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झूठी जानकारी दी तो रद्द होगी उम्मीदवारी, शीतकालीन सत्र के बाद सरकार पर दबाव बढ़ाएगा चुनाव आयोग

Mon, 24 Dec 2018 03:26 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 24 Dec 2018 03:26 AM IST
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Election Commission says government Make False Disclosure a Ground for Disqualification
भारत निर्वाचन आयोग

संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग केंद्र सरकार पर चुनाव सुधारों को लेकर नए सिरे दबाव बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसमें उम्मीदवारी रद्द करने के लिए झूठी जानकारी देने को आधार बनाना भी शामिल है। साथ ही विधान परिषद के चुनावों में उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर लगाम लगाना भी प्रमुख चुनाव सुधारों में एक है।

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सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारी संसद सत्र समाप्त होने के बाद विधि सचिव जी नारायण राजू से मिलने की योजना बना रहे हैं। बैठक में आयोग उम्मीदवारी को अयोग्य ठहराए जाने के लिए झूठी जानकारी को आधार बनाने जैसे मुद्दों को मजबूती से उठा सकता है। इतना ही नहीं, आयोग कानून मंत्रालय से चुनाव अवधि के दौरान रिश्वत देने को संज्ञेय अपराध बनाने को लेकर भी दबाव बना सकता है। संसद का शीतकालीन सत्र अगले महीने 8 जनवरी को समाप्त हो रहा है। 
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चुनाव आयोग के लिए कानून मंत्रालय एक प्रशासनिक मंत्रालय है। सूत्रों का कहना कि आयोग सरकार के समक्ष चुनाव आयोग के दोनों चुनाव आयुक्तों को सांविधानिक संरक्षण के दायरे में लाने का मुद्दा भी उठा सकता है। अब तक सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त को ही सांविधानिक संरक्षण प्राप्त है। इस वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना पड़ता है। जबकि चुनाव आयुक्त को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर हटाया जा सकता है। 
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बताते चलें कि मार्च, 2015 में विधि आयोग ने चुनाव सुधार संबंधी अपनी रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह दोनों चुनाव आयुक्तों को भी सांविधानिक संरक्षण के दायरे में लाने की सिफारिश की थी। चुनाव आयोग पहले ही कानून मंत्रालय से इस बाबत प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का अनुरोध कर चुका है। इस पर सरकार कहना है कि इसके लिए संविधान संशोधन करना होगा और यह राजनीतिक सहमति से ही हासिल किया जा सकता है।

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