फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Farmer Protest will not end Farmers have learned to move forward amidst disagreements Latest News Update

नहीं खत्म होगा आंदोलन: असहमतियों के बीच आगे बढ़ना सीख चुके हैं किसान, समस्या का हल अभी भी कोसों दूर

Wed, 01 Dec 2021 09:21 PM IST
amit sharma अमित शर्मा
Updated Wed, 01 Dec 2021 09:21 PM IST
सार

दरअसल, किसान आंदोलन अपने प्रारंभ से ही अनेक अंतर्विरोधों का शिकार रहा है। आंदोलन को आगे बढ़ाने के तरीके, प्रदर्शन करने और केंद्र सरकार से बातचीत करने के मामले से लेकर आंदोलन का श्रेय लेने तक में कई बार किसान नेताओं का अंतर्विरोध सामने आता रहा है। लेकिन इन अंतर्विरोधों से आगे बढ़ते हुए किसान आंदोलन अभी भी जारी है। किसान नेता इसे अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत मानते हैं।

विज्ञापन
Farmer Protest will not end Farmers have learned to move forward amidst disagreements Latest News Update
किसान आंदोलन (फाइल) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

किसान संगठनों के बीच कुछ मुद्दों पर आपसी असहमति होने के आधार पर यह कहा जाने लगा था कि अब किसान आंदोलन खत्म होने की तरफ आगे बढ़ रहा है। कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों की वापसी के बाद किसान अब वापस अपने घर जाने की योजना बना रहे हैं और एक दिसंबर या चार दिसंबर को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। लेकिन किसान संगठनों के जिम्मेदार नेताओं का रुख बता रहा है कि यह आंदोलन फिलहाल खत्म नहीं होने जा रहा है। किसान आंदोलन के अब तक चले आ रहे स्वरूप में कुछ परिवर्तन हो सकता है, किसानों की सरकार को दबाव में लाने की रणनीति में कुछ बदलाव हो सकता है, लेकिन किसान आंदोलन समाप्त होने से अभी भी कोसों दूर है।

विज्ञापन


दरअसल, किसान आंदोलन अपने प्रारंभ से ही अनेक अंतर्विरोधों का शिकार रहा है। आंदोलन को आगे बढ़ाने के तरीके, प्रदर्शन करने और केंद्र सरकार से बातचीत करने के मामले से लेकर आंदोलन का श्रेय लेने तक में कई बार किसान नेताओं का अंतर्विरोध सामने आता रहा है। लेकिन इन अंतर्विरोधों से आगे बढ़ते हुए किसान आंदोलन अभी भी जारी है। किसान नेता इसे अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत मानते हैं।
विज्ञापन


किसान नेताओं का कहना है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के हर हिस्से से किसान इस आंदोलन से जुड़े हैं। सबकी अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताएं हैं। इसके आधार पर नेताओं की राय भी अलग-अलग होती है। लेकिन किसान नेताओं को इस बात के लिए श्रेय दिया जा सकता है कि तमाम अंतर्विरोधों के बाद भी संयुक्त किसान मोर्चा के सभी नेताओं ने इसे माना और एकमत होकर आंदोलन आगे बढ़ाया। अंतर्विरोधों से निपटते हुए आगे बढ़ने की इसी ताकत का परिणाम हुआ कि पहली बार केंद्र सरकार को अपना कानून वापस लेना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन


कब-कब हुए अंतर्विरोध
किसान आंदोलन में कई बार अंतर्विरोध खुलकर सामने आए। पंजाब से शुरू हुए इस किसान आंदोलन में नेतृत्व के मुद्दे पर ही सबसे पहला विवाद हुआ था। चूंकि इस आंदोलन की शुरुआत पंजाब के किसानों ने की थी, वे इस आंदोलन को अपनी अगुवाई में संपन्न कराना चाहते थे। कुछ किसान नेताओं का आरोप है कि दर्शनपाल सिंह जैसे नेता इसे अपने दम पर अगुवाई करते हुए आगे बढ़ाना चाहते थे, तो सरदार विक्रम सिंह जैसे किसान अपनी अगुवाई में इस आंदोलन को आगे बढ़ाना चाहते थे।

लेकिन गुरुद्वारा रकाबगंज में किसानों की बैठक में यह तय हुआ कि किसान आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले लड़ा जाएगा और कोई एक व्यक्ति इसका चेहरा नहीं बनेगा। तमाम अंतर्विरोधों के बाद भी यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया और अब तक सभी किसान नेता इस पर कायम हैं।

आंदोलन के लंबा खिंचने के बीच कुछ किसान नेताओं पर आंदोलन के बहाने अपनी राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा पूरी करने के भी आरोप लगे। गुरनाम सिंह चढ़ूनी और कुछ अन्य नेताओं ने स्वयं चुनाव लड़कर सरकार से निपटने की रणनीति पर भी मतभेद हुआ। इसके लिए चढ़ूनी को मोर्चे ने दंडित भी किया। अब सभी किसान नेता अराजनीतिक रहते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने पर सहमत हो चुके हैं और इसी प्रकार आंदोलन आगे बढ़ रहा है।

एक साल के आंदोलन के बीच कभी आंदोलन के अगुवा किसानों में से एक रहे सरदार वीएम सिंह को किसान मोर्चे से बाहर जाना पड़ा, तो पंजाब के कुछ किसानों ने खुद को इस आंदोलन से अलग कर लिया। किसान मोर्चे की योजनाओं के प्रमुख रणनीतिकार योगेंद्र यादव को भी लखीमपुर खीरी में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के घर जाकर शोक मनाने के कारण किसान मोर्चे से निलंबित रहना पड़ा, उन्हें अपनी इस ‘गलती’ के लिए माफी भी मांगनी पड़ी। लेकिन इससे उबरते हुए आंदोलन फिर एक बार पूरी गति से आगे बढ़ रहा है।

क्या समाप्त होगा आंदोलन
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. आशीष मित्तल ने अमर उजाला से कहा कि सरकार कुछ मांगे मानकर और बातचीत की लंबी प्रक्रिया अपनाकर हमारा आंदोलन समाप्त करने की रणनीति बना रही है। लेकिन इस बात पर कोई भी गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए, किसान अपनी ‘गाढ़ी कमाई’ को एक दिन में लुटाने को तैयार नहीं हैं। हम चार दिसंबर की बैठक में अंतिम रणनीति पर विचार करेंगे और सबकी सहमति से इस पर निर्णय लिया जाएगा।


उन्होंने कहा कि अंतर्विरोधों के बाद भी लेकिन इतना तय है कि आंदोलन खत्म नहीं होगा, अधिकतम इसके स्वरूप और आंदोलन करने के तरीके में बदलाव किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed