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हाइड्रोजन चालित वाहन से संसद पहुंच रहे गडकरी: ग्रीन एनर्जी को लेकर सरकार के रुख में क्या बदलाव, क्यों अहम है मंत्री का यह कदम
Fri, 01 Apr 2022 12:17 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:17 PM IST
सार
गडकरी जिस इलेक्ट्रिक कार में बैठकर संसद पहुंचे, उससे सिर्फ ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल का संदेश ही नहीं दिया गया, बल्कि अगर वृहद परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो उनका यह कदम भारत सरकार के ग्रीन एनर्जी के विकल्पों पर बदलते रुख को भी दिखाता है।
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कैसे बैटरी चालित वाहन से हाइड्रोजन इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर शिफ्ट हो रहा सरकार का फोकस।
- फोटो : अमर उजाला/हिमांशु भट्ट
विस्तार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। उनके इस कदम की पूरे देश में चर्चा हो रही है। फिलहाल देशभर में लोग उनकी कार को लेकर पूरी जानकारी हासिल करने में जुटे हैं। हालांकि, गडकरी ने इस कार के इस्तेमाल से सिर्फ ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल का संदेश ही नहीं दिया है, बल्कि अगर वृहद परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो उनका यह कदम भारत सरकार के ग्रीन एनर्जी के विकल्पों पर बदलते रुख को भी दिखाता है।
पहले जानें- नितिन गडकरी किस गाड़ी में पहुंचे संसद?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री जापानी कंपनी टोयोटा के मिराई वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। इसमें तीन हाइड्रोजन टैंक्स हैं, जो कि किसी आम पेट्रोल वाहन की तरह महज पांच मिनट में ही रिफिल हो जाते हैं। वाहन को संचालित करने के लिए जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) से चलने वाली मोटर की जगह 1.24 kWh लिथियम आयन बैटरी पैक है। कार को ताकतवर बनाने के लिए 182 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर है।
गडकरी के हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर आने के क्या हैं मायने?
हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर संसद पहुंचने के बाद गडकरी के दफ्तर की तरफ से माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट कू पर पोस्ट में कहा गया- "केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आज हाइड्रोजन आधारित फ्यूल सेल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन (एफसीईवी) में बैठकर संसद भवन पहुंचे। ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली कार का प्रदर्शन कर गडकरी जी ने हाइड्रोजन और एफसीईवी तकनीक और इसके फायदों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि भारत में भी हाइड्रोजन आधारित समाज को बढ़ावा दिया जा सके।"
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गौरतलब है कि इससे पहले भी नितिन गडकरी ने गोवा में कहा था कि वे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ऐसे वाहन का इस्तेमाल शुरू करेंगे जो ग्रीन हाइड्रोजन पर चलता होगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई सुनिश्चित करेगा।
बाकी इलेक्ट्रिक वाहनों से कैसे अलग है गडकरी की कार, सरकार के रुख में क्या है बदलाव?
गौरतलब है कि केंद्र सरकार जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों के प्रयोग को धीरे-धीरे कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के ज्यादा से ज्यादा प्रयोग पर जोर देती रही है। हालांकि, हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों का जिक्र सरकार की ओर से कम ही किया गया है। यहां तक कि बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बैटरी स्वैपिंग यानी बैटरी चार्जिंग स्टेशन पर बैटरी चार्ज करने की सुविधा का जिक्र किया था, लेकिन हाइड्रोजन चालित वाहनों की बात नहीं रखी थी। हालांकि, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कई अलग मौकों पर हाइड्रोजन चालित वाहनों का ही जिक्र करते रहे हैं। अब एक बार फिर हाइड्रोजन चालित कार को संसद ले जाकर उन्होंने सरकार की बदलती नीति पर रुख स्पष्ट किया है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि केंद्र सरकार अब तक किस तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग का जिक्र करती रही है और आखिर पारंपरिक ईवी और हाइड्रोजन सेल्स से चलने वाले वाहनों में आधारभूत अंतर क्या है?
इलेक्ट्रिक वाहनों की कितनी कैटेगरी?
स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन मुख्य तौर पर चार वर्गों में बंटे हैं।
1. पारंपरिक हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (एचईवी)
2. प्लग-इन हाइब्रिड वाहन (पीएचईवी)
3. बैटरी पावर्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल
4. फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (एफसीईवी)
सरकार का रुख किन वाहनों की तरफ झुका?
गौरतलब है कि सरकार की तरफ से अब तक जिन वाहनों का ज्यादातर प्रचार देखने को मिला है, वह बैटरी पावर्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (बीईवी) रहे हैं। यानी ऐसे वाहन जो पारंपरिक बैटरी चार्जिंग तकनीक से चलते हैं। हालांकि, गडकरी की ओर से पेश हुआ हाइड्रोजन से चलने वाला वाहन एक फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (एफसीईवी) है। यानी पारंपरिक स्वच्छ ऊर्जा वाहनों से उलट इसमें चार्जिंग की जरूरत नहीं होती, बल्कि इन्हें जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तरह ही तुरंत ग्रीन हाइड्रोजन यानी स्वच्छ ईंधन भरकर चलाया जा सकता है।
गडकरी की ओर से पेश की गई टोयोटा की मिराई एक एफसीईवी तकनीक पर चलने वाली कार है, जो कि हाइड्रोजन गैस से चलती है। इस ग्रीन फ्यूल को ऊर्जा में कन्वर्ट करने के लिए कार में इलेक्ट्रिक मोटर भी मौजूद रहती है। एफसीईवी में हाइड्रोजन फ्यूल जब वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के साथ मिलाकर बिजली पैदा करता है तो यही बिजली वाहनों की इलेक्ट्रिक मोटर को ऊर्जा देती है।
फिलहाल हॉन्डा की क्लैरिटी और ह्युंडई की नेक्सो भी इसी तकनीक पर काम करने वाली दो और हाइड्रोजन कारें हैं।
बैटरी पावर्ड व्हीकल या हाइड्रोजन चालित कारें, जानें कौन बेहतर?
सरकार के रुख में बदलाव की एक बड़ी वजह यह है कि जहां हाइड्रोजन से चलने वाली एफसीईवी सीधा ग्रीन फ्यूल से चलती हैं तो वहीं बैटरी से चलने वाली बीईवी चार्जिंग की बदौलत काम करती हैं। अब जहां एक एफसीईवी को ईंधन भरवाने में सिर्फ कुछ मिनटों का ही समय लगता है, तो वहीं बैटरी वाले वाहन को चार्जिंग में ही कम से कम 30 से 45 मिनट तक लग जाते हैं।
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पहले जानें- नितिन गडकरी किस गाड़ी में पहुंचे संसद?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री जापानी कंपनी टोयोटा के मिराई वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। इसमें तीन हाइड्रोजन टैंक्स हैं, जो कि किसी आम पेट्रोल वाहन की तरह महज पांच मिनट में ही रिफिल हो जाते हैं। वाहन को संचालित करने के लिए जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) से चलने वाली मोटर की जगह 1.24 kWh लिथियम आयन बैटरी पैक है। कार को ताकतवर बनाने के लिए 182 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर है।
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गडकरी के हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर आने के क्या हैं मायने?
हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर संसद पहुंचने के बाद गडकरी के दफ्तर की तरफ से माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट कू पर पोस्ट में कहा गया- "केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आज हाइड्रोजन आधारित फ्यूल सेल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन (एफसीईवी) में बैठकर संसद भवन पहुंचे। ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली कार का प्रदर्शन कर गडकरी जी ने हाइड्रोजन और एफसीईवी तकनीक और इसके फायदों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि भारत में भी हाइड्रोजन आधारित समाज को बढ़ावा दिया जा सके।"
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गौरतलब है कि इससे पहले भी नितिन गडकरी ने गोवा में कहा था कि वे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ऐसे वाहन का इस्तेमाल शुरू करेंगे जो ग्रीन हाइड्रोजन पर चलता होगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई सुनिश्चित करेगा।
बाकी इलेक्ट्रिक वाहनों से कैसे अलग है गडकरी की कार, सरकार के रुख में क्या है बदलाव?
