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EC: आयोग ने केंद्र को नए सिरे से भेजा प्रस्ताव, कहा- एक व्यक्ति-एक सीट के आधार पर हो चुनाव

Sat, 08 Oct 2022 05:47 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 08 Oct 2022 05:47 AM IST
सार

आयोग सुप्रीम कोर्ट में भी ‘एक व्यक्ति-एक सीट’ का समर्थन कर चुका है। निर्वाचन आयोग का तर्क है कि इससे उपचुनाव की नौबत नहीं आएगी।

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Election Commission says election should be on the basis of one person one seat
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने केंद्र सरकार को चुनावों में ‘एक व्यक्ति-एक सीट’ का नियम लागू करने का प्रस्ताव नए सिरे से भेजा है। इसके पहले 2004 में यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा चुका है, लेकिन ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। चुनावों में ‘एक व्यक्ति एक सीट’ नियम लागू करने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट, 1951) में बदलाव करना होगा। 

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वर्तमान में जनप्रतिनिधित्व कानून के सेक्शन 33 (7) में मौजूद नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है। आयोग ने 2004 में पहली बार केंद्र सरकार को ‘एक व्यक्ति-एक सीट’ का प्रस्ताव भेजते हुए तर्क दिया था कि अगर एक व्यक्ति दो सीटों से चुनाव लड़ता है और दोनों जगह से जीतने के बाद एक सीट खाली करता है तो उपचुनाव कराने में फिर खर्च आता है। 
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एक तरह से यह पैसे का दुरुपयोग है। आयोग ने इसे देखते हुए सीट छोड़ने वाले निर्वाचित उम्मीदवार को सरकार के अकाउंट में एक निश्चित रकम जमा करने के लिए नियम बनाने की सिफारिश की थी। सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग केंद्रीय कानून मंत्रालय के साथ इस मुद्दे पर काम कर रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट में भी कर चुका है समर्थन
आयोग सुप्रीम कोर्ट में भी ‘एक व्यक्ति-एक सीट’ का समर्थन कर चुका है। निर्वाचन आयोग का तर्क है कि इससे उपचुनाव की नौबत नहीं आएगी और सरकारी कोष पर पड़ने वाले वित्तीय भार को कम किया जा सकेगा। कुछ वर्ष पहले किसी भी प्रत्याशी के एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। 

आयोग ने याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए ‘एक उम्मीदवार-एक सीट’ के प्रस्ताव का समर्थन किया था। याचिकाकर्त्ता (भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय) ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33(7) को चुनौती देते हुए संसद या विधानसभा सहित सभी स्तरों पर प्रत्याशी को सिर्फ एक ही सीट से चुनाव लड़ने का अधिकार दिए जाने की अपील की थी।

विधि आयोग ने 2015 में दिया था सुझाव
विधि आयोग ने भी किसी व्यक्ति को एक से अधिक सीट पर चुनाव से लड़ने से रोकने की सिफारिश की थी। 1996 से पूर्व कोई प्रत्याशी कितनी भी सीटों से चुनाव लड़ सकता था। बाद में जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन कर इसे दो सीटों तक सीमित किया गया। मार्च 2015 में विधि आयोग ने चुनाव सुधारों पर 255वीं रिपोर्ट में अनेक उपाय सुझाए थे। 


इनमें उम्मीदवारों को एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने से रोकने और निर्दलीय उम्मीदवारों की उम्मीदवारी प्रतिबंधित करना भी शामिल था। मौजूदा व्यवस्था में बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार उतरते हैं। इनमें कई तो डमी उम्मीदवार होते हैं  तथा कई तो एक ही नाम के होते हैं, जिनका उद्देश्य मतदाताओं में भ्रम फैलाना होता है।

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