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विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा: दुनिया की फार्मेसी के रूप में बढी भारत की प्रतिष्ठा, 72 देशों को मेड-इन-इंडिया वैक्सीन दी
Thu, 18 Mar 2021 04:21 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 18 Mar 2021 04:21 AM IST
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संसद में विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर
- फोटो : ANI
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विदेशमंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को राज्यसभा और लोकसभा में बताया कि वैश्विक महामारी के बीच विभिन्न देशों तक पहुंच ने ‘दुनिया की फार्मेसी’ के तौर पर भारत की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है। उन्होंने बताया कि हमने 72 देशों को मेड-इन-इंडिया वैक्सीन की आपूर्ति की है।
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देश की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल उन्होंने कहा कि यह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी परंपरा पर आधारित है। यह भारत की बढ़ती क्षमताओं का मानवता के लिए उपयोग करने की सरकार की सोच पर आधारित है। कैरिबियाई देशों से लेकर प्रशांत द्वीपीय देशों तक संदेश स्पष्ट है कि भारत के प्रधानमंत्री न केवल इन सभी देशों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़ना चाहते हैं बल्कि ठोस विकास कार्यक्रमों को समर्थन देना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि मानव केंद्रित वैश्विक सहयोग की सोच भारत के ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान का प्रेरक तत्व है। कोविड-19 महामारी का जब संकट काफी ज्यादा था तब भी हमारी दवा और चिकित्सा क्षमता की दुनियाभर में मांग थी। अगर हम उन मांगों को पूरा कर सके, तो यह कोविड-19 के संदर्भ में हमारी क्षमताओं को मजबूत बनाने के कारण हो सकी।
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विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2020 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में डिजिटल माध्यम से अपने संबोधन में आश्वासन दिया था कि भारत की वैक्सीन उत्पादन और आपूर्ति क्षमता का उपयोग इस संकट से निपटने में पूरी मानवता के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने वैक्सीन की आपूर्ति के लिए शीत शृंखला और भंडारण क्षमता को सुदृढ़ बनाया। वैक्सीन मैत्री पहल की योजना बनाने एवं कार्यान्वयन करते हुए हमने वैश्विक समाज के समक्ष उत्पन्न इस कठिन समय में कदम बढ़ाने की प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।
उन्होंने कहा कि हमारी क्षमताओं के देश से बाहर भी फायदे भी हुए। भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, पैरासिटामोल एवं अन्य दवाओं की जरूरतों को पूरी दुनिया में पूरा करने का प्रयास किया। कोविड-19 महामारी जैसी वैश्विक चुनौती के दौर में भी प्रधानमंत्री मोदी ने ‘प्रगाढ़ मित्रता’ को लेकर जो कदम उठाए उससे भारत का दुनिया में कद ऊंचा हुआ है और देश के प्रति सद्भाव की भावना पैदा हुई। इस दौरान दुनिया ने न सिर्फ भारत की ‘लोक केंद्रित कूटनीति’ और निस्वार्थ सेवाभाव को देखा बल्कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को लेकर उसकी क्षमता का भी पता लगा।
उन्होंने कहा कि भारत में टीके की उपलब्धता और घरेलू मांगों का आकलन करने के बाद ‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना के अनुरूप अब तक 72 देशों को कोविड-19 रोधी टीका उपलब्ध कराया गया है और कोरोना काल में दवाई से लेकर मास्क और पीपीई किट तक कई देशों को मुहैया कराए गए हैं। उन्होंने वैक्सीन मैत्री अभियान के तहत मालदीव, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मॉरीशस सहित खाड़ी देशों, कैरिबियाई देशों, अफ्रीकी देशों और प्रशांत द्वीपीय देशों को टीका भेजने का जिक्र किया।