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असम में एनकाउंटर: दो माह में 12 अपराधियों को मार गिराया, विपक्ष का आरोप-पुलिस हुई 'क्रूर'

Sun, 04 Jul 2021 07:03 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, गुवाहाटी
पीटीआई, गुवाहाटी Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 04 Jul 2021 07:03 PM IST
सार

राज्य में हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में नई भाजपा सरकार बनने के बाद अपराधियों पर शिकंजा कस दिया गया है। हालांकि इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है। 
 

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Encounter in Assam: 12 criminals killed in two months, opposition alleges- police became brutal
फायरिंग(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay

विस्तार

असम में दो महीने से भी कम समय में हिरासत से 'भागने की कोशिश' करने पर कम से कम एक दर्जन संदिग्ध उग्रवादियों और अपराधियों को मार गिराया गया है। इस तरह की मुठभेड़ों की बढ़ती संख्या को लेकर राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है।

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10 मई को नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से ऐसी घटनाओं की संख्या में वृद्धि को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्त्व वाली सरकार में असम पुलिस "क्रूर" हो गई है।
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अपराधियों ने मजबूर किया : डीजीपी 
हालांकि, असम पुलिस ने इस आरोप का खंडन करते हुए दावा किया है कि उग्रवादियों और अपराधियों ने ही उसके कर्मियों को गोलियां चलाने पर मजबूर किया था। विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने पीटीआई से चर्चा में कहा कि पिछले कुछ महीनों में जब अपराधियों ने हिरासत से भागने की कोशिश की तो पुलिस मुठभेड़ों या गोलीबारी में लगभग 12 मौतें हुई हैं। उनमें से छह संदिग्ध दीमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी (डीएनएलए) के उग्रवादी और यूनाइटेड पीपुल्स रिवोल्यूशनरी फ्रंट (यूपीआरएफ) के दो कथित विद्रोही हैं, जो कार्बी आंगलोंग जिले में पुलिस के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे।
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उन्होंने बताया कि धेमाजी, नलबाड़ी, शिवसागर और कार्बी आंगलोंग जिलों में अलग-अलग मुठभेड़ों में चार अन्य संदिग्ध अपराधी मारे गए। कई अपराधियों ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों की सर्विस पिस्तौल छीन ली थी, जिसके बाद उन पर गोलियां चलानी पड़ीं। कुछ मुठभेड़ तब हुई जब पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया और कुछ ने भागने की कोशिश की। जब इन उग्रवादियों और अपराधियों ने हिरासत से भागने का प्रयास किया तो पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी। केवल वे ही बता सकते हैं कि उन्होंने भागने की कोशिश क्यों की।

नई सरकार को खुश करने पुलिस कर रही यह काम : सैकिया
मुठभेड़ों में इजाफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया ने दावा किया कि असम पुलिस अपनी कमी को छिपाने और नई सरकार को खुश करने के लिए ऐसा कर रही है। उन्होंने कहा कि जब अपराधी पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करते हैं, तो यह पुलिस की ढिलाई है। अपराधियों को अपराध दृश्य की पुनर्रचना के लिए ले जाया जाता है और वे भागने की कोशिश करते हैं। यह अब एक नियमित मामला बन गया है। ऐसा लगता है कि असम पुलिस क्रूर हो रही है। 


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पुलिस नई सरकार के सामने खुद को साबित करने की कोशिश कर रही है लेकिन अगर वह अपना काम ठीक से कर पाती तो इस तरह के हथकंडे की जरूरत नहीं पड़ती। रायजोर दल के प्रमुख और विधायक अखिल गोगोई ने भी आरोप लगाया कि मुठभेड़ के नाम पर पुलिस द्वारा 'सरेआम हत्या' की जा रही है।

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