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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सभी दल 30 मई तक चुनाव आयोग को दें चंदे की जानकारी, जानें क्या है चुनावी बॉन्ड
Fri, 12 Apr 2019 12:19 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 12 Apr 2019 12:19 PM IST
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electoral bond
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उच्चतम न्यायालय ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे चुनावी बॉन्ड की रसीदों को निर्वाचन आयोग को सौंपे। न्यायालय ने कहा कि वे दानदाताओं की पहचान और उनके खातों में मौजूद धनराशि का ब्यौरा 30 मई तक एक सील बंद लिफाफे में चुनाव पैनल को सौंप दें।
उच्चतम न्यायालय ने कहा, अगले आदेश तक चुनाव आयोग भी चुनावी बॉन्ड से एकत्रित की गई धनराशि का ब्यौरा सील बंद लिफाफे में ही रखे। न्यायालय ने कहा कि वह कानून में किए गए बदलावों का विस्तार से परीक्षण करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि संतुलन किसी दल के पक्ष में न झुका हो। इससे पहले चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती देने वाली एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता संगठन एडीआर ने चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके जरिये राजनीतिक दलों को चंदा कौन दे रहा है। संगठन के वकील का कहना था कि इनमें से ज्यादातर चंदा सत्तारूढ़ दल के पक्ष में गया है।
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उच्चतम न्यायालय ने कहा, अगले आदेश तक चुनाव आयोग भी चुनावी बॉन्ड से एकत्रित की गई धनराशि का ब्यौरा सील बंद लिफाफे में ही रखे। न्यायालय ने कहा कि वह कानून में किए गए बदलावों का विस्तार से परीक्षण करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि संतुलन किसी दल के पक्ष में न झुका हो। इससे पहले चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती देने वाली एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता संगठन एडीआर ने चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके जरिये राजनीतिक दलों को चंदा कौन दे रहा है। संगठन के वकील का कहना था कि इनमें से ज्यादातर चंदा सत्तारूढ़ दल के पक्ष में गया है।
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क्या है चुनावी बॉन्ड स्कीम
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
चुनावी बॉन्ड व्यवस्था की घोषणा सरकार ने साल 2017 के बजट में की गई थी। इस साल के बजट ने लोगों को अपने पसंदीदा राजनीतिक दल के साथ जुड़ने का एक नया तरीका पेश किया। चुनावी बॉन्ड न तो टैक्स में छूट देते हैं और न ही ब्याज कमाने का साधन हैं। इसे चुनावी फंडिंग में सुधार के तरीके के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
निश्चित पार्टियों के लिए एक अधिसूचित बैंक द्वारा चुनावी बॉन्ड जारी किए जाएंगे। यदि आप किसी राजनीतिक पार्टी को दान या चंदा देने के इच्छुक हैं, तो आप इन बॉन्ड को डिजिटल रूप से या चेक के माध्यम से भुगतान करके खरीद सकते हैं। फिर आप एक पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को उपहार या चंदा देने के लिए स्वतंत्र हैं। बॉन्ड संभावित रूप से वाहक बॉन्ड होंगे और देने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं होगी। यहां तक की चंदा प्राप्त कर रही पार्टी को भी दानदाता के बारे में पता नहीं चलेगा।
संबंधित पार्टी इन बॉन्ड को अपने बैंक खातों के माध्यम से रुपये में बदल सकती है। इसके लिए उपयोग किए गए बैंक खाते की जानकारी चुनाव आयोग को देना अनिवार्य है। बॉन्ड को एक निश्चित समय अवधि के भीतर ही बैंक में जमा किया जा सकता है। विलंब होने पर इसका भुगतान नहीं हो सकता। इन बॉन्ड में भुगतान होने की समय सीमा निश्चित होती है।
केवल भारतीय रिजर्व बैंक को ही इन बॉन्डों को जारी करने की अनुमति है, जिन्हें अधिसूचित बैंकों के माध्यम से बेचा जा रहा है।
निश्चित पार्टियों के लिए एक अधिसूचित बैंक द्वारा चुनावी बॉन्ड जारी किए जाएंगे। यदि आप किसी राजनीतिक पार्टी को दान या चंदा देने के इच्छुक हैं, तो आप इन बॉन्ड को डिजिटल रूप से या चेक के माध्यम से भुगतान करके खरीद सकते हैं। फिर आप एक पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को उपहार या चंदा देने के लिए स्वतंत्र हैं। बॉन्ड संभावित रूप से वाहक बॉन्ड होंगे और देने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं होगी। यहां तक की चंदा प्राप्त कर रही पार्टी को भी दानदाता के बारे में पता नहीं चलेगा।
संबंधित पार्टी इन बॉन्ड को अपने बैंक खातों के माध्यम से रुपये में बदल सकती है। इसके लिए उपयोग किए गए बैंक खाते की जानकारी चुनाव आयोग को देना अनिवार्य है। बॉन्ड को एक निश्चित समय अवधि के भीतर ही बैंक में जमा किया जा सकता है। विलंब होने पर इसका भुगतान नहीं हो सकता। इन बॉन्ड में भुगतान होने की समय सीमा निश्चित होती है।
केवल भारतीय रिजर्व बैंक को ही इन बॉन्डों को जारी करने की अनुमति है, जिन्हें अधिसूचित बैंकों के माध्यम से बेचा जा रहा है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है?
एडीआर
- फोटो : self
वर्तमान समय में देश के अधिकांश राजनीतिक दल गुमनाम स्रोतों से नकद दान या चंदा स्वीकार करती हैं। इसमें भ्रष्टाचार और गलत ढंग से आय होने की संभावना ज्यादा रहती है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के एक रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्र्रोरल बॉन्ड जारी होने से पहले विभिन्न पार्टियों के फंड में लगभग 70 फीसदी हिस्सा अज्ञात स्रोतों से आता था।
वर्तमान में, राजनीतिक दलों को आयकर विभाग को 20000 से अधिक के किसी भी चंदे की सूचना देना आवश्यक है। लेकिन पार्टियां इससे बचने के लिए कम मात्रा में नकद चंदे को प्राप्त कर धन भी कमा लेती हैं और आयकर विभाग को जानकारी देने से भी बच जाती हैं।
चुनावी बॉन्ड के जरिए दानदाता बैंक के माध्यम से राजनैतिक दलों को चंदा दे सकेंगे। दानदाता की जानकारी केवल बॉन्ड जारी करने वाले बैंक को ही रहेगी।
वर्तमान में, राजनीतिक दलों को आयकर विभाग को 20000 से अधिक के किसी भी चंदे की सूचना देना आवश्यक है। लेकिन पार्टियां इससे बचने के लिए कम मात्रा में नकद चंदे को प्राप्त कर धन भी कमा लेती हैं और आयकर विभाग को जानकारी देने से भी बच जाती हैं।
चुनावी बॉन्ड के जरिए दानदाता बैंक के माध्यम से राजनैतिक दलों को चंदा दे सकेंगे। दानदाता की जानकारी केवल बॉन्ड जारी करने वाले बैंक को ही रहेगी।
आप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?
बॉन्ड एक हजार, 10 हजार 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ के गुणकों में जारी किए जाते हैं। जो बैंकों के निर्दिष्ट शाखाओं में उपलब्ध होते हैं। उन्हें दानकर्ता द्वारा केवाईसी हुए खाते से खरीदा जा सकता है। दानकर्ता अपनी पसंद की पार्टी को बॉन्ड दान कर सकते हैं। इसे 15 दिनों के भीतर पार्टी के सत्यापित खाते में जमा करना आवश्यक है।
बॉन्ड प्रत्येक तिमाही की शुरुआत में 10 दिनों की अवधि में खरीद के लिए उपलब्ध होंगे। अर्थात् जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्तूबर के शुरुआती 10 दिनों में। लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि प्रदान की जाएगी।
अन्य शर्तें क्या हैं?
जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 29 ए के तहत पंजीकृत हर पार्टी को सबसे हालिया लोकसभा या राज्य चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत मतदान प्राप्त हुआ है तो उसे भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एक सत्यापित खाता आवंटित किया जाएगा। इस खाते के जरिए ही इलेक्टोरल बॉन्ड के ट्रांजेक्शन किए जा सकते हैं।बॉन्ड प्रत्येक तिमाही की शुरुआत में 10 दिनों की अवधि में खरीद के लिए उपलब्ध होंगे। अर्थात् जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्तूबर के शुरुआती 10 दिनों में। लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि प्रदान की जाएगी।