फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Election commssion to hear SP factions today

कौन करेगा साइकिल की सवारी, चुनाव आयोग में चल रही सुनवाई

Fri, 13 Jan 2017 10:32 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Jan 2017 10:32 PM IST
विज्ञापन
Election commssion to hear SP factions today
- फोटो : amar ujala

सपा में नाम और निशान पर मुलायम और अखिलेश धड़े में जारी जंग पर जल्द ही पूर्ण विराम लग सकता है। दरअसल चुनाव आयोग में दोनों धड़ों के दावों पर आज सुनवाई होने वाली है, जिसके बाद आयोग एक-दो दिन में अंतिम निर्णय सुना देगा। 

विज्ञापन


चुनाव आयोग में समाजवादी पार्टी के नाम और चिह्न में थोड़ी ही देर में सुनावाई शुरू होने वाली है। सुनवाई के लिए मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंच चुकें है। अखिलेश यादव गुट की तरफ से रामगोपाल यादव, किरनमय नंद और नरेश अग्रवाल आयोग पहुंचे हैं।
विज्ञापन


इस बीच वरिष्ठ सपाई नेता, राजेंद्र चौधरी ने अखिलेश यादव सृके समर्थन में बयान देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अखिलेश जी को दोबारा मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


चुनाव आयोग सुनवाई के दौरान कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों की राय लेगा। इसके बावजूद भी अगर स्थिति नहीं सुलझी तो आयोग समाजवादी पार्टी के नाम और निशान को जब्त कर दोनों दलों को नए नाम और निशान का विकल्प देगा।

वैसे दोनों धड़ों ने सभी विकल्पों को ध्यान में रख कर तैयारी कर ली है। मुलायम धड़े ने जहां राष्ट्रीय लोकदल और इसके चुनाव निशान (हल जोतता किसान) का विकल्प आजमाने की तैयारी की है। वहीं, अखिलेश धड़ा सबसे पहले मोटरसाइकिल पर और इसे साइकिल से मिलता जुलता होने के कारण आयोग द्वारा ठुकराए जाने की स्थिति में बरगद के निशान पर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है।

क्या कर सकता है चुनाव आयोग

Election commssion to hear SP factions today

कानूनी दृष्टि से देखें तो दोनों ही पक्षों के दावों में कई ऐसे बिंदु हैं जिनका आयोग जवाब तलाश रहा है। मसलन मुलायम धड़े का दावा है कि राष्ट्रीय अधिवेशन अचानक नहीं बुलाया जा सकता। इसके लिए एक महीना पहले नोटिस जारी करना जरूरी है। इसके अलावा इस धड़े ने आयोग में नाम और निशान पर दावा जताते हुए कहा है कि चूंकि रामगोपाल यादव बर्खास्त कर दिए गए थे इसलिए उन्हें राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने का अधिकार नहीं है।

दूसरी ओर, अखिलेश धड़ा राष्ट्रीय अधिवेशन और इसमें लिए गए निर्णय को वैध ठहरा रहा है। इस धड़े ने आयोग में दावा किया है कि रामगोपाल ने अधिवेशन तब बुलाया जब तत्कालीन अध्यक्ष ने उनका निष्कासन वापस ले लिया था। फिर इस धड़े का दावा है कि चूंकि 90 फीसदी विधायक और सांसद अखिलेश धड़े के साथ हैं इसलिए नाम और निशान पर उसका स्वाभाविक दावा बनता है।

क्या कर सकता है चुनाव आयोग
मुलायम के दावे को तभी महत्व मिल सकता है जब चुनाव आयोग यह मान ले कि रामगोपाल की ओर से बुलाया गया अधिवेशन असंवैधानिक था। अगर आयोग ने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया तो निर्णय मुलायम धड़े के पक्ष में होगा। इसके उलट अगर आयोग ने इस तथ्य को स्वीकार नहीं किया तो बाजी अखिलेश धड़े के हाथ लगेगी।

कानूनी विमर्श भी अहम
दोनों का पक्ष सुनने के बाद आयोग इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय लेगा। माना जा रहा है कि चूंकि इस बारे में फैसला 17 जनवरी से पहले लेना जरूरी है। ऐसे में आयोग रविवार तक विमर्श की प्रक्रिया पूरी कर लेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed