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Urea Stock: मांडविया बोले, चालू खरीफ और आगामी रबी सीजन के लिए यूरिया का देश में पर्याप्त स्टॉक 

Mon, 06 Jun 2022 10:13 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 06 Jun 2022 10:13 PM IST
सार

मांडविया ने बताया कि भारत ने 16 लाख टन यूरिया का पहले ही आयात पूरा कर लिया है। राज्यों के पास 70 लाख टन यूरिया का पुराना स्टाक पड़ा है।

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Fertilizer minister says Uria stock is sufficient in India
केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्रीय केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि चालू खरीफ और आगामी रबी सीजन के लिए यूरिया का देश में पर्याप्त स्टॉक है और आगामी दिसंबर तक इसके आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारत के आयात नहीं करने के फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्टिलाइजर की कीमतों में गिरावट आएगी। माना जा रहा है कि इससे अगले छह महीने में कीमतें घट सकती हैं।

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भारत ने 16 लाख टन यूरिया का पहले ही आयात पूरा कर लिया
सोमवार को मीडिया से बात करते हुए मांडविया ने बताया कि भारत ने 16 लाख टन यूरिया का पहले ही आयात पूरा कर लिया है। राज्यों के पास 70 लाख टन यूरिया का पुराना स्टाक पड़ा है। घरेलू यूरिया कारखाने हर महीने 25 लाख टन यूरिया का उत्पादन कर रहे हैं। नैनो यूरिया के उत्पादन से हमारी 20 लाख टन परंपरागत यूरिया की मांग पूरी हो जाएगी। यूरिया के दो नए कारखानों बरौनी और सिंदरी में अक्तूबर तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। दिसंबर तक इनमें भी छह लाख टन यूरिया तैयार हो जाएगी।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि घरेलू खेती के लिए कुल 325 से 350 लाख टन यूरिया की जरूरत पड़ती है। जिन देशों से भारत ने यूरिया का आयात किया है, उनमें ओमान, सऊदी अरब, रूस, चीन, मिस्र, अल्जीरिया, नाइजीरिया और कुवैत प्रमुख हैं। देश में डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) की कुल मांग सौ से सवा सौ लाख टन की खपत होती है। इसमें से 40 से 50 लाख टन डीएपी का उत्पादन घरेलू कारखानों में हो जाता है, जबकि 50 लाख टन का आयात होता है। 
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सरकार ने 45 दिन में उद्योगों से 35,000 बोरी कृषि-ग्रेड यूरिया जब्त किया
उद्योगों को अत्यधिक सब्सिडी वाले यूरिया की गलत तरीके से बिक्री पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एक बड़ा अभियान चलाया है। सरकार ने पिछले डेढ़ महीने में ऐसे यूरिया की लगभग 35,000 बोरियां (प्रत्येक में 45 किलोग्राम) जब्त की हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस दुरुपयोग के लिए छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि सात प्राथमिकी (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज की गई हैं।

आमतौर पर यूरिया को ऐसे गलत तरीके से, प्लाईवुड, पशु चारा, क्रॉकरी, डाई और मोल्डिंग पाउडर बनाने वाले उद्योगों को बेचा जाता है। इन उद्योगों को सालाना लगभग 15 लाख टन यूरिया की आवश्यकता होती है। यूरिया अत्यधिक सब्सिडी वाला उर्वरक है और किसानों को केवल 266 रुपये प्रति बोरी पर बेचा जाता है, जबकि इसकी वास्तविक लागत लगभग 3,000 रुपये प्रति बैग है।

उर्वरक विभाग ने घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों के दुरुपयोग, कालाबाजारी और आपूर्ति पर रोक लगाने के मकसद से उर्वरक व संबंधित इकाइयों का औचक निरीक्षण करने के लिए विशेष टीम उर्वरक उड़न दस्ते का गठन किया है। कई शिकायतें मिलने के बाद विभाग ने कृषि-ग्रेड यूरिया को इधर-उधर करने और कालाबाजारी को रोकने के लिए एक बहुआयामी रणनीति शुरू की है। यूरिया पर नीम का लेप होने के बावजूद ऐसा हो रहा है।

औद्योगिक ग्रेड यूरिया के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं पर तलाशी अभियान के दौरान 63.4 करोड़ रुपये की माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी का पता चला है, जिसमें से 5.14 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। सूत्रों ने कहा कि कृषि-ग्रेड वाले यूरिया के 25,000 बैग का एक बेहिसाब स्टॉक पाया गया और जब्त कर लिया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जीएसटी अधिनियम के तहत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


कृषि-ग्रेड यूरिया को उद्योगों को बेचने (डायवर्लन करने) में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सीजीएसटी अधिनियम, उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है। सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च पिछले साल के 1.62 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में लगभग 2.25 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है। कृषि क्षेत्र में यूरिया की वार्षिक घरेलू खपत 325-350 लाख टन है।
 

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