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चीनी मिलों के मुनाफे पर नहीं है किसानों का हक

Thu, 08 Dec 2016 03:08 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Thu, 08 Dec 2016 03:08 AM IST
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Farmers has no rights on Sugar mills profit
- फोटो : getty

चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया ब्याज माफ करने के मामले में हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई जारी रही। चीनी मिलों की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि सरकार द्वारा ब्याज माफ करने का निर्णय उचित है क्योंकि चीनी के दाम गिर गए हैं। गन्ने का समर्थन मूल्य भी काफी ज्यादा है इसलिए मिलों को घाटा हो रहा है। वह ब्याज की रकम का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं। 

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किसान मजदूर संगठन की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। चीनी मिलों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत ने कहा कि याचिका में कहा गया कि मिलें मुनाफा कमा रही हैं।
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चीनी मिलों द्वारा उत्पादित अन्य उत्पादों शीरा, खोई, बिजली आदि से होने वाले मुनाफे से किसानों का कोई लेना देना नहीं है। गन्ना चीनी बनाने के लिए लिया जाता है, इसलिए किसानों को सिर्फ चीनी से होने वाली आय से ही मतलब है। कोर्ट ने गन्ना समितियों की ओर से अधिवक्ता रवींद्र सिंह को पक्ष रखने के लिए कहा था। 

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गन्ना किसानों का ब्याज माफ करने के मामले में सुनवाई जारी

Farmers has no rights on Sugar mills profit
फाइल फोटो - फोटो : getty
रवींद्र सिंह ने बताया कि वास्तविकता यह है कि किसानों को तो ब्याज की रकम भरनी पड़ रही है जबकि सरकार ने मिलों का ब्याज माफ कर दिया है। किसान परेशान हैं। भुगतान नहीं होने से उनको दिक्कत हो रही है। यह स्थिति तब है जबकि सरकार ने गन्ना मूल्य का भुगतान दे किश्तों में करने की छूट दी है। नियमानुसार भुगतान में 14 दिन से अधिक का विलंब होने पर ब्याज की रकम गन्ना मूल्य में जुड़ जाती है। 

याची वीएम सिंह ने कहा कि गन्ना आयुक्त को ब्याज माफ करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट ने यह तय किया है कि किसान ब्याज पाने के हकदार हैं। सरकार ने पिछले दो सत्रों के दौरान मिलों का पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज माफ किया है जबकि किसानों को ऐसी कोई राहत नहीं दी गई।

किसान गन्ना बोने के लिए कर्ज लेता है और उसका ब्याज भी चुकाता है। याचिका पर अब शुक्रवार नौ दिसंबर को सुनवाई होगी।
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