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CAA: एम्पावर्ड कमेटी सीएए के तहत नागरिकता चाहने वालों के आवदेनों पर लेगी फैसला, जनसंख्या निदेशक होंगे प्रमुख

Tue, 12 Mar 2024 02:27 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 12 Mar 2024 02:27 AM IST
सार

एम्पावर्ड कमेटी में छह सदस्य होंगे जिनमें से पांच केंद्र की ओर से जबकि एक राज्य से होगा। हालांकि बैठक के लिए कोरम पूरा करने के लिए सिर्फ दो सदस्यों की उपस्थिति जरूरी होगी।

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Empowered Committee Census Operations Director to decide on applications seeking Indian citizenship under CAA
गृह मंत्रालय - फोटो : फाइल

विस्तार

भारत सरकार ने देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू कर दिया है। सीएए के तहत नागरिकता चाहने वालों के आवदेनों पर फैसला लेने के लिए एम्पावर्ड कमेटी बनाई जाएगी, इसके प्रमुख राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों के जनसंख्या निदेशक होंगे। कमेटी के सदस्यों का चुनाव खुफिया ब्यूरो, फॉरर्नर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस, पोस्ट ऑफिस के अधिकारियों और राज्य सूचना अधिकारियों में से किया जाएगा। कमेटी में छह सदस्य होंगे जिनमें से पांच केंद्र की ओर से जबकि एक राज्य से होगा। हालांकि बैठक के लिए कोरम पूरा करने के लिए सिर्फ दो सदस्यों की उपस्थिति बहुत होगी।
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सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदनों पर निर्णय लेने वाली अधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee) की अध्यक्षता निदेशक (जनगणना संचालन) करेंगे और इसमें सात अन्य सदस्य होंगे। समिति के सदस्यों में इंटेलिजेंस ब्यूरो, विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरपीओ), डाकघर और राज्य सूचना विज्ञान के अधिकारी शामिल होंगे। निर्णय लेने के लिए समिति की बैठक में अध्यक्ष सहित दो सदस्य का शामिल होना जरूरी होगा।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को सीएए लागू करने की अधिसूचना जारी की। कानून बनने के चार साल दो महीने के लंबे इंतजार के बाद इसे लागू किए जाने के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए बिना दस्तावेज वाले अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में एक रैली में कहा था कि सीएए देश का कानून है, इसे लागू होने से कोई नहीं रोक सकता।
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केंद्र सरकार अब तीन देशों से 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारत की नागरिकता देना शुरू कर देगी। इन गैर-मुस्लिमों में हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध व ईसाई शामिल हैं। हालांकि असम के कार्बी आंगलांग और कोकराझार समेत तीन आदिवासी बहुल जिलों को सीएए से बाहर रखा गया है। इन जिलों के आदिवासियों का कहना है, यदि उनके इलाके में बांग्लादेश से आए बांग्लाभाषी हिंदुओं को नागरिकता दी गई, तो संसाधनों का बंटवारा होगा।

सीएए से जुड़े विधेयक को संसद ने 2019 में पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी। इसके जरिये नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। इसमें नागरिकता के लिए पात्रता मानदंडों में बदलाव किया गया है।


पीड़ित शरणार्थियों को मिलेगा सम्मान
  • पुनर्वास और नागरिकता की कानूनी बाधाएं दूर होंगी।
  • दशकों से पीड़ित शरणार्थियों को सम्मानजनक जीवन का मौका मिलेगा।
  • सांस्कृतिक, सामाजिक व भाषाई पहचान की रक्षा होगी।
  • आर्थिक, व्यावसायिक, मुक्त आवाजाही, संपत्ति खरीदने जैसे अधिकार सुनिश्चित होंगे।  

सरकार ने कहा, किसी भी भारतीय की नहीं जाएगी नागरिकता
  • सीएए नागरिकता देने का कानून है, इससे किसी भी भारतीय की नागरिकता नहीं जाएगी, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।
  • यह कानून केवल उनके लिए है, जिन्होंने वर्षों से उत्पीड़न सहन किया और जिनके पास भारत के अलावा और कोई जगह नहीं है।
  • भारत का संविधान सरकार को अधिकार देता है कि मानवतावादी दृष्टिकोण से धार्मिक शरणार्थियों को मूलभूत अधिकार मिले और ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सके।
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