गौरतलब है कि केंद्र सरकार जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों के प्रयोग को धीरे-धीरे कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के ज्यादा से ज्यादा प्रयोग पर जोर देती रही है। हालांकि, हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों का जिक्र सरकार की ओर से कम ही किया गया है। यहां तक कि बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बैटरी स्वैपिंग यानी बैटरी चार्जिंग स्टेशन पर बैटरी चार्ज करने की सुविधा का जिक्र किया था, लेकिन हाइड्रोजन चालित वाहनों की बात नहीं रखी थी। हालांकि, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कई अलग मौकों पर हाइड्रोजन चालित वाहनों का ही जिक्र करते रहे हैं। अब एक बार फिर हाइड्रोजन चालित कार को संसद ले जाकर उन्होंने सरकार की बदलती नीति पर रुख स्पष्ट किया है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि केंद्र सरकार अब तक किस तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग का जिक्र करती रही है और आखिर पारंपरिक ईवी और हाइड्रोजन सेल्स से चलने वाले वाहनों में आधारभूत अंतर क्या है?
इलेक्ट्रिक वाहनों की कितनी कैटेगरी?
स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन मुख्य तौर पर चार वर्गों में बंटे हैं।
1. पारंपरिक हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (एचईवी)
2. प्लग-इन हाइब्रिड वाहन (पीएचईवी)
3. बैटरी पावर्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल
4. फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (एफसीईवी)
सरकार का रुख किन वाहनों की तरफ झुका?
गौरतलब है कि सरकार की तरफ से अब तक जिन वाहनों का ज्यादातर प्रचार देखने को मिला है, वह बैटरी पावर्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (बीईवी) रहे हैं। यानी ऐसे वाहन जो पारंपरिक बैटरी चार्जिंग तकनीक से चलते हैं। हालांकि, गडकरी की ओर से पेश हुआ हाइड्रोजन से चलने वाला वाहन एक फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (एफसीईवी) है। यानी पारंपरिक स्वच्छ ऊर्जा वाहनों से उलट इसमें चार्जिंग की जरूरत नहीं होती, बल्कि इन्हें जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तरह ही तुरंत ग्रीन हाइड्रोजन यानी स्वच्छ ईंधन भरकर चलाया जा सकता है।
गडकरी की ओर से पेश की गई टोयोटा की मिराई एक एफसीईवी तकनीक पर चलने वाली कार है, जो कि हाइड्रोजन गैस से चलती है। इस ग्रीन फ्यूल को ऊर्जा में कन्वर्ट करने के लिए कार में इलेक्ट्रिक मोटर भी मौजूद रहती है। एफसीईवी में हाइड्रोजन फ्यूल जब वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के साथ मिलाकर बिजली पैदा करता है तो यही बिजली वाहनों की इलेक्ट्रिक मोटर को ऊर्जा देती है।
फिलहाल हॉन्डा की क्लैरिटी और ह्युंडई की नेक्सो भी इसी तकनीक पर काम करने वाली दो और हाइड्रोजन कारें हैं।
बैटरी पावर्ड व्हीकल या हाइड्रोजन चालित कारें, जानें कौन बेहतर?
सरकार के रुख में बदलाव की एक बड़ी वजह यह है कि जहां हाइड्रोजन से चलने वाली एफसीईवी सीधा ग्रीन फ्यूल से चलती हैं तो वहीं बैटरी से चलने वाली बीईवी चार्जिंग की बदौलत काम करती हैं। अब जहां एक एफसीईवी को ईंधन भरवाने में सिर्फ कुछ मिनटों का ही समय लगता है, तो वहीं बैटरी वाले वाहन को चार्जिंग में ही कम से कम 30 से 45 मिनट तक लग जाते हैं।