कोरोना वायरसः क्या शराब का सेवन रोक सकता है संक्रमण? पढ़ें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
- सेनिटाइजर या हैंड रब में 60 से 70 फीसदी तक अल्कोहल
- कोरोना सांस के संक्रमण से जुड़ी बीमारी है
- - मांसाहार जैसी खाने की चीजों से नहीं पड़ता कोई असर
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श्वांस से जुड़ी बीमारी
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में माइक्रो बॉयोलोजी की विशेषज्ञ डॉक्टर ज्योत्सना ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना सांस के संक्रमण से जुड़ी बीमारी है। कोराना का वायरस सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर उसमें संक्रमण पैदा कर रहा है। संक्रमित हाथों को चेहरे तक लाने से इसीलिए रोका जा रहा है क्योंकि इससे वायरस नाक के संपर्क में आ जाता है और यह सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर लोगों को बीमार कर देता है। अगर कोई व्यक्ति सांस की बजाय मुंह से सांस लेता है तो यह संक्रमण मुंह के माध्यम से भी हो सकता है।
खाने से जुड़ी बीमारी नहीं
कोरोना श्वांस से संबंधित बीमारी है, इसलिए यह गलतफहमी भी दूर हो जानी चाहिए कि कोई पदार्थ खा लेने से कोरोना हो सकता है। इसमें मांसाहार भी शामिल है। कुछ जगहों पर संक्रमण से बचने के लिए लोगों के मांसाहार छोड़ने, मुर्गे-मुर्गियों को भारी संख्या में मारने की खबरें भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अफवाहों से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है और व्यक्ति अपनी मनचाही चीज खा सकता है। शराब का सेवन सीधे लीवर को प्रभावित करता है। लेकिन इस वायरस के लीवर को संक्रमित न करने के कारण शराब का सेवन वायरस से निबटने में मदद नहीं करेगा, उलटे यह लीवर को बीमार बना सकता है।
बचाव ही एकमात्र उपचार
कोरोना वायरस से निबटने के लिए कई जगहों पर प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी कोई सीधी काट नहीं मिल सकी है। यही कारण है कि संक्रमण से बचाव ही कोरोना से बचने का सही रास्ता हो सकता है। इसके लिए जितना संभव हो, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की कोशिश की जानी चाहिए। समय-समय पर सेनिटाइजर, हैंड रब या साबुन से हाथ अच्छी तरह रगड़कर 20 सेकंड तक धुलते रहना चाहिए। घर से बाहर जाने पर वापस आने के बाद हाथों को अवश्य धुलें। हाथ मिलाने, गले मिलने की बजाय दूर से ही बात करना बेहतर है। इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग यानी लगभग तीन फीट की दूरी से ही किसी से बात करनी चाहिए।