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छात्रों के मूल प्रमाण-पत्र नहीं रख सकेंगे शिक्षण संस्थान, केंद्र ने यूजीसी एक्ट में किया प्रावधान

Thu, 11 Oct 2018 05:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Oct 2018 05:08 AM IST
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education orgnizations can not keep original certificate of Students

सेंट्रल, स्टेट, डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी, प्राइवेट यूनिवर्सिटी समेत उच्च शिक्षण संस्थान अब दाखिले के दौरान छात्रों के मूल प्रमाण पत्र (ओरिजनल सर्टिफिकेट) नहीं रख सकेंगे। केंद्र सरकार ने छात्रों की दिक्कतों को देखते हुए सर्टिफिकेट और फीस वापसी पर यूजीसी एक्ट में बदलाव किया है। दाखिला विंडो बंद होने से 16 दिन या पहले सीट छोड़ने पर सौ फीसदी, दाखिला विंडो बंद होने के एक महीने बाद तक सीट छोड़ने पर 50 फीसदी फीस लौटानी पड़ेगी। कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता तो जुर्माना लगाया जाएगा और मान्यता रद्द होगी। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि यूजीसी एक्ट के नए नियम अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम में लागू होंगे। 

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नए नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थान सेमेस्टर या वार्षिक फीस ही ले सकेंगे। छात्रों से एक साथ फीस लेने पर रोक लग गई है। यूजीसी इस संबंध में विश्वविद्यालयों को इसी सप्ताह नोटिफिकेशन जारी करेगा। दाखिले के दौरान कॉलेज या उच्च शिक्षण संस्थान छात्रों के ओरिजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, मार्क्स शीट या डिग्री सर्टिफिकेट नहीं रख सकेंगे। कॉलेजों को दाखिला आवेदन पत्र के साथ स्वयं सत्यापित आवेदन पत्र भी देना होगा। दाखिले के दौरान कॉलेज प्रबंधन को ओरिजनल सर्टिफिकेट व मार्क्स शीट जांचने के बाद उसी समय वापस करनी होगी। कॉलेज प्रबंधन सर्टिफिकेट  की स्वयं सत्यापित कॉपी रख सकेंगे। 
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छात्र दाखिला कंफर्म करता है तो ही वे माइग्रेशन सर्टिफिकेट रख सकते हैं। इसके बाद छात्रों को मनपसंद कॉलेज में दाखिला लेने की पूरी आजादी होगी। जावडेकर के मुताबिक, उच्च शिक्षण संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो सख्त कार्रवाई होगी। केंद्र सरकार से फंड लेने वाले संस्थानों पर यूजीसी सीधे जुर्माना लगाने के अलावा उनकी मान्यता तक रद्द कर सकती है। डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी की मान्यता वापस ली जा सकती है। राज्यों से संबंधित संस्थानों पर यूजीसी के अलावा राज्य सरकारें कार्रवाई करेंगी।
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प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लूट नहीं  

जावडेकर के मुताबिक, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और मेडिकल कॉलेज छात्रों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर सबसे अधिक लूट करते हैं। नए नियम के तहत उच्च शिक्षण संस्थान कुल दाखिला फीस का पांच फीसदी या फिर अधिकतम पांच हजार रुपये तक ही प्रोसेसिंग फीस काट सकते हैं।

सीट छोड़ने पर लौटानी होगी दाखिला फीस

जावडेकर के मुताबिक, एक बार दाखिला लेने के बाद छात्र मनपसंद कॉलेज में सीट कन्फर्म होने के बाद भी दाखिला नहीं ले पाते थे, क्योंकि उक्त संस्थान दाखिला फीस वापस नहीं करते थे। यूजीसी राज्य सरकारों और शिक्षा सचिव को भी नए नियमों को लागू करने को पत्र लिखेगी। कोई भी संस्थान छात्र को प्रोस्पेक्टस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। छात्र की मर्जी होगी कि वह प्रोस्पेक्टस खरीदना चाहता है या नहीं। प्रोस्पेक्टस में कक्षा, प्रोग्राम, कोर्स, पाठ्यक्रम, सीट, शिक्षक से जुड़ी जानकारी होनी चाहिए, जो कि वेबसाइट पर भी उपलब्ध करानी अनिवार्य है।  


यह होंगे फीस वापसी के नियम

- नए नियम के तहत दाखिला आवेदन विंडो बंद होने से 16 दिन या उससे पहले कोई छात्र सीट छोड़ता है तो उसकी सौ फीसदी फीस वापस करनी होगी। 
- दाखिला आवेदन विंडो बंद होने से पंद्रह दिन या उससे पहले सीट छोड़ने पर 90 फीसदी फीस वापस की जाएगी।
- सरकार ने दाखिला विंडो बंद होने के बाद भी छात्रों को राहत दी है। कोई छात्र दाखिला बंद होने के पंद्रह दिन के भीतर सीट छोड़ता है तो उसे 80 फीसदी फीस वापस होगी। 16 से 30 दिन में सीट छोड़ने पर 50 फीसदी फीसदी लौटानी पड़ेगी।

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