औरंगाबाद रेल हादसे की दर्दभरी दास्तां : मैं अभागा दो-दो जवान बेटों की लाश देखने को जिंदा हूं
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महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मध्यप्रदेश के 16 मजदूरों की ट्रेन से कटकर मौत से हर कोई दहला हुआ है। गांवों में मातम है। मृतकों के माता-पिता और परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। हादसे में अपने दो-दो जवान बेटे गंवाने वाले दो पिता का दर्द फूटा तो हर आंख नम हो गई। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रवासी मजदूरों से अपील की है कि वे धैर्य रखें। घर वापसी के लिए हर संभव इंतजाम किए जा रहे हैं।
स्पेशल ट्रेन से आए पर बक्से में बंद होकर
शहडोल जिले के गजराज सिंह सिसकते हैं, मैंने दो जवान बेटे ब्रजेश सिंह (28) और शिवदयाल (25) खो दिए। मुझे क्या पता था कि वे मुझसे जुदा हो जाएंगे। एक दिन पहले ब्रजेश ने कहा था कि स्पेशल ट्रेन से शनिवार को पहुंच जाएंगे। वो आए तो स्पेशल ट्रेन से लेकिन बक्से में बंद होकर।
बुढ़ापे का सहारा खोया
अंतोली गांव के रामनिरंजन का दर्द आंसुओं के साथ निकलता है, लोग जब मुझसे कहते थे कि तुम्हारे लड़के कमाने लगे हैं, तो मुझे गर्व होता था। नन्हीं उम्र में निर्वेश (20) और रावेंद्र (18) ने घर परिवार की खातिर शहर जाने का फैसला किया था। रेल हादसे में मेरा सब कुछ खत्म हो गया। मैंने तो अपने बुढ़ापे का सहारा खो दिया, मुझे नहीं पता मैं अब कैसे जिऊंगा।
सभी के एक साथ अंतिम संस्कार की तैयारी
ब्योहारी के विधायक शरद कोल समेत अन्य अधिकारी पीड़ित परिवारों के घर पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी। अधिकारियों का कहना है कि सभी मृतकों का अंतिम संस्कार एक साथ करने की तैयारी है। जिला प्रशासन ने इसके लिए हर परिवार को दस हजार रुपये की राशि स्वीकृत की है। 16 मृतकों में से पांच उमरिया और 11 शहडोल जिले के हैं। सेंट्रल रेलवे की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका दीक्षित ने बताया कि सभी शवों को स्पेशल ट्रेन से ही भेजा गया है। जिस कोच में शव हैं उस कोच में जबलपुर में अलग किया जाएगा। वहां से शवों को गृह जनपद पहुंचाया जाएगा।