ED: फर्जी डिग्रियों की अवैध बिक्री पर मिलता था एक फीसदी कमीशन, कमा लिए 387 करोड़; इस यूनिवर्सिटी का है मामला
विशेष न्यायालय, शिमला ने 04.01.2023 को इस पीसी का संज्ञान लिया था। इससे पहले इस मामले में, ईडी ने 29.01.2021 को 194.14 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को भी अनंतिम रूप से कुर्क किया था।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), शिमला ने मानव भारती विश्वविद्यालय (एमबीयू), सोलन से जुड़े फर्जी डिग्री घोटाले मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत, आरोपी कमीशन एजेंटों अभिषेक गुप्ता, हिमांशु शर्मा और अजय कुमार की 1.74 करोड़ रुपये (बिक्री विलेख मूल्य के अनुसार) मूल्य की सात अचल संपत्तियों को अपराध की आय (पीओसी) के रूप में अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ये सात अचल संपत्तियाँ बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में स्थित हैं। ये एजेंट फर्जी डिग्रियों की अवैध बिक्री कराते थे। इसके लिए इन्हें एक प्रतिशत कमीशन मिलता था। इस तरह से एजेंटों ने बतौर, अपराध की आय, 387 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए।
ईडी ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के धरमपुर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। ईडी की जांच से पता चला कि आरोपी राज कुमार राणा, अध्यक्ष, मानव भारती विश्वविद्यालय (एमबीयू), सोलन, विभिन्न कमीशन एजेंटों सहित अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एमबीयू के नाम पर जारी फर्जी डिग्रियों की बड़े पैमाने पर बिक्री में लिप्त थे। कमीशन एजेंटों ने फर्जी डिग्रियों के संभावित खरीदारों और विश्वविद्यालय अधिकारियों के बीच संपर्क स्थापित कराकर इस रैकेट में अहम भूमिका निभाई।
ईडी के अनुसार, इन एजेंटों को फर्जी डिग्रियों की अवैध बिक्री से प्राप्त आय का एक प्रतिशत कमीशन के रूप में मिलता था। फर्जी डिग्रियों की इस बिक्री से प्राप्त पीओसी 387 करोड़ रुपये आंकी गई है। बाद में इस अवैध आय का उपयोग राज कुमार राणा और उनके सहयोगियों, जिनमें कमीशन एजेंट भी शामिल थे, ने कई राज्यों में विभिन्न चल और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया। ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत राज कुमार राणा और विभिन्न कमीशन एजेंटों सहित 14 व्यक्तियों और 02 संस्थाओं के खिलाफ माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए), शिमला, हिमाचल प्रदेश के समक्ष अभियोजन शिकायत (पीसी) भी दायर की थी।
विशेष न्यायालय, शिमला ने 04.01.2023 को इस पीसी का संज्ञान लिया था। इससे पहले इस मामले में, ईडी ने 29.01.2021 को 194.14 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को भी अनंतिम रूप से कुर्क किया था। इस अनंतिम कुर्की आदेश की बाद में एलडी एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी, पीएमएलए द्वारा पुष्टि की गई थी। इसके अलावा, ईडी ने इस मामले में 10.01.2025 को 5.8 करोड़ रुपये की सात अचल संपत्तियों को भी अनंतिम रूप से कुर्क किया था। इस मामले में अभी तक 202 करोड़ (लगभग) रुपये की संपत्ति कुर्क हो चुकी है।