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सहकर्मी पर काम का बोझ डालना, खुदकुशी के लिए उकसाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 27 Jun 2018 11:25 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में एक सरकारी अधिकारी को बरी करते हुए उनके खिलाफ दायर एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत का कहना है कि यह मामला तभी बनता है, जब कोई जान बूझकर किसी को अपनी जिंदगी समाप्त कर लेने के लिए उकसाता है। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद के शिक्षा निदेशालय (डीओई) के आरोपी अधिकारी की याचिका पर यह फैसला दिया। पिछले साल उस अधिकारी पर अपने अधीनस्थ कर्मी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा था।
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बांबे हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार कर दिया था। पीड़ित की पत्नी ने एफआईआर में आरोप लगाया था कि उनके पति पर डीओई अधिकारी ने बहुत ज्यादा काम लाद दिया था और किसी भी वक्त उन्हें बुला लेते थे। उनका एक महीने का वेतन भी रोक दिया गया था। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध मानने के लिए ये तथ्य पर्याप्त नहीं हैं।
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यदि जान बूझकर ऐसी कोई परिस्थिति बनाई जाती है, जिसमें कोई व्यक्ति आत्महत्या के लिए बाध्य हो जाता है, तभी आरोपी व्यक्ति पर आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) का मामला बनता है। एफआईआर में लगाए गए आरोप अपर्याप्त हैं और इस आधार पर धारा 306 लगाने का औचित्य नहीं बनता।
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