फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Effect of cabinet expansion of Shivraj government on upcoming assembly election in Madhya Pradesh BJP strategy

MP Politics: मंत्रिमंडल विस्तार के बावजूद बढ़ सकती है BJP की मुश्किलें, घाटे का सौदा साबित न हो ये तीन मंत्री

Sat, 26 Aug 2023 04:27 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 26 Aug 2023 04:27 PM IST
विज्ञापन
सार
ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के बाद गठित मंत्रिमंडल को लेकर पूर्व सीएम उमा भारती कई बार कह चुकी थीं कि मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन नहीं है। उमा के इस बयान के पीछे की वजह यह थी कि मंत्रिमंडल में लोधी समाज का एक भी मंत्री नहीं था, जबकि पिछली भाजपा की सरकारों में कुसुम महदेले और जालम सिंह पटेल मंत्री थे। 2014 में बनी केंद्र में मोदी सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती केंद्रीय कैबिनेट में शामिल थीं।
loader
Effect of cabinet expansion of Shivraj government on upcoming assembly election in Madhya Pradesh BJP strategy
शिवराज सिंह चौहान। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से करीब दो माह पहले शनिवार को शिवराज मंत्रिमंडल में तीन नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने तीनों मंत्रियों को राजभवन में शपथ दिलवाई। इन तीनों मंत्रियों में महाकौशल से गौरीशंकर बिसेन, विंध्य से राजेंद्र शुक्ला और बुंदेलखंड से पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी शामिल है। बिसेन और शुक्ला को कैबिनेट मंत्री, जबकि लोधी को राज्यमंत्री बनाया गया है। शिवराज कैबिनेट में अब 33 मंत्री हो गए हैं। अभी भी 1 पद खाली है। विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई बार प्रदेश का दौरा कर चुके हैं। शाह के दौरे पर ही वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद कैबिनेट विस्तार को हरी झंडी दी गई थी।



दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के बाद गठित मंत्रिमंडल को लेकर पूर्व सीएम उमा भारती कई बार कह चुकी थीं कि मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन नहीं है। उमा के इस बयान के पीछे की वजह यह थी कि मंत्रिमंडल में लोधी समाज का एक भी मंत्री नहीं था, जबकि पिछली भाजपा की सरकारों में कुसुम महदेले और जालम सिंह पटेल मंत्री थे। 2014 में बनी केंद्र में मोदी सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती केंद्रीय कैबिनेट में शामिल थीं। विंध्य में 2018 की विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित सफलता मिलने के बाद भी दमदार नेता राजेंद्र शुक्ला कैबिनेट में शामिल नहीं हो पाए थे। इस वजह से उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ रही थी। गौरीशंकर बिसेन महाकौशल में ओबीसी का बड़ा चेहरा हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी हैं।


प्रदेश के मालवा क्षेत्र से आने वाले एक वरिष्ठ विधायक अमर उजाला से बातचीत में कहते है कि, प्रदेश में आचार संहिता लगने में महज 50 दिन का समय बचा हुआ हैं। सारे विधायक और मंत्री यह मान चुके थे कि अब कोई विस्तार नहीं होगा। यहीं नहीं गृहमंत्री अमित शाह भी बैठक में इसके संकेत दे चुके थे कि संगठन और सत्ता में कोई परिवर्तन नहीं होगा। लेकिन क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन को साधने के लिए भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार किया। जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है उनका क्षेत्र में प्रभाव भी है।साथ ही वे जातिगत समीकरण में बिल्कुल फिट बैठते है। बावजूद इसके यह विस्तार पार्टी के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है। क्योंकि प्रदेश में फिलहाल एक अनार और सौ बीमार जैसी सी स्थिति है।

वरिष्ठ विधायक ने कहा, मंत्रिमंडल विस्तार की खबरों के बीच अजय विश्नोई, संजय पाठक, यशपाल सिंहसिसोदिया, नागेंद्र सिंह, सुरेंद्र पटवा, रामपाल सिंह, पारस जैन, करण सिंह वर्मा, महेंद्र हार्डिया और डॉ.सीताशरण शर्मा जैसे वरिष्ठ विधायक मंत्री बनने की आस संजोए बैठे थे। लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुई। कई वरिष्ठ विधायक मंत्री बनने की दौड़ में थे लेकिन उनकों मौका नहीं मिला। इस विस्तार से अंसतोष पनपने का डर है। क्योंकि 45 दिन के लिए मंत्री का पावर का उपयोग कर ये तीन नेता कुछ खास कमाल तो नहीं कर सकेंगे। पार्टी को इन तीन के बदले में उससे ज्यादा नेताओं की नाराजगी का अंजाम भुगतना पड़ सकता है।

नए मंत्रियों पर बढ़ेगा दबाव
प्रदेश में अक्टूबर के पहले हफ्ते में आचार संहिता लग सकती है। इसलिए नए मंत्रियों को मंत्रालय संभालने और काम करने के लिए महज डेढ़ माह का ही समय मिलेगा। ऐसे में उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों के कामों और उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए बहुत कम समय है। इन डेढ़ माह में मंत्रियों पर अपने पद के दायित्वों को पूरा करने का दबाव लगातार बना रहेगा। इस दौरान लोगों के काम नहीं हुए तो उन्हें चुनाव में इसकी खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।

इन लोगों को बनाया गया है मंत्री

  • विंध्य से पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल फिर से मंत्री बनाए गए है। शुक्ला विंध्य में पार्टी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं। पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में विंध्य में कांग्रेस से कांटे की टक्कर मिलती दिख रही है। आम आदमी पार्टी भी कड़ी टक्कर दे रही है। सिंगरौली महापौर सीट पार्टी के हाथ से निकल गई। इसे क्षेत्र में पार्टी के प्रति नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट में भी पार्टी की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में अब शुक्ल को मंत्री बनाकर पार्टी क्षेत्र की जनता को साधने की कोशिश में है।
     
  • पूर्व मंत्री और विधायक गौरीशंकर बिसेन अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं। अभी वे मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी हैं। गौरीशंकर बिसेन ने सात बार विधायक और लोकसभा का चुनाव जीता है। महाकौशल में बड़ी संख्या में ओबीसी वोटर हैं। बिसेन को मंत्री बनाकर ओबीसी वर्ग को साधने की रणनीति बनाई जा रही है।
     
  • राहुल सिंह लोधी एक बार के विधायक हैं। वह 2018 में खरगापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते। राहुल पूर्व सीएम उमा भारती के भतीजे हैं। बुंदेलखंड और ग्वालियर चंबल में बड़ी संख्या में लोधी वोटर हैं। राहुल लोधी को मंत्री बनाकर भाजपा बुंदेलखंड के साथ ही ओबीसी वोटर को साध रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed