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Election: इस्राइल-फलस्तीन विवाद भी बना चुनावी मुद्दा, BJP का कांग्रेस-AIMIM पर आतंक को समर्थन देने का आरोप

Tue, 10 Oct 2023 03:21 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 10 Oct 2023 03:21 PM IST
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सार
इस्राइल-फलस्तीन विवाद को हवा देने में केवल भाजपा नेताओं की ही टिप्पणी सामने आई हो, ऐसा नहीं है। समाजवादी पार्टी के नेता यसर शाह ने एक्स पर कहा है कि 'यदि 'भक्त' फलस्तीन के खिलाफ सिर्फ इसलिए खड़े हैं, क्योंकि वहां मुसलमान हैं, तो हम भी फलस्तीन के साथ सिर्फ इसलिए खड़े हैं, क्योंकि वहां मुसलमान हैं।'
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Election: Israel Palestine conflict become an election issue in upcoming assembly elections 2023
Election: Israel-Hamas war - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार

इस्राइल-फलस्तीन के बीच संघर्ष जारी है। इसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है और यह युद्ध कब रुकेगा, अभी इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। इस अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य के बीच भारत में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं तो बाद में लोकसभा चुनाव भी होना है। भारत ने इस्राइल पर हुए आतंकी हमले की निंदा की है और पीएम नरेंद्र मोदी ने इस्राइल का साथ देने की बात कही है। वहीं, कांग्रेस ने अपनी वर्किंग कमेटी में एक प्रस्ताव पास कर फलस्तीन के लोगों के साथ सहानुभूति जताई है। तो क्या इस्राइल-फलस्तीन विवाद भी इन चुनावों में एक चुनावी मुद्दा बन सकता है? सत्ता पक्ष-विपक्ष के नेताओं की बयानबाजी देखें, तो लगता है कि इसकी शुरुआत हो चुकी है।

चुनावी राज्य तेलंगाना के पूर्व भाजपा अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने कांग्रेस और एआईएमआईएम पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को उन्होंने कहा कि कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी हमेशा पीएफआई और हमास जैसे आतंकी संगठनों के साथ खड़े रहे हैं। इससे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। उन्होंने कहा कि देश को यूपीए शासन के दौरान सबसे ज्यादा आतंकी हमले झेलना पड़े। उन्होंने कहा कि जबकि भाजपा सरकार में देश सुरक्षित है। वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देश का स्टैंड एक होने की मांग की है। इससे इस मुद्दे पर राजनीतिक दोहराने के आसार दिखाई पड़ रहे हैं।

इसके पहले भाजपा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल (अब एक्स) से यह कहा था कि आज जिस तरह इस्राइल को भीषण आतंकी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है, भारत को भी 2014 के पहले इसी तरह की आतंकी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा था। पार्टी ने इस्राइल हमलों की मुंबई आतंकी घटना से तुलना करते हुए लिखा है कि आज इस्राइल पर हमला होने के बाद इस्राइल ने आतंकियों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया है। लेकिन मुंबई अटैक के दौरान भारत ने ऐसा नहीं किया? पार्टी ने इसके सहारे कांग्रेस के कथित कमजोर नेतृत्व पर निशाना साधा है।

भाजपा नेता भी हुए हमलावर

पार्टी की लाइन देखते ही भाजपा के अनेक नेताओं ने इस्राइल के संदर्भ में अपनी बेबाक टिप्पणी करनी शुरू कर दी। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने कहा है कि इस्राइल ने जो देखा है, भारत ने इसके पहले कई बार देखा है। इस्राइल के धार्मिक उत्सव के दिन उस पर हमास ने हमला किया, जबकि भारत पर अनेक बार इसी तरह के हमले हुए। उन्होंने अपनी ट्विटर लाइन पर लिखा है कि इन बातों को इसलिए याद रखना चाहिए जिससे हम इस तरह की घटनाओं को दुबारा घटित होने से रोक सकें।

मिश्रा की अपील है कि सरकार इतनी मजबूत होनी चाहिए, जो ऐसे अवसरों पर ठोस और कठोर जवाबी कार्रवाई कर सके। इस संदर्भ में पुलवामा में घटित आतंकी घटना के बाद केंद्र द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया जा सकता है। भाजपा ने हमेशा इसे अपने मजबूत नेतृत्व का परिणाम बताया है। भाजपा नेताओं का रुख यह बताता है कि वह इन पांच विधानसभा चुनाव में इस्राइल फलस्तीन विवाद को एक मुद्दे की तरह उभरने की कोशिश कर सकते हैं।

फलस्तीन में मुसलमान, इसलिए उसके साथ- सपा नेता यसर शाह

इस्राइल-फलस्तीन विवाद को हवा देने में केवल भाजपा नेताओं की ही टिप्पणी सामने आई हो, ऐसा नहीं है। समाजवादी पार्टी के नेता यसर शाह ने एक्स पर कहा है कि 'यदि 'भक्त' फलस्तीन के खिलाफ सिर्फ इसलिए खड़े हैं, क्योंकि वहां मुसलमान हैं, तो हम भी फलस्तीन के साथ सिर्फ इसलिए खड़े हैं, क्योंकि वहां मुसलमान हैं।' उन्होंने इस्राइल-फलस्तीन विवाद पर कई पोस्ट कर एक पक्ष में खुलकर खड़े होने की बात कही है।  

चूंकि, समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, और सपा कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है। यसर शाह अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रह चुके हैं और महत्त्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं, उनके बयान को लेकर भाजपा में भी तीखी प्रतिक्रिया है।  

कैसे बन सकता है ये चुनावी मुद्दा

दरअसल, भाजपा देश की सुरक्षा और अखंडता को हमेशा अपना राजनीतिक चुनावी मुद्दा बनाती रही है। जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव उसने केवल इसी मुद्दे पर जीता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पिछली राजस्थान यात्रा में भी सुरक्षा के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था। संकेतों में उन्होंने 'कन्हैयालाल की हत्या' का मुद्दा भी उठाया और कहा कि राजस्थान सरकार इतने संवेदनशील मामले पर चुप रही।

जिस तरह भाजपा ने इस्राइल में हुई आतंकी वारदात को देश में हुई आतंकवादी घटनाओं से जोड़ा है, इस बात की संभावना जताई जा रही है कि भाजपा इसे एक चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकती है। इस मुद्दे पर वह खुलकर न भी आए, तो सुरक्षा को अहमियत देते हुए इशारों में इसे तूल देने की कोशिश कर सकती है।   

खुलकर सामने नहीं आएगी भाजपा

राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि भारत स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर अब तक इस मुद्दे पर फलस्तीन के साथ खड़ा रहा है। मोदी सरकार ने पहली बार खुलकर हमास की आतंकी घटनाओं पर इस्राइल का साथ दिया है। हालांकि, सरकार ने भी समय-समय पर फलस्तीन के लोगों के साथ भी अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है और उनके लिए शांतिपूर्ण जीवन का रास्ता तैयार करने पर बल दिया है, लेकिन खुलकर इस्राइल का साथ देने को भारत की नीतिगत सोच में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं, मुस्लिम देशों की संभावित प्रतिक्रियाओं को देखकर इस बात की संभावना बहुत कम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व खुलकर इस मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करें, लेकिन उसके निचले स्तर के नेता अपनी सभाओं में इस तरह के मुद्दे उठा सकते हैं। जनता को प्रभावित करने में इस तरह के स्थानीय नेताओं की अहम भूमिका होती है और वह इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि विपक्षी दल के किसी नेता ने इस विवाद में कोई बड़ी बयानबाजी नहीं की तो यह बड़ा मुद्दा नहीं बनेगा, लेकिन एक भी गलत बयानबाजी से भाजपा को बड़ा अवसर मिल सकता है और यदि ऐसा हुआ तो वह इस मुद्दे को भी भुनाने से नहीं चूकेगी।

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