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3000 करोड़ की ठगी: 15 से अधिक राज्यों में क्रिकेट टीम प्रायोजित की, टूर्नामेंटों में भी ऑनलाइन सट्टेबाजी
Wed, 27 May 2026 06:11 PM IST
Rahul Kumar
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Wed, 27 May 2026 06:11 PM IST
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ED
- फोटो : ED
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने साइप्रस स्थित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'पारिमैच' मामले की चल रही जांच के तहत मंगलवार को महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, दमन और उत्तर प्रदेश में 17 स्थानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान लगभग 1.56 करोड़ रुपये की चल संपत्ति जब्त की गई। इसमें लगभग 1.2 करोड़ रुपये की नकदी भी शामिल हैं। विभिन्न बैंक खातों में जमा लगभग 3.8 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कर दी गई है। तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद कर जब्त किए गए हैं।
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निवेशकों को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगा
ईडी के मुताबिक, इस मामले में 3000 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। आरोपियों ने 15 से अधिक राज्यों में क्रिकेट लीग में टीम प्रायोजित की। इनमें ऑनलाइन सट्टेबाजी की गई। हॉकी/फुटबॉल टूर्नामेंटों में भी ऑनलाइन सट्टेबाजी हुई है। मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा पारिमैच.कॉम के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पारिमैच के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को धोखा देने के आरोपों की जांच शुरू की है। पारिमैच के संचालकों ने निवेशकों को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगा। अब तक की गई जांच से पता चला है कि एक वर्ष में 3000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई गई। पारिमैच और उसके सहयोगियों ने उपयोगकर्ता निधियों के संग्रह, हेरफेर और हस्तांतरण के लिए फर्जी खातों, भुगतान मध्यस्थों और वित्तीय समावेशन चैनलों का एक जटिल नेटवर्क अपनाया था। कुछ मामलों में, प्लेटफॉर्म द्वारा नियंत्रित खातों से सीधे भुगतान किए बिना ही उपयोगकर्ता निकासी संसाधित की गई।
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वास्तविक धन प्रवाह को छिपाया गया
अन्य उपयोगकर्ताओं द्वारा जमा की गई राशि को कई किस्तों में सीधे निकालने वाले उपयोगकर्ता के बैंक खाते या यूपीआई-आईडी में भेज दिया गया। इससे वास्तविक धन प्रवाह को छिपाया गया। जांच में यह भी पता चला है कि उपयोगकर्ता जमा और निकासी को सॉफ्टवेयर, फिनटेक और प्रौद्योगिकी से संबंधित संस्थाओं के नाम पर खोले गए कई चालू खातों के माध्यम से किया गया था। ये संस्थाएं, वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों में भी संलग्न थीं। आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल उपयोगकर्ता जमा राशि एकत्र करने, विक्रेता भुगतान, व्यावसायिक लेनदेन और भुगतान गेटवे सेवाओं की आड़ में भुगतान करने के लिए किया जाता था।
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किराना स्टोर और खुदरा दुकानों का दुरुपयोग
जांच में बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) नेटवर्क, मोबाइल मनी ट्रांसफर एजेंट, ग्राहक सेवा केंद्र, कैश मैनेजमेंट सर्विसेज (सीएमएस), स्थानीय किराना स्टोर और खुदरा दुकानों का दुरुपयोग भी सामने आया है। इनका इस्तेमाल प्लेटफॉर्म से जुड़े भुगतान और धन के हस्तांतरण के लिए किया जाता था। जांच में एक स्तरित तंत्र का भी खुलासा हुआ है, जिसमें उपयोगकर्ता निधि को बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) नेटवर्क के तहत संचालित खुदरा विक्रेताओं/ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से भेजा जाता था। पैसा पहले इन खुदरा विक्रेताओं को हस्तांतरित किया जाता था, जो इसे बीसी को सौंप देते थे। बीसी, बदले में इन खुदरा विक्रेताओं के वॉलेट को रिचार्ज कर देता था। एक बार वॉलेट में पैसा भर जाने के बाद, खुदरा विक्रेता इनका उपयोग पारिमैच प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने के लिए करते थे। इसके बाद इन वॉलेट का उपयोग पारिमैच उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने के लिए किया जाता था, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और प्रवाह को छिपाया जा सके।
हवाला चैनलों से विदेशों में गई नकदी
कुछ एजेंटों पर आरोप है कि उन्होंने सीएमएस चैनलों के माध्यम से प्राप्त नकदी को डायवर्ट किया। पारिमैच उपयोगकर्ताओं द्वारा जमा की गई राशि से प्राप्त आरटीजीएस हस्तांतरणों के साथ समायोजित किया, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और लेन-देन को छिपाया जा सके। इस प्रकार, इस नकदी को हवाला चैनलों के जरिए भारत से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया। आगे की जांच में पता चला है कि पारिमैच ने 'पारिमैच स्पोर्ट' और 'पारिमैच न्यूज' नामों से छद्म विज्ञापनों के माध्यम से अपने सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का आक्रामक रूप से प्रचार किया गया। अन्य सट्टेबाजी वेबसाइटों के विपरीत, पारिमैच ने स्थानीय विपणन पर ध्यान केंद्रित किया, जिसके तहत इसने भारत के 15 से अधिक राज्यों में स्थानीय क्रिकेट लीगों में टीमों को प्रायोजित किया। साथ ही हॉकी और फुटबॉल टूर्नामेंट भी प्रायोजित किए।
अब तक 112 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
जांच में यह भी पता चला है कि प्लेटफॉर्म ने प्रमुख त्वरित-वाणिज्य अनुप्रयोगों के माध्यम से सट्टेबाजी से संबंधित विज्ञापनों का प्रचार किया। नए उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने और उन्हें प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए किराने के सामान की डिलीवरी के साथ प्रचार सामग्री वितरित की। नए उपयोगकर्ताओं को प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए ऐप के उपयोग और ऑर्डर देने के दौरान उपयोगकर्ताओं को रणनीतिक रूप से ऐसे विज्ञापन दिखाए गए। ईडी ने इस मामले में अब तक 112 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। मामले में आगे की जांच जारी है।