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यूपी पुलिस की कैद में मारे गए ये कुख्यात अपराधी: किसी की जेल के अंदर हत्या, कोई बीच सड़क गोलियों से भूना गया

Thu, 08 Jun 2023 12:44 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Thu, 08 Jun 2023 12:44 PM IST
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सार
पिछले पांच साल में यूपी के अंदर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कुख्यात अपराधियों की न्यायिक हिरासत में हत्या हो गई। आज हम ऐसे ही पांच कुख्यात अपराधियों की कहानी बताएंगे। 
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Famous criminals were killed in the custody of UP police someone was killed inside the jail, someone was shot
पुलिस सुरक्षा में मारे गए ये अपराधी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखनऊ के सिविल कोर्ट में पश्चिमी यूपी के अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की बुधवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने एक बार फिर से अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की चर्चा छेड़ दी है। ऐसा नहीं है कि केवल इन्हीं तीनों बदमाश का ऐसा हश्र हुआ है। पिछले पांच साल में यूपी के अंदर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कुख्यात अपराधियों की न्यायिक हिरासत में हत्या हो गई। आज हम ऐसे ही पांच कुख्यात अपराधियों की कहानी बताएंगे। 

 

1. शुरुआत संजीव जीवा की हत्या से करते हैं
घटना लखनऊ सिविल कोर्ट की है। पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा (50) की बुधवार को पेशी थी। संजीव जीवा माफिया मुख्तार अंसारी का बेहद करीबी गैंगस्टर था। हमलावर वकील के कपड़े पहनकर आया था। मजिस्ट्रेट के सामने ही हत्यारों ने जीवा पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। इस हमले में दो पुलिसकर्मी, एक डेढ़ साल की बच्ची व उसकी मां को भी गोली लगी है। मौके पर मौजूद वकीलों ने आरोपी को दौड़ाकर पकड़ लिया। 



जीवा की कहानी पर भी नजर डाल लेते हैं। जीवा को भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड में आजीवन कारवास की सजा मिली थी। वह मूल रूप से मुजफ्फरनगर के शाहपुर आदमपुर का रहने वाला था। पिछले बीस साल से वह जेल में बंद था। उस पर दो दर्जन केस दर्ज हैं।    
 

2. पुलिस हिरासत में अतीक-अशरफ की सरेआम हत्या
बात 15 अप्रैल की है। यूपी के सबसे बड़े माफियाओं में से एक अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को रिमांड में लेकर यूपी एसआईटी पूछताछ कर रही थी। नियम के मुताबिक हर रोज दोनों का मेडिकल भी होता था। 15 अप्रैल की रात भी मेडिकल कराने के लिए पुलिस की टीम दोनों को लेकर अस्पताल पहुंची। 

यहां पहले से मौजूद मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। अतीक और असर मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस बीच, मीडियाकर्मी बनकर पहुंचे तीन हमलावरों ने दोनों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। एक के बाद एक कई राउंड फायरिंग की और मौत के घाट उतार दिया। अतीक-अशरफ यूपी के कुख्यात अपराधियों में से एक थे। हत्या, लूटपाट, कब्जा, अपहरण जैसे कई मामले दोनों पर चल रहे थे। 
 

3. जेल में मारा गया मुन्ना बजरंगी 
मुन्ना बजरंगी के नाम से एक समय पूरा यूपी कांपता था। लेकिन इस माफिया का अंत भी उसी तरह हुआ। मुन्ना को 2018 में बागपत जेल के अंदर गोलियों से भून दिया गया था। मुन्ना का पूरा नाम प्रेम प्रकाश सिंह था। मुन्ना बजरंगी का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था।  

मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दबदबा बनाया। 

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। पूर्व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी मुन्ना बजरंगी का नाम था।  इस हत्याकांड के बाद से ही मुन्ना मोस्ट वॉन्टेड बन गया था।

 29 अक्तूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा था। 2018 में उसे झांसी से बागपत जेल में शिफ्ट किया गया, जहां उसी साल जेल में ही गोलियों से भूनकर हत्या हो गई। 
 

4. आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए, फिर मारा गया कुख्यात बदमाश विकास दुबे
तीन जुलाई 2020 की बात है। कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस की टीम कुख्यात बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई। इसी बीच विकास दुबे और उसगे गुर्गों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। विकास दुबे और उसके गुर्गे फरार हो गए। 

पुलिस ने विकास के तीन सहयोगियों का एक के बाद एक एनकाउंटर किया। इसके बाद विकास दुबे को नौ जुलाई 2020 को उज्जैन महाकाल से गिरफ्तार कर लिया गया। यूपी की पुलिस उसे वापस कानपुर ला रही थी। इस बीच, गाड़ी पलट गई। पुलिस के मुताबिक, विकास दुबे ने पुलिसकर्मी का बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की। इसी बीच, पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया। 
 

5. जेल में मुख्तार के करीबी और पश्चिमी यूपी के बड़े बदमाश को मार डाला गया
मई 2021 की बात है। चित्रकूट जेल में कई कुख्यात बदमाश बंद थे। इन्हीं में बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी का करीबी मेराज और पश्चिमी यूपी का गैंगस्टर मुकीम काला भी था। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद मेराज ही मुख्तार का सबसे खास आदमी था। 

2021 में मेराज-मुकीम के ही जेल में गैंगस्टर अंशु दीक्षित बंद था। अंशु ने मौका मिलते ही मेराज और मुकीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। गैंगवार हुआ। मेराज और मुकीम की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने अंशु दीक्षित का भी जेल के अंदर ही एनकाउंटर कर दिया।  
 

पांच साल में 190 से ज्यादा बदमाशों को ढेर कर चुकी है पुलिस
यूपी सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2017 से अब तक कुल  10,720 एनकाउंटर हो चुके हैं। इनमें अतीक अहमद के बेटे असद अहमद, उसके गुर्गे गुलाम, अरबाज और उस्मान चौधरी जैसे 190 बदमाशों को ढेर किया जा चुका है। अगर पिछले छह साल की बात करें तो बीते वर्ष पुलिस व बदमाशों के बीच मुठभेड़ का आंकड़ा सबसे कम रहा है। वर्ष 2018 में सर्वाधिक 41 अपराधी मारे गए थे। इससे पहले साल 2017 में 28, साल 2019 में 34, साल 2020 में 26, साल 2021 में 26 व पिछले वर्ष 2022 में 14 अपराधी मारे गए हैं। साल 2023 में अब तक 11 बदमाश मारे गए हैं। बीते छह वर्ष में पुलिस मुठभेड़ में 23 हजार से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। एनकाउंटर के दौरान 12 पुलिसकर्मी शहीद और 1400 घायल हुए हैं।
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