{"_id":"5ae2f9064f1c1b54098b6b9a","slug":"fali-nariman-says-sc-collegium-decision-on-judge-appointment-final-govt-contrary-decision-malafide","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम का फैसला अंतिम, इससे इतर कुछ भी बदनीयती: फली नरीमन","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम का फैसला अंतिम, इससे इतर कुछ भी बदनीयती: फली नरीमन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 27 Apr 2018 04:03 PM IST
विज्ञापन
फली एस नरीमन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वरिष्ठ कानूनविद फली एस नरीमन ने कहा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का पांच सदस्यीय कोलेजियम, जिसमें चीफ जस्टिस भी शामिल हैं, यह निर्णय लेता है कि किसी अमुक जज को नियुक्त किया जाना है, तो इसका फैसला अंतिम है और सरकार द्वारा इससे अलग निर्णय लेना बदनीयती है।
नरीमन ने स्वीकार किया कि कोलेजियम सरकार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने की अपनी सिफारिश दोबारा भेजने के फैसले पर एक राय से सहमत या असहमत हो सकती है। लेकिन यह सरकार के साथ "टकराव का कारण बन सकता है। हालांकि जरूरत पड़ी तो हम यह इससे चूकेंगे नहीं।"
हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि एक जज की नियुक्ति को लेकर जारी गतिरोध को राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) बनाने के संसद के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। एनजेएसी जजों की नियुक्ति प्रकिया को नियंत्रित करेगा और सरकार इसे लागू करना चाहती है।
विज्ञापन
उन्होंने ऐसे संकेत दिए कि विपक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को उप-राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने का मुद्दा लंबा चल सकता है।
विज्ञापन
नरीमन ने स्वीकार किया कि कोलेजियम सरकार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने की अपनी सिफारिश दोबारा भेजने के फैसले पर एक राय से सहमत या असहमत हो सकती है। लेकिन यह सरकार के साथ "टकराव का कारण बन सकता है। हालांकि जरूरत पड़ी तो हम यह इससे चूकेंगे नहीं।"
विज्ञापन
हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि एक जज की नियुक्ति को लेकर जारी गतिरोध को राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) बनाने के संसद के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। एनजेएसी जजों की नियुक्ति प्रकिया को नियंत्रित करेगा और सरकार इसे लागू करना चाहती है।
विज्ञापन
उन्होंने ऐसे संकेत दिए कि विपक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को उप-राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने का मुद्दा लंबा चल सकता है।
सबसे पहले SC नायडू के फैसले पर निर्णय लेगा
dipak mishra
उन्होंने कहा कि सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि नायडू का नोटिस खारिज करना न्यायसंगत है या नहीं। यानि, चूंकि यह मुद्दा संसद से संबंधित है, कोर्ट को यह तय करना है कि उसके पास इस तरह के प्रस्ताव पर सुनवाई करने की शक्ति है या नहीं। नरीमन ने कहा, "अगर कोर्ट यह फैसला ले भी लेती है तो, फिर उसको यह तय करना है कि उप-राष्ट्रपति का फैसला अस्थिर है या नहीं।"
इसके अलावा, उन्होंने इशारा किया कि जब विपक्षी दल उपराष्ट्रपति के खिलाफ अदालत में अपील करते हैं, तो इस पर मुख्य न्यायाधीश को फैसला करना है कि यह मामला सुनवाई के लिए किस कोर्टरूम के सामने सूचीबद्ध हो।
नरीमन ने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि वह अभी भी रोस्टर ऑफ मास्टर हैं, इस तथ्य के बावजूद कि वह इस मामले (उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग) में शामिल हैं या नहीं, और क्योंकि बेंच को तय करने का सवाल भी उसमें शामिल है। यह (विशेषाधिकार) छीना नहीं जा सकता या किसी और के साथ साझा नहीं किया जा सकता है। इसमें वह शामिल हैं, और उन्हें यह बताना चाहिए कि इस मामले को किसे तय करना चाहिए।"
इसके अलावा, उन्होंने इशारा किया कि जब विपक्षी दल उपराष्ट्रपति के खिलाफ अदालत में अपील करते हैं, तो इस पर मुख्य न्यायाधीश को फैसला करना है कि यह मामला सुनवाई के लिए किस कोर्टरूम के सामने सूचीबद्ध हो।
नरीमन ने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि वह अभी भी रोस्टर ऑफ मास्टर हैं, इस तथ्य के बावजूद कि वह इस मामले (उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग) में शामिल हैं या नहीं, और क्योंकि बेंच को तय करने का सवाल भी उसमें शामिल है। यह (विशेषाधिकार) छीना नहीं जा सकता या किसी और के साथ साझा नहीं किया जा सकता है। इसमें वह शामिल हैं, और उन्हें यह बताना चाहिए कि इस मामले को किसे तय करना चाहिए।"