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पूसा किसान मेले में हंगामे की आशंका, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के सामने विरोध जता सकते हैं किसान

Tue, 23 Feb 2021 06:58 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 23 Feb 2021 06:58 PM IST
सार

  • 25-27 फरवरी को होगा पूसा किसान मेला, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर करेंगे उद्घाटन, कृषि राज्य मंत्री पुरूषोत्तम रूपाला भी रहेंगे मौजूद
  • एक विशेष सत्र में वैज्ञानिक किसानों को बताएंगे कृषि कानूनों के फायदे

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Farmers can protest in front of agriculture Minister Narendra Singh Tomar at Pusa kisan mela 2021
indian Agricultural Research Institute (IARI) - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

सामान्य तौर पर बेहद शांत माहौल में संपन्न होने वाला पूसा किसान मेला इस बार हंगामेदार हो सकता है। आशंका है कि जब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मेले का उद्घाटन करने आएंगे, यहां किसान उनका विरोध कर सकते हैं। इस दौरान उनके साथ कृषि राज्य मंत्री पुरूषोत्तम भाई रूपाला भी मौजूद रहेंगे। किसान केंद्र सरकार से तीन नए कानूनों के कारण नाराज हैं और तीन महीने से आंदोलन कर इन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र सरकार और किसानों के बीच हो रही वार्ता के बीच प्रमुख वार्ताकार हैं।

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कृषि कानूनों से किसानों की नाराजगी के कारण सोमवार को एक और केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान को अपने गृह क्षेत्र मुजफ्फरनगर में किसानों की भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। आशंका है कि कृषि मंत्री का भी इस कार्यक्रम में विरोध किया जा सकता है। इस आशंका के मद्देनजर मेले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

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देश के हर हिस्से से आ रहे किसान

पूसा किसान मेला 25 फरवरी से 27 फरवरी के बीच आयोजित किया जाएगा। इसमें भागीदारी करने के लिए देशभर से किसान आ रहे हैं। किसान आंदोलन की प्रमुख भूमि पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भी भारी संख्या में किसान मेले में भाग लेने के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में आशंका है कि किसान इस अवसर पर मंत्रियों के सामने अपना विरोध जता सकते हैं।

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वैज्ञानिक बताएंगे कृषि कानूनों के लाभ

पूसा किसान मेले में बातचीत के छह सत्र रखे गए हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण सत्र नए कृषि कानूनों पर भी रखा गया है। इस सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक नए कृषि कानूनों से किसानों को होने वाले लाभ के बारे में बताएंगे। किसान कृषि कानूनों पर अपनी आशंकाओं के समाधान प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा किसानों को मेले में विभिन्न फसलों की 32 नई किस्में देखने को मिल सकती हैं जो उनकी आय और कृषि उपज बढ़ाने में कारगर साबित होंगी।

क्या विरोध करेंगे किसान

क्या किसान इस कार्यक्रम में अपना विरोध जता सकते हैं? अमर उजाला के इस सवाल पर एक किसान नेता ने कहा कि पूसा एक प्रतिष्ठित संस्थान रहा है। यहां के वैज्ञानिक किसानों की स्थिति सुधारने के लिए दिन-रात मेहनत करते रहे हैं और किसानों को एक से बढ़कर एक नई फसलें दी हैं, जिससे किसानों की स्थिति में बदलाव आया है। इसलिए वे इस संस्थान के किसी भी कार्यक्रम का विरोध नहीं करेंगे। अगर इस कार्यक्रम में सरकार के मंत्री भाग लेंगे तो उनके सामने किसान स्वतंत्र रूप से कृषि कानूनों पर अपनी बात रख सकते हैं।

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