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गंगा तट पर बसी काशी भी है प्यासी

Wed, 23 Mar 2016 03:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 23 Mar 2016 03:34 AM IST
सार

  • शहर के लोगों को रोजमर्रा की जरूरत भर पानी भी नसीब नहीं
  • प्रधानमंत्री का गांव नागेपुर भी डार्क जोन में, खेती पर छाया संकट

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Even after Ganga no water for people in Kashi
पानी की समस्या - फोटो : demo

विस्तार

गंगा तट पर बसी काशी की एक बड़ी आबादी पानी के जबरदस्त संकट से जूझ रही है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि न तो शहर के लोगों को रोजमर्रा की जरूरत भर पानी मिल पा रहा है और न ही गांव के लोगों को खेत सींचने भर। भूजल स्तर के लगातार नीचे जाने से हालात चिंताजनक हैं। 

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वाराणसी के आठ में से सात विकास खंडों में भूजल संकट है। इसमें वह गांव नागेपुर भी शामिल है, जिसे पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है। नागेपुर गांव आराजीलाइन विकास खंड का हिस्सा है। यहीं पास के गांव मेहंदीगंज में एक शीतल पेय कंपनी का प्लांट है।
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गांव के लोगों का कहना है कि जब से यह कंपनी आई है, पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। कंपनी अपने प्लांट के लिए भूजल का जबर्दस्त दोहन कर रही है। यही कारण है कि खेत की सिंचाई छोड़िए अब तो हलक तर करने भर पानी का भी गर्मियों में संकट हो जाता है। पूरा इलाका सालों पहले डार्क जोन घोषित हो चुका है। आराजी लाइन विकास खंड से सटा हरहुआ और पिंडरा विकास खंड भी पानी की किल्लत झेल रहा है।

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एक आदमी को एक दिन में चाहिए 135 लीटर पानी

Even after Ganga no water for people in Kashi
पेयजल संकट - फोटो : अमर उजाला

135 लीटर पानी एक आदमी की रोजमर्रा की जरूरत है मगर यहां उसे मिलता है मात्र 80 लीटर पानी। बनारस शहर की बात करें तो यहां की आबादी के लिहाज से रोजाना 276 एमएलडी पानी की जरूरत है मगर 146 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो पाती है।

रोजाना 356 एमएलडी पानी गंगा और अन्य नलकूपों से लिया जाता है। शोधन के बाद उसकी आपूर्ति होती है लेकिन इसमें से 194 एमएलडी पानी रोजाना बरबाद हो जा रहा है।

वजह, जर्जर भूमिगत पाइप लाइनें। सालों पहले बिछाई गई पाइप लाइन के जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के चलते पानी बरबाद हो रहा है।

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