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शहीद भगतसिंह को पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-हैदर' दिलाने की लड़ाई
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Updated Tue, 14 Aug 2018 10:09 PM IST
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bhagat singh
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महान क्रांतिकारी शहीद भगतसिंह हिन्दुस्तान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के भी हीरो हैं। लाहौर में रह रहे वकील इम्तियाज रसीद कुरैशी, जिन्होंने भगतसिंह मेमोरियल फांउडेशन पाकिस्तान, नाम से एक संगठन बना कर रखा है, उन्होंने पाकिस्तान सरकार से भगतसिंह को सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-हैदर से नवाजे जाने की मांग की है।
इस बाबत कुरैशी ने पाकिस्तान सरकार के साथ पत्राचार भी शुरू किया है। फिलहाल इम्तियाज ने पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट में भगतसिंह को गलत तरीके से फांसी दिए जाने के फैसले को चुनौती दे रखी है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर सुनवाई भी शुरू कर दी है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत से पांच जजों की एक बैंच गठित करने की मांग की है।
भगतसिंह, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की सीमाओं से परे हैं...
रसीद कुरैशी बताते हैं कि शुरू में जब उन्होंने भगतसिंह मेमोरियल फांउडेशन पाकिस्तान की स्थापना की तो कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध भी किया। कट्टरपंथी कहते थे कि भगतसिंह का मामला हिन्दुस्तान देखे। पाकिस्तान में यह संगठन खड़े करने की कोई वाजिब वजह नहीं है। कुरैशी ने इन सब बातों को दरकिनार कर न केवल संगठन खड़ा किया, बल्कि भगतसिंह का केस भी दोबारा से खुलवाया। उनका कहना है कि भगतसिंह हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की सीमाओं से परे है।
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भगतसिंह ने आजादी की लड़ाई में जब अपनी शहादत दी, उस वक्त तो केवल एक ही देश था। उस महान क्रांतिकारी की टोली ने केवल आजादी की लड़ाई लड़ी थी। भगतसिंह की शहादत आज हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, दोनों देशों के लिए बराबर सम्मान एवं गौरव का विषय है। पाकिस्तान में आज की नई पीढ़ी भगतसिंह को बखूबी समझने लगी है। भगतसिंह के जन्मदिवस और पुण्यतिथि पर यहां भी सार्वजनिक आयोजन होने लगे हैं। सेंट्रल लाहौर में भगतसिंह की प्रतिमा लगाने की योजना अंतिम चरण में है।
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इस बाबत कुरैशी ने पाकिस्तान सरकार के साथ पत्राचार भी शुरू किया है। फिलहाल इम्तियाज ने पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट में भगतसिंह को गलत तरीके से फांसी दिए जाने के फैसले को चुनौती दे रखी है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर सुनवाई भी शुरू कर दी है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत से पांच जजों की एक बैंच गठित करने की मांग की है।
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भगतसिंह, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की सीमाओं से परे हैं...
रसीद कुरैशी बताते हैं कि शुरू में जब उन्होंने भगतसिंह मेमोरियल फांउडेशन पाकिस्तान की स्थापना की तो कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध भी किया। कट्टरपंथी कहते थे कि भगतसिंह का मामला हिन्दुस्तान देखे। पाकिस्तान में यह संगठन खड़े करने की कोई वाजिब वजह नहीं है। कुरैशी ने इन सब बातों को दरकिनार कर न केवल संगठन खड़ा किया, बल्कि भगतसिंह का केस भी दोबारा से खुलवाया। उनका कहना है कि भगतसिंह हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की सीमाओं से परे है।
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भगतसिंह ने आजादी की लड़ाई में जब अपनी शहादत दी, उस वक्त तो केवल एक ही देश था। उस महान क्रांतिकारी की टोली ने केवल आजादी की लड़ाई लड़ी थी। भगतसिंह की शहादत आज हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, दोनों देशों के लिए बराबर सम्मान एवं गौरव का विषय है। पाकिस्तान में आज की नई पीढ़ी भगतसिंह को बखूबी समझने लगी है। भगतसिंह के जन्मदिवस और पुण्यतिथि पर यहां भी सार्वजनिक आयोजन होने लगे हैं। सेंट्रल लाहौर में भगतसिंह की प्रतिमा लगाने की योजना अंतिम चरण में है।
ब्रिटेन सरकार माफी मांगे
bhagat singh
ब्रिटेन सरकार माफी मांगे और भगतसिंह के परिवार को मुआवजा दे
वकील इम्तियाज का कहना है कि भगतसिंह केस की एफआईआर की प्रति जो मुझे मिली है, उसमें कहीं भी भगतसिंह का नाम नहीं लिखा है। एफआईआर में केवल एक व्यक्ति के हुलिये की बात की गई है। बाद में उसी व्यक्ति को भगतसिंह मानकर उसे सांडर्स की हत्या के आरोप में फांसी दे दी गई। इस केस में राजगुरु और सुखदेव को भी मृत्यु दंड मिला था। ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए जिस ट्रिब्यूनल ने भगतसिंह और उसके साथियों की सजा पर मुहर लगाई थी, उसका कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका था। बतौर इम्तियाज, मैंने लाहौर हाईकोर्ट में इस तथ्य को मजबूती से उठाया है। बाकायदा इसके लिए ब्रिटेन सरकार को भी पार्टी बनाने और समन करने की मांग की है। मेरा लक्ष्य है कि मैं इस लड़ाई को उस वक्त तक जारी रखूंगा, जब तक ब्रिटेन सरकार इस मामले में भगतसिंह के परिवार से माफी नहीं मांग लेती। इतना ही नहीं, ब्रिटेन सरकार को अपनी गलती मानते हुए भगतसिंह के परिवार को मुआवजा भी देना होगा। पाकिस्तान में भगतसिंह का स्मारक बनाने के लिए भी जद्दोजहद चल रही है। इसमें भी हमें जल्द कामयाबी मिलेगी।
वकील इम्तियाज का कहना है कि भगतसिंह केस की एफआईआर की प्रति जो मुझे मिली है, उसमें कहीं भी भगतसिंह का नाम नहीं लिखा है। एफआईआर में केवल एक व्यक्ति के हुलिये की बात की गई है। बाद में उसी व्यक्ति को भगतसिंह मानकर उसे सांडर्स की हत्या के आरोप में फांसी दे दी गई। इस केस में राजगुरु और सुखदेव को भी मृत्यु दंड मिला था। ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए जिस ट्रिब्यूनल ने भगतसिंह और उसके साथियों की सजा पर मुहर लगाई थी, उसका कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका था। बतौर इम्तियाज, मैंने लाहौर हाईकोर्ट में इस तथ्य को मजबूती से उठाया है। बाकायदा इसके लिए ब्रिटेन सरकार को भी पार्टी बनाने और समन करने की मांग की है। मेरा लक्ष्य है कि मैं इस लड़ाई को उस वक्त तक जारी रखूंगा, जब तक ब्रिटेन सरकार इस मामले में भगतसिंह के परिवार से माफी नहीं मांग लेती। इतना ही नहीं, ब्रिटेन सरकार को अपनी गलती मानते हुए भगतसिंह के परिवार को मुआवजा भी देना होगा। पाकिस्तान में भगतसिंह का स्मारक बनाने के लिए भी जद्दोजहद चल रही है। इसमें भी हमें जल्द कामयाबी मिलेगी।