राजनीतिक प्रचार पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहा है चुनाव आयोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने सरकार से अपनी शक्तियों को बढ़ाने की मांग की है जिससे कि अखबारों में आने वाले राजनीतिक प्रचारों पर रोक लगाया जा सके। साथ ही आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर विधिक कार्रवाई भी की जा सके।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आयोग ने इसके लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन कर स्थायी कानूनी अधिकार दिये जाने की सिफारिश की है। चुनाव आयोग ने पिछले साल हुए बिहार चुनाव के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए समाचार पत्रों में निकलने वाले राजनीतिक प्रचारों पर संविधान की धारा 324 के अंतर्गत रोक लगा दिया था। यह प्रचार 4 नवंबर 2015 को राज्य के चार बड़े हिन्दी दैनिकों में छापे गए थे जिसमें 'गाय' के मुद्दे को प्रचारित किया गया था।
अखबारों को भी लाए दायरे में
आयोग ने कहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथी दल के लोग लगातार गाय का निरादर कर रहे हैं जो प्रत्येक भारतीय के लिए आस्था का विषय है और नीतीश अबतक चुप हैं। यह बातें आयोग ने कानून सचिव के साथ हुई बैठक में कही और अपनी विधाई शक्तियों को बढ़ाने की भी मांग की।
कानून सचिव जी नारायण राजू के साथ 27 मई को हुई बैठक में आयोग ने इस बात की भी मांग की कि लोक प्रतिनिधित्व कानून के सेक्शन 126 में संशोधन कर उसमें प्रिंट मीडिया को भी सम्मिलित किया जाए। मौजूदा कानून में वोटिंग के 48 घंटे पहले तक टीवी, अखबार, रेडियो और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों से प्रचार पर प्रतिबंध है।