फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Eleven states and Union Territories including Goa and Jammu and Kashmir no functional eye banks

EYE BANK: देश के ग्यारह राज्यों में नहीं नेत्र बैंक, कोविड-19 में आई डोनेट करने वालों की संख्या में हुआ इजाफा

Tue, 04 Oct 2022 11:49 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Tue, 04 Oct 2022 11:49 PM IST
सार

अधिक आबादी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जागरूकता और नेत्र बैंकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। अंडमान और निकोबार, द्वीप समूह, दमन और दीव जैसे राज्यों की आबादी कम होने की वजह से भी नेत्र बैंक की स्थापना कर पाना आसान नहीं है।

विज्ञापन
Eleven states and Union Territories including Goa and Jammu and Kashmir no functional eye banks
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

गोवा और जम्मू-कश्मीर समेत देश के ग्यारह राज्यों में नेत्र बैंक की सुविधा नहीं है। कोविड-19 के दौरान आई डोनेट करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। यह खुलासा एक आरटीआई के जवाब में हुआ है। मध्य प्रदेश के आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रशेखर गौड़ द्वारा दायर आरटीआई के जवाब के अनुसार, देश में कुल 320 नेत्र बैंक हैं। 
विज्ञापन


नेत्रदान के प्रति जागरूकता की कमी 
आकड़ों के अनुसार, त्रिपुरा, उत्तराखंड और मिजोरम में सिर्फ एक-एक कार्यात्मक नेत्र बैंक है। सबसे अधिक महाराष्ट्र में 74, उत्तर प्रदेश में 41, कर्नाटक में 32 और गुजरात में 25 नेत्र बैंक है। फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुड़गांव की  नेत्र विज्ञान विभाग की निदेशक डॉ. अनीता सेठी ने कहा कि, देश में नेत्रदान के प्रति जागरूकता की कमी है। लोगों को जानकारी नहीं है कि नेत्रदान क्या होता है। नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। उन्होंने कहा  कि अधिक आबादी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जागरूकता और नेत्र बैंकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। अंडमान और निकोबार, द्वीप समूह, दमन और दीव जैसे राज्यों की आबादी कम होने की वजह से भी नेत्र बैंक की स्थापना कर पाना आसान नहीं है। क्योंकि नेत्र बैंक चलाने के लिए स्पेक्युलर माइक्रोस्कोप जैसे उपकरणों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी की भी आवश्यकता होती है। साथ ही नेत्र बैंक चलाने के लिए पर्याप्त नेत्र दाताओं की संख्या होनी चाहिए। यह तभी संभव जब पर्याप्त आबादी हो।  
विज्ञापन


अंधेपन से करीब 25 हजार लोग प्रभावित 
आचार्य ने कहा कि राष्ट्रीय दृष्टिहीनता और दृष्टिबाधित सर्वेक्षण (2019) के अनुसार, लगभग 48 लाख लोग अंधेपन से पीड़ित हैं और मोतियाबिंद के बाद कॉर्नियल ब्लाइंडनेस दूसरा सबसे आम प्रकार का अंधापन है, जो हर साल लगभग 25,000 लोगों को प्रभावित करता है। दान की गई आंखों से केवल कॉर्नियल नेत्रहीन लोगों को लाभ होता है। कॉर्नियल ब्लाइंडनेस आंख के सामने के हिस्से को कवर करने वाले ऊतक में क्षति के कारण दृष्टि की हानि है जिसे कॉर्निया कहा जाता है। श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. मनीषा आचार्य ने कहा कि भारत में कुल 750 नेत्र बैंक हैं, लेकिन उनमें से केवल कुछ ही पूरी तरह कार्यात्मक और सुसज्जित है।  80 प्रतिशत कॉर्निया के हैं। अभी देश में नेत्र बैंकिंग नेटवर्क की आवश्यकता है। आरटीआई के जवाब के अनुसार, 2016-17 से अब तक 3,35,940 कॉर्निया संग्रह हुए हैं। इसके अलावा 2016-17 से अभी तक 1,56,419 कॉर्निया प्रत्यारोपण हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन राज्यों में नहीं नेत्र बैंक
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, गोवा, जम्मू और कश्मीर, लक्षद्वीप, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड और सिक्किम में कोई नेत्र बैंक नहीं है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed