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BSF का अधिकार बढ़ा: टीएमसी ने दिनहाटा उपचुनाव में उछाला मुद्दा, संसदीय समिति भी मामला उठाने को तैयार

Thu, 21 Oct 2021 02:51 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 21 Oct 2021 02:51 PM IST
सार

दिनहाटा विधानसभा क्षेत्र तीन तरफ से बांग्लादेश की सीमा से घिरा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस ने बीएसएफ को 50 किलोमीटर के दायरे तक मिले पूछताछ और गिरफ्तारी के नए नियम को यहां चुनावी मुद्दा बना दिया है। 
 

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extending bsf territorial jurisdiction tmc made an issue in dinhata by-election, parliamentary committee also to take up issue
bsf - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्यों बंगाल, असम और पंजाब में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का दायरा बढ़ाने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है। केंद्र के इस फैसले का पंजाब और बंगाल में विरोध चल रहा है। एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को उपचुनाव में उछाल दिया है। वहीं दूसरी तरफ बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने के नरेंद्र मोदी सरकार के हालिया फैसले को लेकर गृह मंत्रालय पर संसद की स्थायी समिति को भी इस मुद्दे को उठाने के लिए राजी कर लिया है।  
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केंद्र सरकार के फैसले से पंजाब, बंगाल और असम में बीएसएफ को भारतीय इलाके में 50 किमी अंदर तक कार्रवाई का अधिकार मिल गया है। पहले यह दायरा 15  किलोमीटर तक था। केंद्र सरकार ने बीएसएफ एक्ट में संशोधन किया है, जिसके बाद बीएसएफ को पश्चिम पंजाब, और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा अब स्थानीय लोगों को सूचित किए बिना तलाशी लेने और गिरफ्तार करने का अधिकार मिला है। पाकिस्तान की सीमा पर बीएसएफ के करीब 2 लाख 65 हजार जवान और बांग्लादेश से लगी सीमा पर छह हजार 300 से ज्यादा जवान पहरा देते हैं।
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तृणमूल कांग्रेस नरेंद्र मोदी सरकार के विरोध करने का एक भी मौका अपने हाथ से छोड़ना नहीं चाहती है। इसी क्रम में वह इस फैसले का भी पुरजोर विरोध कर रही है। पार्टी केंद्र सरकार के इस फैसले को संघवाद की भावना के खिलाफ मानती है। बीते दिनों पश्चिम बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम ने एक बयान में कहा कि बीएसएफ के लिए पहले 15 किलोमीटर का दायरा बहुत था लेकिन ऐसा लग रहा है कि दायरे को बढ़ाकर मोदी सरकार सब कुछ पर अपना कब्जा करना चाहती है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी इसे संघीय ढांचे पर हमला बताया है। 
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पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम - फोटो : social media
हालांकि बीएसएफ का कहना है कि इससे सीमा पार से होने वाले अपराधों पर रोक लगेगी। हालांकि पाकिस्तान की सीमा गुजरात से भी लगती है, लेकिन यहां दायरा 80 किमी से घटाकर 50 किमी कर दिया गया है। जबकि राजस्थान में यह दायरा बरकरार है। 

दिनहाटा विधानसभा में में उठ गया मुद्दा
केंद्र सरकार पर हर तरह से दबाव बनाने के लिए पार्टी ने उपचुनाव में इसे मुद्दा बना दिया है। टीएमसी को नए नियम पर आपत्ति इसलिए भी है कि 30 अक्तूबर को जिन चार सीटों पर उपचुनाव होने हैं उसमें तीन सीटों में दिनहाटा पूरी तरह और शांतिपुर और गोसाबा आशिंक तौर पर उस दायरे में आता है जहां बीएसएफ को 50 किलोमीटर तक के दायरे में पूछताछ और गिरफ्तारी का अधिकार मिला है। 

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान मंत्री फिरहाद हकीम ने बीएसएफ का अधिकार दायरा बढ़ाए जाने को लेकर मोदी और शाह की तुलना गब्बर सिंह से कर दी। फिरहाद हकीम ने उत्तरी बंगाल में कूचबिहार जिले के दिनहाटा में टीएमसी उम्मीदवार के लिए प्रचार करते हुए कहा, “यह ऐसा है जैसे 50 किलोमीट दूर भी कोई बच्चा रोता है तो माताएं अपने बच्चों को सो जाने के लिए कहती हैं,  नहीं तो गब्बर आ जाएगा।” इसी तरह वह बीएसएफ की मदद से अब कूचबिहार पर शासन करना चाहते हैं। अब ग्रामीणों को परेशान करने के लिए बीएसएफ पचास किलोमीटर तक आ जाएगी।" टीएमसी ने यहां उदयन गुहा को अपना  उम्मीदवार बनाया है।
 

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टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार - फोटो : एएनआई
आधा बंगाल बीएसएफ के दायरे में
बताया जा रहा है कि  कल यानी बुधवार को हुई समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाने के लिए समिति को राजी कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक टीएमसी ने बैठक में कहा कि नए नियम से आधा बंगाल बीएसएफ के दायरे में आ गया है जिसमें 42 लोकसभा क्षेत्र और 10 जिले शामिल हैं। 

टीएमसी ने समिति के सामने यह भी मुद्दा उठाया कि बांग्लादेश से बंगाल की सबसे लंबी सीमा मिलती है लेकिन इससे केंद्र को राज्य के अंदर काम करने की इजाजत मिल गई है, जबकि यह काम कानून व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों का है। 

सूत्रों ने बताया कि समिति पहले से ही तटीय सुरक्षा पर चर्चा कर रही है।  इसलिए बताया जा रहा है कि समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा इस मुद्दे के साथ सीमा प्रबंधन को भी जोड़ने के लिए सहमत हो गए हैं। समिति ने इस संदर्भ में राज्यों और केंद्र सरकार से जानकारी तलब की है। यह समिति हाल ही में गठित हुई है। 31 सदस्यीय समिति में बंगाल के चार वरिष्ठ सदस्य हैं, जिनमें टीएमस की काकोली घोष दस्तीदार और डेरेक ओ ब्रायन, कांग्रेस से अधीर रंजन चौधरी और भाजपा से दिलीप घोष शामिल हैं। 

 

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : PTI
संसद के शीतकालीन सत्र में भी उठेगा मुद्दा
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने यह भी बताया है कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में यह मुद्दा गरमा सकता है, क्योंकि सरकार के लिए इस फैसले की अधिसूचान दोनों सदनों में जारी करना अनिवार्य है। विपक्षी हलकों में चर्चा इस बात की भी है कि विपक्ष एक प्रस्ताव ला सकता है। 

तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने बताया कि हम जानते हैं कि संख्याबल सरकार के पक्ष में ही होगा, लेकिन विरोध जताना हमारा अधिकार है। ऐसा लग रहा है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत नहीं पाई, भवानीपुर में हमारी पार्टी अध्यक्ष को हरा नहीं पाई तो अप्रत्यक्ष तरीके से यहां घुसने की कोशिश कर रही है।  



 
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