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NSUI के ऑफिशियल ग्रुप में ‘जय श्री राम’ कहने पर नहीं हुआ था विवाद, जांच में फर्जी निकला ये दावा

Thu, 17 Jun 2021 06:56 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 17 Jun 2021 06:56 PM IST
सार

सोशल मीडिया में कहा जा रहा- कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के ऑफिशियल ग्रुप में कुछ लड़कों ने जय श्री राम का नारा लगाया, जिसके बाद उन्हें जिलाध्यक्ष ने ग्रुप से हटा दिया, लेकिन अमर उजाला की जांच में यह दावा फर्जी निकला...

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Fact Check: There was no controversy over saying Jai Shri Ram in the official group of NSUI
NUSI के व्हाट्सएप चैट - फोटो : AmarUjala

विस्तार

सोशल मीडिया में वायरल एक सन्देश के अनुसार कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के एक ऑफिशियल ग्रुप में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने पर विवाद खड़ा हो गया। संदेश के मुताबिक़, एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने ग्रुप में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया, इससे नाराज होने के कारण एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष ने उन छात्रों को ग्रुप से हटा दिया। इस विवाद के सामने आने के बाद एबीवीपी और भाजपा के नेताओं ने सोशल मीडिया में यह प्रचारित करना शुरू कर दिया कि यही कांग्रेस का दोहरा चरित्र है। एक तरफ उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राहुल गांधी राम जन्मभूमि विवाद पर भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) को कटघरे में खड़ा करते हैं, जबकि उन्हीं के छात्र संगठन में केवल राम का नारा लगाने पर छात्रों को ग्रुप से निकाल दिया जाता है।

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क्यों बड़ा हो गया ये मुद्दा

दरअसल, इसके ठीक दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में भी इसी तरह की एक घटना सामने आई थी जिसमें 5 जून को एक 72 वर्षीय मुस्लिम बुजुर्ग को कुछ लोगों ने इसलिए पीट दिया था जब उन्होंने जय श्री राम का नारा लगाने से इनकार कर दिया था। इस मुद्दे पर भी राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने विरोध किया था। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस घटना के विरोध में 15 जून को एक ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘मैं ये मानने को तैयार नहीं हूं कि श्रीराम के सच्चे भक्त ऐसा कर सकते हैं। ऐसी क्रूरता मानवता से कोसों दूर है और समाज और धर्म दोनों के लिए शर्मनाक है।’

लेकिन बाद में इस घटना में यह तथ्य सामने आया था कि बुजुर्ग की पिटाई सांप्रदायिक कारणों से नहीं, बल्कि ताबीज बेचने के एक विवाद के कारण हुई थी। पिटाई करने में मुस्लिम समुदाय के चार युवक भी शामिल थे। इस मामले में ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में कुछ राजनेताओं पर राजनीति करने का आरोप लगाया था।

इसी क्रम में जब NSUI का मामला भी सामने आ गया तो भाजपा समर्थकों ने इसे बढ़ाचढ़ाकर पेश करना शुरू कर दिया, जिससे विवाद बढ़ गया। लेकिन जांच में यह बात बिलकुल झूठी निकली।

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क्या था मामला

अमर उजाला के पास NSUI जमशेदपुर के उस ऑफिशियल ग्रुप के बातचीत की स्क्रीनशॉट मौजूद है जिसमें यह पूरा विवाद खड़ा हुआ था। छात्रों के बीच की यह पूरी बातचीत देखने के बाद पता चल जाता है कि यह मामला NSUI के संगठन में बड़ा पद पाने को लेकर शुरू हुआ था। लेकिन जब छात्रों की यह मांग पूरी नहीं हुई, तब छात्रों ने ग्रुप में जय श्रीराम का नारा लगाना शुरू कर दिया।

इसके बाद भी ज्यादातर छात्रों ने ग्रुप को स्वयं ही छोड़ा है और किसी भी छात्र को ग्रुप से हटाया नहीं गया है। सबसे बड़ी बात कि पूरी बातचीत में छात्र कमल अग्रवाल को संगठन में महत्वपूर्ण पद देने की मांग कर रहे हैं और इसके लिए जिला अध्यक्ष रोज तिरके से मांग भी कर रहे हैं। उनकी बात न मानने पर वे जय श्रीराम कहते हुए ग्रुप से लेफ्ट कर जाते हैं।

जय श्री राम का विरोध भी नहीं

व्हाट्सएप ग्रुप के पूरे चैट में छात्रों ने बार-बार जय श्रीराम का नारा लगाया है, लेकिन मजे की बात है कि किसी एक भी व्यक्ति ने छात्रों को जय श्रीराम कहने का विरोध नहीं किया है। इसके बाद भी इसे जय श्रीराम से जोड़कर राजनीति करने की कोशिश की गई।

क्या कहते हैं संगठन के अध्यक्ष

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन से जब इस मामले पर सफाई मांगी गई तब उन्होंने बताया कि जय श्रीराम कहने पर कहीं भी कोई विवाद नहीं हुआ था। कमल अग्रवाल नाम के एक छात्र को पहले संगठन में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने नहीं संभाला। वे अपने लिए ज्यादा बड़ी भूमिका की मांग करते हुए ग्रुप को लेफ्ट कर गये।

बाद में उनके समर्थक कुछ छात्रों ने उन्हें बड़ा पद देने की मांग करते हुए ग्रुप छोड़ा और जयश्रीराम का नारा लगाकर अपना विरोध जताया। लेकिन इसके कारण किसी भी छात्र से कोई बात नहीं की गई।

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