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उत्पादों की झूठी जानकारी देने पर होगी दो साल की सजा व 10 लाख का जुर्माना
Fri, 21 Dec 2018 03:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 21 Dec 2018 03:15 AM IST
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- फोटो : getty images
ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए ज्यादा कड़े प्रावधानों वाला उपभोक्ता संरक्षण बिल, 2018 बृहस्पतिवार को लोकसभा में हंगामे के बीच पारित हो गया। इस बिल में यह प्रावधान है कि यदि कोई कंपनी झूठा या भ्रामक प्रचार करती है, जो उपभोक्ताओं के हित के खिलाफ है तो उसे दो साल की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
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अपराध दोहराए जाने पर जुर्माने की राशि 50 लाख रुपये तक और कैद की अवधि पांच साल तक हो जाएगी। उपभोक्ता संरक्षण बिल के अलावा सरकार लोकसभा में नेशनल ट्रस्ट फॉर वेलफेयर ऑफ पर्सन विद ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मेंटल रिटार्डेशन एंड मल्टीपल डिसेबिलिटी (संशोधन) बिल, 2018 को पारित कराने में कामयाब रही।
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उपभोक्ता संरक्षण बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, ‘32 साल बाद उपभोक्ता संरक्षण कानून में कई बदलाव किए गए हैं। यह दो बार स्थायी समिति के पास भेजा जा चुका है।
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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को लागू कराने के लिए तीन स्तरीय नियामक की व्यवस्था की गई है। सबसे ऊपर राष्ट्रीय आयोग, उसके नीचे राज्य आयोग और सबसे नीचे स्तर पर जिला आयोग होंगे। केंद्रीय आयोग का आदेश नहीं मानने पर छह महीने तक की कैद या 20 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।’
पासवान के मुताबिक, जिला आयोग के आदेश के खिलाफ राज्य आयोग में और राज्य आयोग के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय आयोग में अपील की जा सकती है। राष्ट्रीय आयोग के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकेगी। असामान्य परिस्थितियों को छोड़कर अपील आदेश के 30 दिन के भीतर करनी होगी।
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि मिलावट करने वालों पर नकेल कसने के लिए बिस में अलग से प्रावधान है। बिल में ई-कामर्स और डायरेक्ट सेलिंग में अनुचित व्यवहार को रोकने और इन मामलों में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को समुचित कदम उठाने का अधिकार दिया गया है।