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किसानों की चार में से दो मांगें सरकार ने मानीं, कृषि कानूनों और एमएसपी पर नहीं बनी बात
Thu, 31 Dec 2020 06:00 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 31 Dec 2020 06:00 AM IST
सार
- किसान आंदोलन के 35वें दिन सरकार ने पराली और बिजली से जुड़ी मांगें मानी।
- दिल्ली बार्डर पर ही किसान मनाएंगे नया साल, अगले दौर की वार्ता चार जनवरी को।
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विज्ञान भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ किसान नेता
- फोटो : PTI
विस्तार
कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग पर अडेे़ किसान संगठनों के साथ बैठक में सरकार ने उनके एजेंडे की चार में से दो मांगें मान लीं। सरकार पराली जलाने को लेकर किसानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई रोकने और विद्युत संशोधन अधिनियम की वापसी पर राजी हो गई है। हालांकि छठे दौर की वार्ता में तीनों कानून वापस लेने और एमएसपी पर बात नहीं बनी और दोनों पक्ष इन पर चर्चा के लिए चार जनवरी को सातवीं बार आमने-सामने होंगे।
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, खाद्य एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने विज्ञान भवन में बुधवार को हुई वार्ता में शामिल 41 किसान संगठनों को एमएसपी खरीद प्रक्रिया के बेहतर अनुपालन के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव दिया। साथ ही दिल्ली-एनसीआर व आसपास वायु प्रदूषण प्रबंधन के लिए आयोग के अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर रखने और विद्युत संशोधन विधेयक-2020 के मसौदे की वापसी पर सहमति जताई। दोनों पक्षों के बीच पांच घंटे से ज्यादा चली बैठक में किसान तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़े रहे।
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वहीं, बैठक के बाद तोमर ने कहा, बातचीत मैत्रीपूर्ण माहौल में हुई हालांकि किसान तीनों कानून वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। हमने उन्हें कानूनों के फायदे गिनाए और खास समस्याओं के बारे में पूछा। तोमर ने शांतिपूर्ण वार्ता के लिए किसान संगठनों की सराहना की। उन्होंने किसान संगठनों से बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों को आंदोलन स्थल की कड़कड़ाती ठंड से वापस घर भेजने की अपील की।
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किसानों ने सरकार की चाय पी पर खाना लंगर का ही खाया
वार्ता में शामिल किसानों ने इस बार भी खाना अपने लंगर का खाया। बैठक के दो घंटे बाद सिंघु बॉर्डर से लंगर का खाना विज्ञान भवन पहुंचा तो तीनों केंद्रीय मंत्रियों ने भी किसानों के साथ लंगर का खाना खाया। इसके बाद बैठक शुरू हुई। हालांकि अब तक सरकार का कुछ भी खाने-पीने से इनकार करते रहे किसान नेताओं ने शाम को सरकार की चाय स्वीकार की। चाय के बाद किसान नेताओं ने विज्ञान भवन में अरदास की।
सरकार को थी बात बनने की उम्मीद
सरकार को उम्मीद थी कि गतिरोध खत्म होगा। किसान घर लौट जाएंगे और परिवार के साथ नए साल का जश्न मनाएंगे। हालांकि दोनों प्रमुख मुद्दों पर सहमति न बनने से अब किसानों का नया साल दिल्ली की सीमा पर ही मनेगा। बैठक से पहले केंद्रीय मंत्री तोमर ने बातचीत में हल निकलने की उम्मीद जताई थी। वहीं, किसानों ने कहा कि हम पूरी तैयारी से आए हैं और मांगें मनवाए बिना नहीं जाएंगे।
सरकार का प्रस्ताव हमारे एजेंडे से अलग
पंजाब किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रुलदू सिंह मनसा ने कहा, सरकार एमएसपी खरीद पर कानूनी गारंटी देने को तैयार नहीं है। इसकी जगह समिति बनाने का प्रस्ताव जरूर दिया है, लेकिन यह प्रस्ताव हमारे एजेंडे से अधिक मेल नहीं खाता और इसका हमारी मांगों पर असर नहीं होता। किसान नेता कलवंत सिंह संधू ने कहा, बुधवार को सरकार ने दो मांगें मान ली हैं। एमएसपी और कानूनों पर चार जनवरी को चर्चा होगी।
आधी जीत हुई, आधी पर बनेगी बात : तोमर
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 'आधी जीत हुई और आधी बात चार जनवरी को होने वाली वार्ता में बन जाएगी। किसानों के एजेंडे की चार में से दो मांगों पर सहमति बन गई यानी 50 फीसदी मसला हल हो गया। अगली बातचीत में पूरा मसला हल होने की उम्मीद है।'