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EC: 'सदन को समय से पहले भंग होने से बचाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव के साथ ये है जरूरी', ईसी ने दिया सुझाव
Fri, 01 Sep 2023 11:03 PM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 01 Sep 2023 11:03 PM IST
सार
निर्वाचन आयोग ने कहा, लोकसभा को समय से पहले भंग होने से बचाने के लिए, सरकार के खिलाफ किसी भी अविश्वास प्रस्ताव में भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में नामित व्यक्ति के नेतृत्व वाली सरकार के पक्ष में एक और ‘विश्वास प्रस्ताव’ शामिल होना चाहिए।
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Election Commission of India
- फोटो : Social Media
विस्तार
देश में इन दिनों एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। लेकिन एक साथ चुनाव कराने को लेकर सरकार के सामने कई चुनौतियां भी हैं। इसके लिए राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को लोकसभा के साथ जोड़ने के लिए संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के साथ-साथ अन्य संसदीय प्रक्रियाओं में भी संशोधन करने की आवश्यकता होगी। इसको लेकर निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को कहा कि यदि भारत ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ मॉडल को अपनाता है, तो केंद्र या राज्य में सरकार के पतन के कारण होने वाली किसी भी रिक्ति को शेष पांच साल के कार्यकाल के लिए एक वैकल्पिक सरकार से भरना होगा।
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आगे कहा कि यह या तो विपक्ष के विश्वास मत के माध्यम से अपना बहुमत साबित करने से हो सकता है या आंशिक अवधि के लिए सरकार चुनने के लिए मध्यावधि चुनाव के जरिये संभव है। संविधान में संशोधन का प्रस्ताव करते हुए, निर्वाचन आयोग ने कहा कि लोकसभा का कार्यकाल आमतौर पर एक विशेष तारीख को शुरू और समाप्त होगा (न कि उस तारीख को जब वह अपनी पहली बैठक की तारीख से पांच साल पूरे करेगी)। नए सदन के गठन के लिए आम चुनाव की अवधि इस प्रकार निर्धारित की जानी चाहिए कि लोकसभा अपना कार्यकाल पूर्व-निर्धारित तिथि पर शुरू कर सके।
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इस स्थिति में सदन का कार्यकाल मूल कार्यकाल के बराबर होना चाहिए
आयोग ने कहा, लोकसभा को समय से पहले भंग होने से बचाने के लिए, सरकार के खिलाफ किसी भी अविश्वास प्रस्ताव में भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में नामित व्यक्ति के नेतृत्व वाली सरकार के पक्ष में एक और ‘विश्वास प्रस्ताव’ शामिल होना चाहिए। इसके लिए मतदान होना चाहिए। आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि यदि सदन के विघटन को टाला नहीं जा सकता है, तो शेष कार्यकाल लंबा होने पर नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसे में सदन का कार्यकाल मूल कार्यकाल के बराबर होना चाहिए।
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सदन भंग होने पर कम समय हो क्या होगा
आयोग ने सुझाव दिया कि यदि लोकसभा का शेष कार्यकाल लंबा नहीं है, तो राष्ट्रपति के अपने नियुक्त मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर देश का प्रशासन चलाने का प्रावधान हो सकता है। वह अगले सदन के गठन के निर्धारित समय तक इस तरह देश की कमान संभाल सकते हैं। राज्य विधानसभाओं में भी यही व्यवस्था लागू की जा सकती है।
‘लंबी’ और ‘लंबी नहीं’ अवधि को परिभाषित करना होगा
अयोग ने कहा कि ‘लंही’ और ‘लंबी नहीं’ (छोटी) अवधि को परिभाषित करना होगा। कानून और कार्मिक विभाग की स्थायी समिति ने भी दिसंबर 2015 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता पर अपनी एक रिपोर्ट में इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग के लिए सुझावों का हवाला दिया था। इसमें कहा गया था कि सभी राज्य विधान सभाओं का कार्यकाल भी सामान्यतः उसी दिन समाप्त होना चाहिए जिस दिन लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा हो। एक बार के उपाय के रूप में, मौजूदा विधान सभाओं का कार्यकाल या तो पांच साल से अधिक बढ़ाना होगा या कम करना होगा ताकि लोकसभा चुनाव के साथ-साथ नए चुनाव भी कराए जा सकें।