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किसान आंदोलन के लिए शुक्रवार बेहद अहम, प्रधानमंत्री तोड़ सकते हैं भ्रम!

Thu, 17 Dec 2020 07:32 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 17 Dec 2020 07:32 PM IST
सार

केंद्र सरकार के अड़ियल रुख के चलते देशभर में विरोध तथा व्यापक जन गोलबंदी शुरू की जा रही है। मुंबई में 22 दिसंबर को विशाल किसान रैली आयोजित होगी...

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Farmers Protest: PM Modi will interact with farmers of Madhya Pradesh on Friday via Video conferencing
कृषि कानूनों का विरोध करते किसान - फोटो : amar ujala

विस्तार

किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पीछे नहीं हट रही है। गुरुवार शाम को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने एक बार फिर किसानों को अपने तर्क देकर समझाने का प्रयास किया है। किसानों के नाम आठ पन्ने का एक पत्र जारी किया गया है। दूसरी तरफ किसान आंदोलन के मामले में शुक्रवार बेहद अहम है। इसकी वजह है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश में आयोजित किए जा रहे किसान सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करेंगे।

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इस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री किसानों का वह 'भ्रम' दूर करने का प्रयास कर सकते हैं, जो केंद्र सरकार और किसानों के बीच बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनेक मंत्री कई दिनों से लगातार यह बयान दे रहे हैं कि कृषि से जुड़े तीनों कानूनों के मुद्दे पर किसानों में भ्रम फैलाया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने यह आरोप भी लगाया है कि कांग्रेस पार्टी, किसानों को उकसा रही है।
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कृषि मंत्री द्वारा जारी किया गया यह पत्र देशभर में पहुंचाया जाएगा। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे कृषि संगठन, जो केंद्र सरकार के तीनों कानूनों का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें साथ लेकर किसानों के बीच पहुंचा जाएगा। हर राज्य में जिला और ब्लॉक स्तर पर किसान सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश में आयोजित होने जा रहे किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
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उनके संबोधन से किसान आंदोलन को लेकर एक वह तस्वीर साफ हो जाएगी कि तीनों क़ानून वापस होंगे या नहीं। दूसरी ओर, एआईकेएससीसी ने अपनी बैठक के बाद कहा, किसानों ने एक चुनी हुई सरकार से किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने की मांग की है। केंद्र सरकार को किसानों की मांग बिना किसी देरी के मान लेनी चाहिए। इसके बाद ही गतिरोध समाप्त होगा। तीनों कानूनों को रद्द किए बिना किसान अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। केंद्र सरकार के अड़ियल रुख के चलते देशभर में विरोध तथा व्यापक जन गोलबंदी शुरू की जा रही है। मुंबई में 22 दिसंबर को विशाल किसान रैली आयोजित होगी।

एआईकेएससीसी के पदाधिकारी अविक साहा ने कहा, यह समझ नहीं आ रहा है कि केंद्र सरकार अपनी जिद पर क्यों अड़ी हुई है। ये किसान किसी दूसरे देश के तो नहीं हैं। सरकार, कॉरपोरेट सेक्टर की चिंता कर रही है, मगर अन्नदाता की कोई परवाह नहीं है। किसानों की तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की न्यायोचित मांग से इनकार करने का यही मतलब निकलता है। इन कानूनों के रद्द करने से किसानों की सभी फसलों के लाभकारी मूल्यों और आमदनी आश्वासन की पुरानी मांगों पर आगे चर्चा हो सकती है।


वह कहते हैं कि केंद्र सरकार कहती है कि कांग्रेस पार्टी किसानों को गुमराह कर रही है। उनमें भ्रम फैला रही है। किसान संगठनों का कहना है कि ये भ्रम तो सरकार ने ही फैलाया है। जब इन कानूनों को लाने से पहले किसान को विश्वास में नहीं लिया गया तो अब भ्रम कौन फैला रहा है। बतौर साहा, निश्चित तौर पर भाजपा यह भ्रम फैला रही है। रोजाना, केंद्र सरकार द्वारा नए भटकाने वाले बयान जारी किए जा रहे हैं।

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