संसद हमले की बरसी पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व कर्मी निकालेंगे मौन जुलूस, केंद्र को दिया 90 दिन का अल्टीमेटम
13 दिसंबर यानी संसद हमले के दिन देश की राजधानी में शांतिपूर्वक मौन जुलूस निकाला जाएगा। ये जुलूस राजघाट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक जाएगा। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व कर्मी और मौजूदा कर्मियों के परिजन राष्ट्रपति को ज्ञापन देंगे। इन मांगों में वन रैंक वन पेंशन, पुरानी पैंशन व्यवस्था बहाली, राज्यों में अर्धसैनिक बलों के परिवारों के कल्याणार्थ पूर्व कर्मियों को एक्स-सर्विस मैन का दर्जा देने एवं अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन करना आदि शामिल हैं...
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व कर्मियों ने अपनी मांगें पूरी कराने के लिए सरकार को 90 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया है। अगर इस अवधि में इन बलों की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है तो 13 दिसंबर यानी संसद हमले के दिन देश की राजधानी में शांतिपूर्वक मौन जुलूस निकाला जाएगा। ये जुलूस राजघाट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक जाएगा। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व कर्मी और मौजूदा कर्मियों के परिजन राष्ट्रपति को ज्ञापन देंगे। इन मांगों में वन रैंक वन पेंशन, पुरानी पैंशन व्यवस्था बहाली, राज्यों में अर्धसैनिक बलों के परिवारों के कल्याणार्थ पूर्व कर्मियों को एक्स-सर्विस मैन का दर्जा देने एवं अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन करना आदि शामिल हैं। इन मांगों को 14 सितंबर को एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय को भी अवगत करा दिया ह
लंबे समय से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के साथ हो रहा है भेदभाव
पूर्व-अर्धसैनिक बल कल्याण संघ संस्था (कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन) के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि लंबे समय से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के साथ भेदभाव हो रहा है। लंबे समय से चली आ रही वन रैंक वन पेंशन, पुरानी पैंशन बहाली व अन्य जायज मांगें को लेकर एसोसिएशन ने तकरीबन हर स्तर पर एक नहीं, बल्कि दर्जनों बार ज्ञापन दिया है। अब 13 दिसंबर को बापू के समाधि स्थल 'राजघाट' पर शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन भी नहीं किया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय 23 नवम्बर 2012 को इस बाबत आफिस मैमोरेंडम जारी कर चुका है। केंद्र सरकार को पर्याप्त समय भी दिया गया है। तय अवधि में अगर मांग पूरी नहीं होती हैं तो इस बार महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन देंगे।
2004 से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पेंशन व्यवस्था बंद
रणबीर सिंह के अनुसार पूरे देश की चाक-चौबंद पहरेदारी, सड़क से लेकर संसद व सरहदों तक केंद्रीय अर्धसैनिक बल बखूबी तरीके से निभा रहे हैं। केंद्र सरकार में बैठे लोग विशेष मौकों वन रैंक वन पेंशन देने का अकसर ढिंढोरा पीटते हैं जबकि 2004 से इन बलों की पैंशन बंद है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सीपीसी कैंटीन वोकल से लोकल कर दी गई। जीएसटी के चलते यहां पहले ही बाजार भाव पर सामान मिलता है। लेकिन यहां भी भेदभाव किया जा रहा है। सेना की सीएसडी कैंटीन में जीएसटी की छूट है, मगर सीपीसी कैंटीन पर इस तरह की कोई छूट नहीं दी जाती। इस विषय में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जा चुका है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से देश में एक सर्वेक्षण कराने की मांग की गई थी कि जहां अर्धसैनिक बलों के जवान व उनके परिवार बहुतायत संख्या में निवास करते हैं, वहां सीजीएचएस डिस्पेंसरी का विस्तार किया जाए। जैसे नारनौल, रेवाड़ी, भिंड, मुरैना, गाजीपुर व बलिया आदि इलाकों में अगर ये डिस्पेंसरी सुविधा शुरू होती है तो जवानों व परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।
सफेद हाथी सिद्ध हो रहा है पुनर्वास बोर्ड
संस्था ने अर्धसैनिक परिवारों की भलाई के लिए बनाए गए वेलफेयर एंड रिहेबिलिटेशन बोर्ड को एक सफेद हाथी बताया है। रणबीर सिंह का कहना है कि इस बोर्ड का बलों के कल्याण से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। एक अवसर को छोड़कर आज तक केंद्रीय स्तर पर इसकी कोई बैठक सरहदी बुजुर्गों के साथ नहीं हुई। डीजी सीआरपीएफ वार्ब चेयरमैन हैं लेकिन उन्हें नहीं पता कि वार्ब सैक्रेटरी कौन है। इस बात का पता उस वक्त लगा, जब एसोसिएशन ने वार्ब मीटिंग बुलाने के लिए डीजी से अनुरोध किया था। रणबीर सिंह बताते हैं कि हमारी संस्था ने अनेकों बार प्रधानमंत्री कार्यालय में मुलाकात की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक बुलावा नहीं आया।