को छोड़कर जो 10 फीसदी का योगदान देंगे, एसडीआरएफ और एसडीएमएफ में 25 फीसदी का योगदान दिया जाएगा व शेष योगदान संघ सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।
आयोग की एक अहम सिफारिश में कहा गया है कि एसडीआरएमएफ यानी राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए कुल राज्य आवंटनों को वित्त पोषण विंडो में उप विभाजित किया जाना चाहिए। इससे पूर्ण आपदा प्रबंधन चक्र को कवर किया जा सकेगा। एसडीआरएफ को कुल आवंटन का 80 फीसदी हो और एसडीएमएफ को 20 फीसदी दिया जाए। एसडीआरएफ के आवंटन को दोबारा से विभाजित कर उसे रिस्पांस व राहत के लिए 40 फीसदी, रिकवरी एवं पुनर्निर्माण 30 फीसदी तथा तैयारी एवं क्षमता निर्माण पर 10 फीसदी हिस्सा खर्च हो।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एसडीआरएफ एवं एसडीएमएफ की वित्तपोषण विंडो पारस्परिक रूप से परिवर्तनीय नहीं है। एसडीआरएफ की तीन उप विंडो के भीतर पुन: आवंटन के लिए लचीलापन हो सकता है। आपदा प्रबंधन के लिए 2020-26 की अवधि के तहत कुल राष्ट्रीय आवंटन का आकलन 68463 करोड़ रुपये किया गया है।