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खुलासा: नीरव मोदी की बहन ने फर्जी कंपनियों में भेजे 1,201 करोड़ रुपये
Fri, 22 Mar 2019 08:17 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 22 Mar 2019 08:17 AM IST
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नीरव मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब नेशनल बैंक को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी की बहन पूर्वी मेहता के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट कोर्ट में पूरक चार्जशीट दायर की है। ईडी ने इसमें दावा किया है कि पूर्वी ने कंपनी में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए 1,201.18 करोड़ रुपये डायवर्ट किए हैं।
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8 मार्च को दायर की गई पूरक चार्जशीट में ईडी ने दावा किया है कि मेहता दुबई और हांगकांग में स्थित कंपनियों की निदेशक थी जिसे नीरव मोदी के लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए फंड मिलता था। ईडी की चार्जशीट में लिखा है कि पूर्वी ने धोखाधड़ी के जरिए हुई आय को विदेशी कंपनियों में भेजा।
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मेहता का कहना है कि उसे इन वित्तीय लेन-देन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ईडी की नीरव मोदी की संपत्तियों को जब्त करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दाखिल अपने जवाब में मेहता का कहना है कि उसका इस कथित अपराध से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं मेहता का नाम सिंगापुर स्थित नोवेलर इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और इस्लिंगटन इंटरनेशनल होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड में एक लाभकारी मालिक के रूप में भी सूचीबद्ध है।
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एजेंसी ने पूर्वी के सिंडिकेट बैंक में मौजूद बचत खाते को अटैच किया है। जिसमें 1.96 करोड़ रुपये मौजूद हैं। मेहता का नाम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित लिली माउंटेन इनवेस्टमेंट कंपनी में निदेशक के तौर पर दर्ज है। यह नीरव की उन फर्जी कंपनियों में एक है जिसमें मार्च 2013 और मार्च 2014 के बीच 343.02 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
ईडी की शिकायत में लिखा है, 'फंड को आगे दो कंपनियों फोरकॉम वर्ल्डवाइड इनवेस्टमेंट (3 करोड़) और जेड ब्रिज होल्डिंग्स लिमिटेड (2 करोड़) में ट्रांसफर किया गया। इतनी ही राशि को फायरस्टार इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिए भारत में निवेश किया गया। यह कंपनी नीरव के स्वामित्व वाली है। यह ध्यान देने योग्य बात है कि बाद के वर्षों में इन मध्यस्थ कंपनियों (जेड ब्रिज होल्डिंग्स, फोरकॉम वर्ल्डवाइड इनवेस्टमेंट, लिली माउंटेन इनवेस्टमेंट कंपनी) में किसी तरह का अन्य लेनदेन प्रतिबिंबित नहीं होता है। इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि इन कंपनियों का इस्तेमाल केवल पंजाब नेशनल बैंक से एलओयू के जरिए मिले फंड को ट्रांसफर करने के लिए किया गया।'