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महाराष्ट्र: सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजन को मिलेंगे 32.59 लाख; एमएसीटी का आदेश

Wed, 09 Jul 2025 06:52 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे Published by: रिया दुबे Updated Wed, 09 Jul 2025 06:52 PM IST
सार

11 साल पहले एमएसआरटीसी के बस चालक किसन चौधरी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने बीमा कंपनी और ट्रक चालक को दोषी मानते हुए मृतक के परिवार को 32.59 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
 

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Family of a person who lost his life in a road accident will get Rs 32 lakh; MACT order
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र के ठाणे में सड़क दुर्घटना में मरने वाले एमएसआरटीसी बस के चालक के परिजनों को 32.59 लाख रुपये का मुआवाज मिलेगा। मृतक के परिवार की अपील पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने बीमा कंपनी और ट्रक चालक को दोषी मानते हुए मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया। 

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11 साल पहले हुई थी दुर्घटना 
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 2 जनवरी 2014 को 57 वर्षीय किसन चौधरी एमएसआरटीसी की बस को पुणे के अलेफाटा की ओर ले जा रहे थे। तभी ठाणे जिले के मुरबाड के थिडबी गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने बस को टक्कर मार दी। बस खाई में गिर गई और चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई।
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दोनों चालकों की थी गलती 
पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।  न्यायाधिकरण ने घटनास्थल के निरीक्षण रिपोर्ट और दोनों वाहनों की स्थिति के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि दोनों चालकों की गलती थी। लेकिन मुख्य रूप से ट्रक चालक की गलती थी। 

दुर्घटना टाली जा सकती थी- न्यायाधिकरण
न्यायाधिकरण के अध्यक्ष आर वी मोहिते ने 5 जुलाई को यह आदेश पारित किया। एमएसीटी ने हादसे के लिए ट्रक चालक की लापरवाही को 75 प्रतिशत जिम्मेदार ठहराया। वहीं मृतक बस चालक को 25 प्रतिशत तक सहभागी माना। मोहिते ने कहा कि दुर्घटना टाली जा सकती थी और यह ट्रक चालक की लापरवाही और तेज गति वाहन चलाने के कारण हुई। उन्होंने कहा कि वाहन पर्याप्त जगह होने के बावजूद सकड़ के बीच में चलाया गया। 

दावेदर उचित मुआवजे का हकदार
न्यायाधीकरण ने कहा कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला था और एमएसआरटीसी में उनकी स्थायी नौकरी से आश्रितों को नियमित आय मिल रही थी। दावेदार स्थापित कानूनी सिद्धांतों के तहत उचित और वैध मुआवजे के हकदार हैं। हालांकि, चौधरी के परिवार द्वारा कृषि आय की हानि का दावा खारिज कर दिया गया। न्यायाधिकरण ने कहा, मृतक की कृषि भूमि अब भी परिवार के पास है और 2013 से पहले किसी उच्च आय वाली फसल का कोई नियमित रिकॉर्ड नहीं है। एक बार प्याज बेचने से हुई असाधारण कमाई सतत आय का प्रमाण नहीं बनती।


परिवार के सदस्यों को अलग-अलग मुआवजे देने का आदेश 
न्यायाधिकरण ने ट्रक मालिक और बीमा कंपनी को एक महीने के भीतर संयुक्त रूप से मुआवजा भुगतान करने का आदेश दिया गया है। साथ ही याचिका दायर करने की तारीख से 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इसमें कहा गया है कि कुल मुआवजे में से मृतक की पत्नी को 16.59 लाख रुपये, बेटे को 10 लाख रुपये और उसकी तीन बेटियों को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे । 

एमएसआरटीसी को भी मिलेगा मुआवजा
इसी हादसे से संबंधित एक अन्य दावे में एमएसआरटीसी को बस की क्षति पर 4 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है, जबकि उसने 10 लाख रुपये की मांग की थी। अधिकरण ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर 10 लाख का दावा अत्यधिक था। इसमें कहा गया है कि मुआवजा दावा दायर करने की तारीख से 7.50 प्रतिशत ब्याज के साथ दिया जाएगा।


 

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