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भारत-चीन सीमा विवाद: पूर्व विदेश सचिव ने पड़ोसी देश पर साधा निशाना, बोले- दुनिया के सामने खुद को पीड़ित बताना चीन की चाल
Wed, 04 Aug 2021 06:40 PM IST
अभिषेक दीक्षित
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 04 Aug 2021 06:40 PM IST
सार
पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने अपनी नई किताब 'द लॉन्ग गेम: हाउ द चाइनीज नेगोशिएट विद इंडिया' में चीन की चाल के बारे में बताया है। इसमें छह ऐतिहासिक घटनाओं के जरिए भारत-चीन संबंधों के बारे में बताया गया है।
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पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले
- फोटो : ANI
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विस्तार
पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा है कि चीन समय के साथ छेड़छाड़ करने में माहिर है। इसके साथ ही खुद को पीड़ित के रूप में दुनिया के सामने लाना भी उसकी चाल का एक हिस्सा है। गोखले का कहना है कि चीन की रणनीति दोनों पक्षों की स्थिति और ताकत के आधार पर तय होती है। हम उन तरीकों को ध्यान में रखकर चीन की चाल को समझ सकते हैं, जिससे वह बाहरी दुनिया के साथ डील करता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि चीन साथ बातचीत की तैयारी में भारतीय वार्ताकारों के लिए इन्हें याद रखना अच्छा होगा। गोखले ने अपनी नई किताब 'द लॉन्ग गेम: हाउ द चाइनीज नेगोशिएट विद इंडिया' में यह टिप्पणी की है, जो छह ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से दोनों देशों के संबंधों के बारे में बताती है। उनकी टिप्पणी पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध के बीच आई है।
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उन्होंने सुझाव दिया कि चीन साथ बातचीत की तैयारी में भारतीय वार्ताकारों के लिए इन्हें याद रखना अच्छा होगा। गोखले ने अपनी नई किताब 'द लॉन्ग गेम: हाउ द चाइनीज नेगोशिएट विद इंडिया' में यह टिप्पणी की है, जो छह ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से दोनों देशों के संबंधों के बारे में बताती है। उनकी टिप्पणी पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध के बीच आई है।
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गोखले ने अपनी किताब में 4 अहम बातें कहीं
1. पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित किताब में कहा गया है कि चीन समय में हेरफेर करने में माहिर है। यदि वार्ताकार चीनी मांगों के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं है, तो वे चीन के लंबे इतिहास और धैर्य दिखाने की उनकी क्षमता का हवाला देकर शुरुआत करते हैं।
2. गोखले ने लिखा कि चीन हमेशा वार्ता के लिए एजेंडा निर्धारित करने की कोशिश करेगा और वार्ता की दिशा निर्धारित करने के लिए हर जरूरी प्रयास करेगा। अहम विषयों पर चर्चा करने से बचने के लिए चीन तरह-तरह के हथकंडे अपनाता है। वह चीनी वार्ताकार को समय से पहले अपनी स्थिति का खुलासा करने के लिए भी मजबूर कर सकता है।
3. उन्होंने सुझाव दिया कि दूसरे पक्ष के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह वार्ता में अपने हित के मुद्दों को उठाए, भले ही ये औपचारिक एजेंडे में न हों। चीन को यह संदेश देना जरूरी है कि दूसरे पक्ष के समान हित हैं और अपने मुद्दों को चर्चा में रखने का अधिकार भी है। उनका यह भी मानना है कि चीनी पक्ष किसी भी विवादास्पद मुद्दे पर विस्तार से निपटने से पहले नियमित रूप से सिद्धांतों का पालन करने की प्रथा का पालन करता है।
4. उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष को चीन द्वारा प्रस्तावित सिद्धांतों की बारीकी से जांच करनी चाहिए और चीन पर इस तरह से बातचीत का दबाव बनाना चाहिए, जो उनके सिद्धांतों को सीमित कर सके और चीनी पक्ष को किसी भी मुद्दे पर भारत की स्थिति को बाधित करने की अनुमति न दे।
2. गोखले ने लिखा कि चीन हमेशा वार्ता के लिए एजेंडा निर्धारित करने की कोशिश करेगा और वार्ता की दिशा निर्धारित करने के लिए हर जरूरी प्रयास करेगा। अहम विषयों पर चर्चा करने से बचने के लिए चीन तरह-तरह के हथकंडे अपनाता है। वह चीनी वार्ताकार को समय से पहले अपनी स्थिति का खुलासा करने के लिए भी मजबूर कर सकता है।
3. उन्होंने सुझाव दिया कि दूसरे पक्ष के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह वार्ता में अपने हित के मुद्दों को उठाए, भले ही ये औपचारिक एजेंडे में न हों। चीन को यह संदेश देना जरूरी है कि दूसरे पक्ष के समान हित हैं और अपने मुद्दों को चर्चा में रखने का अधिकार भी है। उनका यह भी मानना है कि चीनी पक्ष किसी भी विवादास्पद मुद्दे पर विस्तार से निपटने से पहले नियमित रूप से सिद्धांतों का पालन करने की प्रथा का पालन करता है।
4. उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष को चीन द्वारा प्रस्तावित सिद्धांतों की बारीकी से जांच करनी चाहिए और चीन पर इस तरह से बातचीत का दबाव बनाना चाहिए, जो उनके सिद्धांतों को सीमित कर सके और चीनी पक्ष को किसी भी मुद्दे पर भारत की स्थिति को बाधित करने की अनुमति न दे।
चीनी नाटकों से सावधान रहने को कहा
इन तर्कों पर विस्तार से गोखले का कहना है कि विशेष रूप से विवादास्पद या महत्वपूर्ण मुद्दों पर दो तरह के चीनी नाटकों से सावधान रहना जरूरी है। पहला- वे यथासंभव लंबे समय तक इस पर चर्चा के लिए मना करते रहें और और ऐसा करते हुए सभी विकल्पों को टेबल पर रख देंगे। दूसरा- वे पूरे मामले पर चुप्पी साधे रहेंगे।
किताब में इन छह घटनाओं का जिक्र
किताब में भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों में इन छह महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में बताया गया है- 30 दिसंबर 1949 को चीन को भारत की मान्यता, 29 अप्रैल 1954 को चीन के तिब्बत क्षेत्र और भारत के बीच व्यापार समझौता, 11 अप्रैल 2005 को चीन द्वारा सिक्किम को भारत के हिस्से के रूप में औपचारिक मान्यता, 2008 में 123 परमाणु समझौते पर भारत-चीन राजनयिक वार्ता और 1 मई 2019 को यूएनएससी 1267 प्रतिबंध सूची में मसूद अजहर को आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करना।