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ED: शहरी विकास प्राधिकरण के आयुक्त ने अवैध तरीके से जमीन आवंटित की, रिश्तेदारों के नाम पर खूब बनाई संपत्ति
Mon, 06 Oct 2025 05:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 06 Oct 2025 05:03 PM IST
सार
ईडी ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) द्वारा भूमि आवंटन में बड़े पैमाने पर हुए घोटाले के मामले में लोकायुक्त पुलिस मैसूर द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की है। ईडी की जांच में सामने आया है कि एमयूडीए के पूर्व आयुक्त जीटी दिनेश कुमार द्वारा अनुचित लाभ के मकसद से साइटों की अवैध अलाटमेंट की गई थी।
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पीएसीएल मामले में ईडी ने 762 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की
- फोटो : ANI
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विस्तार
शहरी विकास प्राधिकरण के आयुक्त ने नियमों से परे जाकर जमीन की अवैध अलॉटमेंट कर दी। कोई एक दो जगह नहीं, बल्कि दो सौ से अधिक साइट, अपने लोगों के नाम कर दी या उन लोगों को दे दी गई, जहां से उक्त अधिकारी को जमकर फायदा मिला। धोखाधड़ी के इस खेल में आयुक्त ने जो कुछ कमाया, उस संपत्ति की मदद से अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर जमीन खरीद ली। जो अवैध साइट अलॉट की गई थी, उसमें भी तत्कालीन आयुक्त के रिश्तेदार एवं सहयोगी शामिल थे। ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है।
ईडी ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) द्वारा भूमि आवंटन में बड़े पैमाने पर हुए घोटाले के मामले में लोकायुक्त पुलिस मैसूर द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की है। ईडी की जांच में सामने आया है कि एमयूडीए के पूर्व आयुक्त जीटी दिनेश कुमार द्वारा अनुचित लाभ के मकसद से साइटों की अवैध अलाटमेंट की गई थी। इसके जरिए पूर्व आयुक्त ने जो कमाई की, उसका इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया। ये संपत्तियां, आयुक्त ने अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी हैं।
ईडी ने पता लगाया कि पूर्व आयुक्त, किस तरह से इस खेल को अंजाम दे रहे थे। जांच एजेंसी को अनुचित लाभ के मार्ग और उसके स्तरीकरण का भी पता चल गया। पूर्व आयुक्त ने मनमर्जी से अपने फायदे के लिए विभिन्न साइट की अलाटमेंट की। इससे जो अपराध की आय हुई, उसका उपयोग जीटी दिनेश कुमार के रिश्तेदारों/सहयोगियों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया था। जीटी दिनेश कुमार द्वारा 31 एमयूडीए साइटों के अवैध आवंटन का भी पता चला।
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इस मामले में ईडी द्वारा पिछले साल 18 अक्तूबर और 28 अक्तूबर को छापेमारी की गई थी। तलाशी से पता चला कि ये स्थल 14.03.2023 के पत्र, 27.10.2023 के सरकारी आदेश, 2015 में संशोधित कर्नाटक शहरी विकास प्राधिकरण (अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के बदले स्थलों का आवंटन) नियम, 2009 और कर्नाटक शहरी विकास प्राधिकरण (स्वैच्छिक भूमि समर्पण के लिए प्रोत्साहन योजना) नियम, 1991 का घोर उल्लंघन करते हुए आवंटित किए गए थे। इसके अलावा, छापे के दौरान एमयूडीए अधिकारियों/कर्मचारियों और रियल एस्टेट कारोबारियों के बीच गहरी सांठगांठ का भी पता चला। साक्ष्यों से मुआवजे के रूप में स्थलों के आवंटन और लेआउट की मंजूरी के लिए नकद भुगतान के मामले का भी खुलासा हुआ।
इससे पहले, ईडी ने अवैध रूप से आवंटित कुल 252 एमयूडीए स्थलों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। साथ ही एमयूडीए स्थलों का बड़े पैमाने पर अवैध आवंटन करने वाले जीटी दिनेश कुमार को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 16.09.2025 को गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में, दिनेश कुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने एमयूडीए घोटाला मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 4 अक्तूबर 40.08 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली एमयूडीए साइटों सहित 34 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस मामले में अब तक पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत लगभग 440 करोड़ रुपये की बाजार कीमत की आपराधिक आय कुर्क की जा चुकी है।
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ईडी ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) द्वारा भूमि आवंटन में बड़े पैमाने पर हुए घोटाले के मामले में लोकायुक्त पुलिस मैसूर द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की है। ईडी की जांच में सामने आया है कि एमयूडीए के पूर्व आयुक्त जीटी दिनेश कुमार द्वारा अनुचित लाभ के मकसद से साइटों की अवैध अलाटमेंट की गई थी। इसके जरिए पूर्व आयुक्त ने जो कमाई की, उसका इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया। ये संपत्तियां, आयुक्त ने अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी हैं।
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ईडी ने पता लगाया कि पूर्व आयुक्त, किस तरह से इस खेल को अंजाम दे रहे थे। जांच एजेंसी को अनुचित लाभ के मार्ग और उसके स्तरीकरण का भी पता चल गया। पूर्व आयुक्त ने मनमर्जी से अपने फायदे के लिए विभिन्न साइट की अलाटमेंट की। इससे जो अपराध की आय हुई, उसका उपयोग जीटी दिनेश कुमार के रिश्तेदारों/सहयोगियों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया था। जीटी दिनेश कुमार द्वारा 31 एमयूडीए साइटों के अवैध आवंटन का भी पता चला।
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इस मामले में ईडी द्वारा पिछले साल 18 अक्तूबर और 28 अक्तूबर को छापेमारी की गई थी। तलाशी से पता चला कि ये स्थल 14.03.2023 के पत्र, 27.10.2023 के सरकारी आदेश, 2015 में संशोधित कर्नाटक शहरी विकास प्राधिकरण (अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के बदले स्थलों का आवंटन) नियम, 2009 और कर्नाटक शहरी विकास प्राधिकरण (स्वैच्छिक भूमि समर्पण के लिए प्रोत्साहन योजना) नियम, 1991 का घोर उल्लंघन करते हुए आवंटित किए गए थे। इसके अलावा, छापे के दौरान एमयूडीए अधिकारियों/कर्मचारियों और रियल एस्टेट कारोबारियों के बीच गहरी सांठगांठ का भी पता चला। साक्ष्यों से मुआवजे के रूप में स्थलों के आवंटन और लेआउट की मंजूरी के लिए नकद भुगतान के मामले का भी खुलासा हुआ।
इससे पहले, ईडी ने अवैध रूप से आवंटित कुल 252 एमयूडीए स्थलों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। साथ ही एमयूडीए स्थलों का बड़े पैमाने पर अवैध आवंटन करने वाले जीटी दिनेश कुमार को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 16.09.2025 को गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में, दिनेश कुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने एमयूडीए घोटाला मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 4 अक्तूबर 40.08 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली एमयूडीए साइटों सहित 34 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस मामले में अब तक पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत लगभग 440 करोड़ रुपये की बाजार कीमत की आपराधिक आय कुर्क की जा चुकी है।