{"_id":"59af95254f1c1ba7078b4827","slug":"eminent-journalist-gauri-lankesh-was-an-activist","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ताउम्र अपनी कलम से विरोध का स्वर उठाती रहीं गौरी लंकेश ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
ताउम्र अपनी कलम से विरोध का स्वर उठाती रहीं गौरी लंकेश
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Wed, 06 Sep 2017 02:37 PM IST
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गौरी लंकेश
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पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या ने पूरे देश के पत्रकारों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठा दिया है। 55 वर्षीय बंगलूरु की पत्रकार को हमलावरों ने उनके घर में घुसकर गोली मारी है। गौरी महज एक पत्रकार नहीं थी बल्कि वो पत्रकारिता के साथ एक्टिविस्ट भी थीं. व्यवस्था के खिलाफ और नेक्सलाइट के समर्थन में वो बेबाक बोला और लिखा करती थीं।
पढ़ें: वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या, हमलावरों ने घर में घुसकर मारी गोली, विरोध-प्रदर्शन शुरू
गौरी लंकेश एक पत्रकार परिवार से ताल्लुक रखती थीं उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत 1980 में की थी। उनके पिता पी लंकेश भी पत्रकार थे और भाई इंद्रजीत भी पत्रकार है। गौरी ने अपना करियर टाइम्स ऑफ इंडिया से शुरु किया था। उसके बाद लंकेश ने कई पब्लिकेशन में काम किया।
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पढ़ें: गौरी लंकेश मर्डर: CM ने SIT को दिए जांच के आदेश, गृह मंंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
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गौरी लंकेश एक पत्रकार परिवार से ताल्लुक रखती थीं उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत 1980 में की थी। उनके पिता पी लंकेश भी पत्रकार थे और भाई इंद्रजीत भी पत्रकार है। गौरी ने अपना करियर टाइम्स ऑफ इंडिया से शुरु किया था। उसके बाद लंकेश ने कई पब्लिकेशन में काम किया।
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फेक न्यूज के खिलाफ अभिय़ान चला रही थीं गौरी
गौरी लंकेश
कुछ वर्षों तक दिल्ली मे रहने के दौरान गौरी ने संडे मैग्जीन,तेलेगू टीवी चैनल में भी काम किया। फिलहाल गौरी अपने पिता की शुरू की गई कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका लंकेश की संपादक थीं। कन्नड़ पत्रकारिता में लंकेश पत्रिका ने एक मुकाम हासिल कर रखा है। अगर कुछ भी इस पत्रिका में छप जाता उसपर लोग विश्वास करते हैं। चूंकि पत्रिका को विज्ञापन नहीं मिलता था इसलिए इस पत्रिका की फंडिग 50 लोग मिलकर करते आ रहे हैं।
देश के बदलते माहौल और एक खास विचारधारा पर वो अपनी कलम से बार-बार विरोध का स्वर उठाती रही थीं। गौरी उस समय 2008 में तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने एक नेता के खिलाफ खुलकर लिखना शुरू किया, उस नेता ने गौरी के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया। इस मामले में गौरी को छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई। गौरी को उसी दिन बेल मिल गई थी लेकिन अब जंग के और तेजी से चलने का रास्ता साफ हो गया था।
उन्हें लंबे समय से जान से मारने की धमकी मिल रही थी। गौरी सोशल मीडिया पर भी खुलकर विचार रखती थीं। उन्होंने हाल ही में फेक न्यूज और उसके प्रोपेगेंडा पर जम कर लिखा, जिसके बाद वो विरोधियों की नजरों में आ गई थीं। वहीं उन्होंने अपने स्टेटस पर लिखा कि "हम सभी जानते हैं कि हमारा बड़ा दुश्मन कौन है, क्या हम उसपर अपना ध्यान लगा सकते है।" उन्होंने अपने पोस्ट में कॉमरेड को शांत रहने तक का संदेश दिया था।
देश के बदलते माहौल और एक खास विचारधारा पर वो अपनी कलम से बार-बार विरोध का स्वर उठाती रही थीं। गौरी उस समय 2008 में तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने एक नेता के खिलाफ खुलकर लिखना शुरू किया, उस नेता ने गौरी के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया। इस मामले में गौरी को छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई। गौरी को उसी दिन बेल मिल गई थी लेकिन अब जंग के और तेजी से चलने का रास्ता साफ हो गया था।
उन्हें लंबे समय से जान से मारने की धमकी मिल रही थी। गौरी सोशल मीडिया पर भी खुलकर विचार रखती थीं। उन्होंने हाल ही में फेक न्यूज और उसके प्रोपेगेंडा पर जम कर लिखा, जिसके बाद वो विरोधियों की नजरों में आ गई थीं। वहीं उन्होंने अपने स्टेटस पर लिखा कि "हम सभी जानते हैं कि हमारा बड़ा दुश्मन कौन है, क्या हम उसपर अपना ध्यान लगा सकते है।" उन्होंने अपने पोस्ट में कॉमरेड को शांत रहने तक का संदेश दिया था।